Friday, 3 May 2013

ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी तथा कॉर्पोरेट प्रोफेशनल मैनेजमेंट
ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी (उन्नत मनोविज्ञान = एडवांस साइकोलॉजी) वास्तव में इतनी उन्नत है कि गंभीर बौद्धिक कार्य करने वालों के लिए ये किसी वरदान से कम नहीं है। सामान्यतः ये देखा गया है कि गंभीर बौद्धिकता वाले प्रोफेशनल्स में एंग्जायटी और मूड डिसऑर्डर होने की सम्भावना बहुत ज्यादा रहती है जिससे न सिर्फ उनके कार्य करने की गति प्रभावित होती है बल्कि माहौल भी नकरात्मक रूप से प्रभावित होने लगता है। विपणन (मार्केटिंग) एवं  प्रोजेक्ट मैंनेजर्स में अपने लक्ष्य (टारगेट) प्राप्त करने को लेकर इतना दबाव एवं तनाव रहता है कि उसकी इंटेलीजेन्सी असमान्य रूप से प्रभावित होती रहती है ऐसी असमान्यता से बचने तथा उत्तरोत्तर मानसिक उन्नयन के लिए ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी बहुत कारगर है साथ ही आवश्यक भी  अन्यथा ऐसी असामन्य अवस्था के लम्बे समय तक बने रहने पर इंटेलीजेन्सी तो घटती ही है साथ ही मूड या एंग्जायटी डिसऑर्डर या दोनों के होने के साथ-साथ व्यक्ति का व्यवहार भी प्रभावित होता है। ऐसा ही एक मामला आया चार्टर अकाउंटटेंट (सी .ए .) का जो पिछले 12 साल से अवसाद (डिप्रेशन) से पीड़ित थे तथा मनोचिकित्सकीय इलाज से परेशान हो चुके थे। ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी की मदद से बिना किसी दवा के वो मात्र 1 महीने में ही स्थाई रूप से न सिर्फ बिल्कुल ठीक हो गए बल्कि उनका मस्तिष्क पहले से काफी सशक्त भी हो गया किसी भी समस्या का तीव्र समाधान खोज लेने में आज उनको कोई परेशानी नहीं होती। आज की तारीख में उनका बिज़नस काफी तेजी से बढ़ रहा है जो पहले संभव नहीं था।
कॉर्पोरेट जगत में उच्च पदों के प्रोफेशनल अधिकारीयों के लिए भी "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी" बहुत कारगर है जिसके माध्यम से वे अधिकारी न सिर्फ तनाव और मानसिक दबाव का सकारात्मक उपयोग करने में सफल रहते हैं "समस्याओं को अवसर" में बदल लेने की क्षमता भी विकसित कर लेते हैं।अनेक कंपनियों के कुछ अधिकारीयों ने इस विकसित विधा के लाभ उठाते हुए न सिर्फ कंपनी को उच्च मुकाम तक पहुंचाया बल्कि उन्होंने तेजी से प्रमोशन भी प्राप्त किया, उसमे से कुछ तो प्रमोशन करते हुए अपनी कंपनी में सबसे कम उम्र के जनरल मेनेजर तक बन गए।

No comments:

Post a Comment