तोता-मैना की कहानी से बड़े-बड़े सूरमा प्रेरणा लेते फिरते थे लेकिन कहानी बदनाम हो गयी, मैना तो इस कदर पहलवान निकली कि बेचारे तोता को को निरा पालतू बना डाला था। लेकिन मजा देखिये वही मैना जब तोते को किसी की ओर लहकाती थी तो बड़े - बड़े लोग जो खुद को हाथी, तीरंदाज, साईकिल पंक्चरिस्ट और न जाने क्या-क्या समझते थे भीगी बिल्ली बन जाते थे। लेकिन माननीय से देखा नहीं गया सो उन्होंने ठान ही लिया कोयले से बेचारे तोता के मुंह पे कालिख पुतने से बचाएगे सो उन्होंने उपाय करना शुरू किया तो मैना की हालत ही इसलिए खराब हो गयी क्योंकि अब तोता उतारू हो गया मैना को सबक सिखाने के लिए। जानकार बताते हैं कि मैना की नींद उडी हुई है लिहाजा बहुत करीने से इस बदनाम हो चुकी कहानी को "नामी" करने का प्रकिया मैना ने उसी आड़ में शुरू कर दिया है जिसके आधार पर तोते को स्वतंत्र किया जाना है वो भी उच्च निगरानी में। इसके लिए मैना ने जिन पांच सिपहसालारों को तैनात किया है जानकार बताते हैं तोता अगर स्वतंत्र हुआ तो उनको भी कच्चा चबा जाएगा इसलिए उघटापैंची चालू है। इस पर एक खांटी कांग्रेसी कह रहे थे "...माननीय को ऐसा नहीं करना चाहिए ..." मैंने उनसे पूछा "...तो क्या करना चाहिए ...?" खांटी कांग्रेसी बोले "...माननीय को हद में रहना चाहिए ..." मैंने बेरुखी से कहा "...जो आप हद पार करते हैं उसका क्या ...?" खांटी बोले "...जो कहा जा रहा है सही कहा है ..." मैंने कहा "...सरकार को आगे बढ़ने के ये कौन सी टेक्नोलॉजी है ...?" उन्होंने मुझसे पूछा "...क्या मतलब ..." मैंने कहा "....किसी कुत्ते की पूंछ से लटक कर ऐसा करने की क्या जरूरत है ...?" खांटी बोले "...राजनीति में कुछ भी संभव है ...!" मैंने कहा "...मैंने पहली बार देखा है किसी कुत्ते को पीछे से भौंकते हुए ...ये तो बिल्कुल सरकार चलने की अत्याधुनिक जेट प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी है ...इसीलिए अमेरिका के हाथों भारत को बेचना चाहते हैं ..." खांटी थोडा गुस्से में बोले "...आप लोगो को मीन-मेख निकालने के सिवा कोई और काम नहीं है क्या ...?" मैंने कहा "...तोते को तोड़ने - मरोड़ने वाले नप गए तोते को भूख लगी तो एक और लोहा ब्रांड सिपहसलार को कच्चे चबा गया ...बावजूद इसके कि वो बकरे के साथ और भी शक्तिशाली थे ...!" खांटी बोले "...आजादी के मुद्दे पर खुद उधर से ही प्रस्ताव आया है कि सीमित आजादी चाहिए ...!" मैंने कहा "...तोते की चोंच में मैना ने फिर से जबरदस्ती मिर्ची के बजाय कोयला ठूंसने का प्रयास कर रही है ..." खांटी बोले "...देखिये हम सिस्टम को बाईपास नहीं कर सकते ..." मैंने बोला "...सीमित का मतलब क्या है ...? आज़ादी तो आजादी है ..." खांटी बोले "...राजनीति में बहुत कुछ देखना पड़ता है ...!" मैंने कहा "...मतलब भ्रष्टाचार और चोरकटई के सहारे ही सब कुछ फिर से होगा ..." खांटी बोले "...जनता को स्थिरता चाहिए ..." मैंने तल्खी से पूछा "...जनता को या आपको भ्रष्टाचार और चोरकटई कर के बचने के लिए..." खांटी बोले "...जनता को चाहिए ..." मैंने पूछा "...इससे तो अच्छा है तोता आज़ाद हो जाए ..." खांटी बोले "...जनता का जो नुकसान होगा उसकी भरपाई कौन करेगा ..." मैंने कहा "...आजाद तोता ही सक्षम होगा रिकवरी के लिए ..." खांटी पता नहीं किसको फ़ोन मिलाने लगे तो मुझे लगा कि अब वहां से खिसक लेना ही बेहतर है ....मैंने खांटी को नमस्कार कहा ...
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