आज कल कांग्रेसी सरकार में पूंछ उठव्वल चल रहा है बड़े सूरमा बने फिर रहे थे लेकिन आलम ये है कि इस सरकार में जिसकी पूंछ उठा के देखो वही मादा निकल रही है....मौनी बाबा की पूंछ उठी वो भी मादा ही निकले...बड़े ताम-झाम थे ए. के. एंटनी के रक्षा मंत्री के मर्द के रूप में लेकिन उनकी भी पूंछ उठी तो जनाब जो निकले वो किसी मादा से कम नहीं थे। सारी मादाएं मर्दानगी का "डोमकच नाच" खेल रही थीं तभी बीच में ज्योतिरादित्य राजे सिंधिया जिनकी अभी पूंछ उठ नहीं सकी है उम्मीद है जल्दी ही उठ जाएगी, ने अपने युवराज की तुलना नरेन्द्र भाई मोदी से कर डाली। यकीन मानिये मुझे तो ऐसा लगा जैसे कोई यमराज को सामने देखकर पता नही किस उम्मीद में "डोमकच" करते हुए गाना गा रहा हो "...देखा है पहली बार साजन की आँखों में प्यार ...नमस्कार..." उनकी दिलेरी की दाद देनी पड़ेगी। मेरे कुटिल मुस्कान को देखकर जलेबी खाते हुए एक खांटी कांग्रेसी ने मुझे धमकी भरे अंदाज में डांटते हुए कहा "...आपको ऐसी कुटिलता शोभा नहीं देती..." मैंने ठहाका लगते हुए कहा "...घबराईये नहीं जल्दी ही सिंधिया साहब की भी पूंछ उठ जाएगी..." उन्होंने प्रतिउत्तर में कहा "...हमारे उपाध्यक्ष का कोई कुछ नहीं कर सकता ..." मैंने कहा "...क्यों बंसल साहब की तरह उनकी भी बलि चढाने का इरादा है...?" उन्होंने कहा "...कांग्रेस की नीतियां बड़ी ठोस होती हैं ..." मैंने कहा "...क्यों उनकी पूंछ आर्डर दे के लोहे की बनवाई गयी है क्या ...?" उन्होंने मुझसे पूछा "...क्या मतलब ...?" मैंने उत्तर देते हुए कहा "...मतलब ये कि क्या उनकी पूंछ इतनी भारी है कि कोई उठा ही सकता...?" वो बड़े कॉन्फिडेंस में बोले "...बिल्कुल..." मैंने उनसे पूछा "...क्यों सुब्रमनियम स्वामी जी ने कोई बड़ा काम नहीं किया ...?" उन्होंने उत्तर देते हुए कहा "...उनका कोई पोलिटिकल आधार ही नहीं है ..." मैंने कहा "...फिर क्या उम्मीद करते हैं आप ...?" उन्होंने चुनौती देते हुए कहा "...कोई कुछ कर के दिखाए तो सही ..." मैंने कहा "...क्या आपके उपाध्यक्ष जी पूंछ स्वयम्वर में राखी जाएगी जो उनकी पूंछ उठा देगा उसके गले में वर माला ..." वो बीच में बात कटते हुए बोले "...देखए आप चुनौती को सिर्फ चुनौती के रूप में लीजिये मजाक में नहीं..." मैंने कहा "...सिंधिया साहब भी उसी नाच में शामिल हो के खुद को चुनौती दे रहे हैं ...इसमें मेरा क्या दोष...?" वो बोले "...उन्होंने सच्चाई को बयां किया है ..." मैंने उनसे सवाल किया "...वो 15 मंत्री और कांग्रेस पार्टी के अनेक पदाधिकारी जिनकी पूंछ उठी और मादा निकले ...वो ...? वो तपाक से बोले "...वो लोग इस्तीफ़ा नहीं देंगे ..." मैंने भी कड़े आवाज में पूछा "...तो क्या देंगे वो लोग ...?" वो जलेबी वाले को पैसा दे जाने लगे ...मेरे बार-बार पूछने पर भी वो चुप-चाप चले गए कोई जवाब नहीं दिया ........
No comments:
Post a Comment