नरेन्द्र भाई मोदी का जादू अब अद्भुत चमत्कार में बदलने लगा है। कहते हैं कि जादू सर चढ़ कर बोलता है लेकिन वही जादू जब चमत्कार में बदलने लगे तब ...तब तो समझिये कि विरोधियों को अपनी ही सड़ती लाशों से खुशबू आने लगती है जैसा कि कांग्रेस अपने छतीसगढ़ के "सुकमा काण्ड" पर कर रही है। जैसे - जैसे मोदी का प्रभाव बढ़ रहा है वैसे-वैसे अधर्म माने जाने वाले पाप को धर्म और पुण्य माना जाने लगा है। अब देखिये जैसे शिंदे दिल्ली से जयपुर पहुंचे थे तो आतंकवाद का दिव्य ज्ञान लेकर पुहुँचे थे सो उन्होंने बड़े अजीब दार्शनिक अंदाज में कांग्रेस के कान में "हिन्दू आतंकवाद या भगवा आतंकवाद" का मन्त्र फूंका था ...लोग बताते हैं कालांतर में यही मन्त्र खुद उनको और कांग्रेस को ही फूंकने पर उतारू हो गया तो वो खुद ही इस मन्त्र को उतार लिए थे ...अब शिंदे साहब अमेरिका से दिव्य ज्ञान लेकर लौटे हैं आते ही नक्सलियों ने उन्हें अद्भुत तरीके से 27 लोगों की हिट लिस्ट पकड़ा दी ... अभी तक जिस इंटेलीजेन्स विभाग की इंटेलीजेन्सी किराये पर दी गयी थी पता नहीं कैसे कैसे वापस लौट आई और दनादन सूचनाएं प्राप्त होनी शुरू हो गईं। अभी कुछ दिन पहले "सुकमा काण्ड" में घायल व्यक्ति बता रहे थे कि उन नक्सलियों के पास लैपटॉप और टैबलेट भी था और वो अपने कमांडर के संपर्क में थे ... घायल जी ये बताना पता नहीं कैसे भूल गए कि लैपटॉप और टैबलेट से वो नक्सली अपने कमांडर से "फेसबुक" से संपर्क में थे या "ट्विटर" से ...? क्या कीजियेगा नरेन्द्र मोदी के चमत्कार का डर देखते जाईये इन लोगों से क्या-क्या करवाता है। कहा जा रहा है कि यही रफ़्तार रही तो अकेले नरेन्द्र मोदी के दम पर भाजपा को 280 से 330 सीटें आसानी से मिल सकती है, यदि थोडा मेहनत कर दिया जाए तो यही सीटें 350 से ऊपर भी पहुँच जाएंगी ...ध्यान दीजिये ये सीटें अकेले भाजपा की हैं नकि एनडीए की ...वो सब जोड़ दिया जाए तो आंकड़ा 400 से 425 तक भी पहुँच सकता है। क्या अजीब संयोग है पता नहीं किसके कहने पर किसी ने नक्सलियों से 27 लोगों की हिट लिस्ट जारी करवाई जाती है लगता है मेरा पिछले पोस्ट के 3 आंकड़े को बहुत महतवपूर्ण मान लिया गया है इसीलिए 27 की संख्या मतलब 2+7=9/3=3...। लोग बताते फिर रहे हैं कि केन्द्रीय गृहमंत्री अपने पूरे फॉर्म में चल रहे है कहते है कि प्रेसिडेंट मैडम की तरह उनको कोई रहस्यमयी बीमारी नहीं है और अपने आँख के डॉक्टर से मिलने अमेरिका गए थे अतः वो शब्दभेदी बाण चलाना जानते हैं उनका निशाना कभी नहीं चूकता चाहे वो पुणे में हों या दिल्ली में ...उनके भौतिक नेत्र भले किसी की गिरवी हों लेकिन उनके दिव्य नेत्र का कोई जवाब नहीं है ...वो वहीं से बैठे-बैठे देख लेते हैं कि नक्सली दिल्ली में वारदात करने वाले हैं या पुणे में ...हमारे एक्सपर्ट बता रहे थे कि किसी खास कारण से हेलूसिनेशन (ऑडीटरी और विसुअल ) ऐसा बहुत कुछ होता है जो इर्रेलिवेंट होता है। अभी कुछ दिन पहले नरेन्द्र मोदी के डर के मरे लालू जी सेकुलर टोपी पहन कर पटना के गांधी मैदान में अपनी टोपोरियत को चमकाए थे अब देखिये कांग्रेस अपनी टोपोरियत को कैसे चमकाती है। इस पर एक खांटी कांग्रेसी कह रहे थे "...हमको नरेन्द्र मोदी से डर नहीं है ..." मैंने पूछा "...तो फिर किससे डर है ...?" वो बोले "...जोगी ने सारा खेल खराब कर दिया ..." मैंने कहा "...फिर .." वो बोले "...शोले देखा हूँ फिर से ..." मैंने आश्चर्य से पूछा "...क्या मतलब ..." वो थोडा अचकचाते हुए बोले "...गब्बर कहता है कि गब्बर के डर से अगर कोई बचा सकता है तो वो वो है गब्बर ..." मैंने कहा "...अच्छा है शुभकामना आपको ..." उनकी आँखों में नए भविष्य को लेकर नई चमक थी ....
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