"ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी" तथा मानसिक उन्नति
"ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी" उन लोगों के जीवन भी न सिर्फ प्राणवान करती है बल्कि अनंत उन्नति के मार्ग भी दिखती है जो अपने जीवन से बिल्कुल निराश एवं हताश हो चुके हैं। यद्यपि ऐसे लोग समाज के प्रति बहुत नकारत्मक रूप से सक्रिय नहीं रहते किन्तु अपने परिवार, समाज एवं स्वयं पर भी एक प्रकार से बोझ ही होते हैं। वास्तव में ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी ऐसे समाज, परिवार तथा उस व्यक्ति के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है। अध्ययनों में यह पाया गया है कि ऐसे लोग जो जीवन से हताश व निराश हो चुके थे मानसिक सशक्तिकारण के बाद सामान्य व्यक्तियों से भी बहुत बेहतर बन कर निकले इतना बेहतर के उनमे से बहुतों ने तो इतिहास तक रच दिया ऐसे लोगों के सामाजिक प्रस्तुति वास्तव में न सिर्फ देखने लायक होती है बल्कि अनुकरणीय भी होती है।
ऐसा ही एक मामला गोरखपुर शहर का ही था, लड़के की अदम्य इच्छा थी एयरफोर्स में पायलट बनने की, सो उसने NDA की परीक्षाओं में कई बार बैठा किन्तु दुर्भाग्यवश सफल नहीं हुआ उसके बाद उसने CDS की परीक्षाएं दीं फिर भी सफल नहीं हुआ। परिणाम यह हुआ कि असफलताओं के लम्बे दौर ने उसे बिल्कुल तोड़ के रख दिया उसके मन में आत्महत्या के विचार आने लगे थे, दो बार तो उसने आत्महत्या का प्रयास भी किया। धीरे-धीरे शराब ने भी अपने घेरे में ले लिया एक प्रकार से वो बिल्कुल बोझ बन चुका था। ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी की सहायता से "मानसिक सशक्तिकरण" के द्वारा आज वही व्यक्ति रक्षा मंत्रालय में बड़ा अधिकारी है तथा बहुत सारे सेकेंड लेफ्टिनेंट रैंक के अधिकारी उसे मातहत काम करते हैं। ऐसा व्यक्ति जिसके लिए जीवन जीना भी मुश्किल हो चुका था आज कई जीवन के लिए वरदान बन चुका है, "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी" की सहायता से आज वह उससे भी कहीं आगे निकल गया जो कभी उसका सपना हुआ करता था।
"ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी" उन लोगों के जीवन भी न सिर्फ प्राणवान करती है बल्कि अनंत उन्नति के मार्ग भी दिखती है जो अपने जीवन से बिल्कुल निराश एवं हताश हो चुके हैं। यद्यपि ऐसे लोग समाज के प्रति बहुत नकारत्मक रूप से सक्रिय नहीं रहते किन्तु अपने परिवार, समाज एवं स्वयं पर भी एक प्रकार से बोझ ही होते हैं। वास्तव में ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी ऐसे समाज, परिवार तथा उस व्यक्ति के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है। अध्ययनों में यह पाया गया है कि ऐसे लोग जो जीवन से हताश व निराश हो चुके थे मानसिक सशक्तिकारण के बाद सामान्य व्यक्तियों से भी बहुत बेहतर बन कर निकले इतना बेहतर के उनमे से बहुतों ने तो इतिहास तक रच दिया ऐसे लोगों के सामाजिक प्रस्तुति वास्तव में न सिर्फ देखने लायक होती है बल्कि अनुकरणीय भी होती है।
ऐसा ही एक मामला गोरखपुर शहर का ही था, लड़के की अदम्य इच्छा थी एयरफोर्स में पायलट बनने की, सो उसने NDA की परीक्षाओं में कई बार बैठा किन्तु दुर्भाग्यवश सफल नहीं हुआ उसके बाद उसने CDS की परीक्षाएं दीं फिर भी सफल नहीं हुआ। परिणाम यह हुआ कि असफलताओं के लम्बे दौर ने उसे बिल्कुल तोड़ के रख दिया उसके मन में आत्महत्या के विचार आने लगे थे, दो बार तो उसने आत्महत्या का प्रयास भी किया। धीरे-धीरे शराब ने भी अपने घेरे में ले लिया एक प्रकार से वो बिल्कुल बोझ बन चुका था। ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी की सहायता से "मानसिक सशक्तिकरण" के द्वारा आज वही व्यक्ति रक्षा मंत्रालय में बड़ा अधिकारी है तथा बहुत सारे सेकेंड लेफ्टिनेंट रैंक के अधिकारी उसे मातहत काम करते हैं। ऐसा व्यक्ति जिसके लिए जीवन जीना भी मुश्किल हो चुका था आज कई जीवन के लिए वरदान बन चुका है, "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी" की सहायता से आज वह उससे भी कहीं आगे निकल गया जो कभी उसका सपना हुआ करता था।
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