बन्दर की पूंछ भी कुत्ते की पूँछ जैसा व्यवहार करती है ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है। जहाँ तक मेरी जानकारी है बन्दर अपनी पूछ से अपने को संतुलित करता है छलांग लगाते समय लेकिन ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि एक बन्दर अपनी पूंछ से भारतीय राजनीति को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है वो भी "कल्याणकारी अर्थशास्त्र" के अंदाज़ में। अभी तो "अंडरएचीवर" मिस्टर मौनी बाबा अपने अर्थशास्त्र के दुरमुस से मिर्ची को चाशनी में डुबो के जनता के मुंह में ठूंसते जा रहे हैं लेकिन बीच में लंदन से एक पूंछ आ टपकी यहाँ की राजनीति सँभालने के लिए। पता नही उन्होंने अपने अर्थशास्त्र की पूंछ से भी किसी भूखे की भूख मिटाई या नहीं लेकिन इतना जरूर है कि महाशय भूखे भ्रष्टाचारियों की भूख जरूर मिटाना चाहते हैं। मैंने कांग्रेसी अनर्थशास्त्री से इस बारे में पूछा तो कहने लगे "...देखिये वो नोबेल पुरस्कार विजेता हैं ..." मैंने पूछा "...बताने के लिए धन्यवाद ...लेकिन इससे भारत को कितना लाभ हुआ ..." वो बोले "...हमें उनके ओपीनियन के जरूरत थी ..." मैंने थोड़ी तल्खी से पूछा "...9 साल तक भूख से मरने वाले कितनी लाशों को गिना उन्होंने ...?" वो थोडा सकपकाते हुए बोले "...उनका काम लाशें गिनना नहीं है ...' मैंने कहा "...आपको पुनःधन्यवाद मेरी जानकारी पुख्ता करने के लिये लेकिन उनका काम लाशें गिनना नहीं है तो ...!" वो गुस्से में बोले "...तो क्या ...वो भाजपा के खिलाफ बोले हैं तो क्या गलत किया ...?" मैंने तल्खी से पूछा "...नोबेल पुरस्कार पाने के इतने सालों के बाद भारतीय संसद पर ही उनको अपना पूंछ लहराने को मिला है ...?" वो कॉन्फिडेंस से सफाई देते हुए बोले "...भाजपा संसद चलने नहीं दे रही ..." मैंने पूछा "...इसका क्या मतलब लंदन से कल्याणकारी पूंछ हिलवाएंगे ...? उन्होंने उत्तर दिया "...उन्होंने भाजपा से पूछा है तो भाजपा को उत्तर देना चाहिए ...!" मैंने कहा "...बन्दर की पूँछ कुत्ते की पूंछ जैसी हरकत करने पर क्या आप थपरी पीटते हैं ...?" वो बोले "...हाँ पीटते हैं ..." मैंने कहा "...फिर तो उन्होंने जितनी लाशों पर अपना पूंछ फिराया है वो बता दें ..." उन्होंने मुझसे पूछा "...इससे क्या होगा ..?" मैंने उत्तर देते हुए कहा "...भाजपा को भी उत्तर देने में कोई दिक्कत नहीं होगी ..." वो बोले "...ये तो बहनेबाजी है ..." मैंने कहा "...ठीक है तो वो साहब ये बता दें कि उनके 'कल्याणकारी अर्थशास्त्र' से कितनो का कल्याण हुआ है ...?" वो थोडा लडखडाते हुए बोले "...देखिये ...वो ..वो ...मैं ...क्या है कि ...उनकी अब बहुत जरूरत है ..." मैंने पूछा "...नए प्रधानमंत्री के रूप में या ...?" वो तुरंत बात काटते हुए बोले "...नहीं नहीं भाजपा से सवाल करना जरूरी था बस ..." मैंने कहा "...ये काम तो कोई भी कर सकता था इसके लिए लंदन से पूंछ फिरवाने की क्या जरूरत थी ...?" वो बोले "...बात इंडिया की है ..." मैंने भी चुटकी लेते हुए कहा "...तो सर्कस दिखने के लिए विदेशी ब्रांड बन्दर कुक्कुर स्टाइल में पूंछ हिलेगा तभी होगा ...!" वो कड़े आवाज में बोले "...आप भाजपा से कहिये संसद चलने दे ...!" मैंने कहा "...ये तो वही बात हुई ...खुद अपना सिर फोड़ कर दूसरों को पत्थर मारना ..." वो बोले "...हम यहाँ राजनीति करने आए हैं ...कुछ और नहीं..." मैंने बीच बात काटते हुए कहा "...इसके लिए किसी की भी पूंछ किसी की भी स्टाइल में हिलवा या फिरवा सकते हैं ....क्यों ...?" अब उनको मेरी बातों से दिक्कत होने लगी थी ...मुझे भी अपना पैकअप कर चलना उचित लगा ....
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