Friday, 3 May 2013

ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी तथा हाइपरटेंशन
"ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी" इतनी उन्नत और विकसित है कि इसके माध्यम से मस्तिष्क की प्रवृत्तियों के "न्यूरल पाथवेज़" को सुधार कर या पुनर्निमित करके हम शारीरिक स्वास्थ्य को भी न सिर्फ नियंत्रित कर सकते है बल्कि कई गंभीर समस्याओं का स्थाई निराकरण भी कर सकते हैं। अब उच्चरक्तचाप (हाइपरटेंशन) को ही ले लें इससे ग्रस्त लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है तथा यह पूरी तरह व्यक्ति की मानसिकता पर निर्भर करती है।  इसका कोई इलाज नहीं है यदि आप किसी चिकित्सक के पास जाईये तो वो सीधे कहेगा कि आपको जीवन भर दवा खानी है धीरे-धीरे आप दवा पर निर्भर होते चले जाते है और आपका शरीर उसके प्रति उतना ही सहनशील होता चला जाता है नतीजा यह होता है कि दवा की मात्रा बढ़नी पड़ती है और उत्तरोत्तर बढ़ती चली जाती है अंततः एक दिन दवा भी काम करना बंद कर देती है। दवा का साइड इफ़ेक्ट अलग से आप झेलते हैं। "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी" के माध्यम से इसका कारगर और तीव्र निदान उपलब्ध है वो बिना किसी दवा के।
ऐसा ही एक मामला एक 28 वर्षीय लड़के का था जो उच्चरक्तचाप से काफी दिनों से बहुत परेशान था दवा का सेवन करने की बाध्यता थी। "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी" के माध्यम से लगभग 30 - 40 दिनों में ही उसे इस बीमारी से पूरी तरह निजात मिल गयी। आज उसे ना तो किसी तरह की कोई घबराहट, बेचैनी या परेशानी होती है और न ही उसे इसके लिए किसी तरह की दवा की जरूरत है। "मानसिक सशतिकरण" से सशक्त मानसिकता से वो बिल्कुल सामान्य और शानदार जीवन व्यतीत कर रहा है।     

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