"ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" तथा समान्य छात्र
जो छात्र समान्य और परम्परिक क्षेत्रो (जैसे BA, BSc, B.Com, MA, M.Sc., M.Com आदि )में अध्ययन कर रहे हैं अक्सर उनके सामने अपने जीवन को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है चूंकि वे व्यवसायिक कोर्सेज में नहीं होते लिहाजा अपने उद्देश्य को लेकर काफी परेशान रहते हैं। इस परेशनी उनको नौकरी के सन्दर्भ में दूसरों के ओपेनियन पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ता है अपेक्षाकृत अपने अन्दर छिपी प्रतिभा पर भरोसा करने के। इसका परिणाम ये होता है कि वे भटकाव के शिकार हो जाते हैं और उनके सामने जिस प्रकार का कार्य प्रस्ताव आता है उसे आधे-अधूरे मन से स्वीकार करने के बाध्यता रहती है। पूरे मन से स्वीकार न करने के कारण वे अपनी सर्वोत्तम प्रस्तुति उस संस्था को नहीं डे पाते जिससे न तो संस्था का पर्याप्त विकास हो पता है और न ही वे स्वयं अपना विकास कर पाते हैं। अतः ये बहुत आवश्यक है वे सभी छात्र - छात्राएं अपनी छिपी प्रतिभा के पहचाने और उसी के अनुसार अपने करियर का चयन करें। इससे न केवल वो अपना सर्वोत्तम प्रस्तुति देने में सफल रहेंगे बल्कि वे अपना विकास भी कायदे से कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें सबसे बेहतरीन और विकसित विधा "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" की सहायता लेनी चाहिए जो उनका सूक्ष्म अनुसंधान कर उनकी प्रतिभा को तो निकालेगी ही साथ ही उसके उपयोग का स्वभाविक रास्ता भी सुझाएगी।
मऊ जिले का मामला है एक छात्र जो बी.एड. कर रहा था कुछ दिनों पहले अचानक डिप्रेशन में आ गया और उत्तरोत्तर उसका ये मर्ज बढ़ता ही जा रहा था लिहाजा उसने अपने आप को उसने BHU के मनोचिकित्सा विभाग में दिखाया। इलाज शुरू हुआ हर 15 दिनों पर उसे डॉक्टर के परामर्श के अनुसार दवा लेने के साथ-साथ परम्परिक मनोविज्ञान के अनुसार उसकी काउन्सलिंग भी होती थी। इन सबके बावजूद उसकी स्थिति खराब होती ही जा रही थी। लगभग 6-7 महीने के बाद जब वो BHU से दवा लेकर और काउन्सलिंग करवाकर लौटा तो और स्थिति खराब हो जाने के कारण लगभग तीन दिनों के बाद उसने आत्महत्या करने की नियत से पुल से नदी में छलांग लगा दी। वो तो अच्छा हुआ कि पास में ही कुछ मछुआरे थे जिन्होंने उसे बचा लिया। उसने उसके बाद उसने "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" की शरण ली। आज न सिर्फ डिप्रेशन से पूरी तरह मुक्त है बल्कि उसके शब्दकोश से असंभव और भाग्य शब्द ही गायब चुके हैं क्योंकि "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" की बदौलत वो मानसिक रूप से वो बेहद मजबूत हो चुका है।
जो छात्र समान्य और परम्परिक क्षेत्रो (जैसे BA, BSc, B.Com, MA, M.Sc., M.Com आदि )में अध्ययन कर रहे हैं अक्सर उनके सामने अपने जीवन को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है चूंकि वे व्यवसायिक कोर्सेज में नहीं होते लिहाजा अपने उद्देश्य को लेकर काफी परेशान रहते हैं। इस परेशनी उनको नौकरी के सन्दर्भ में दूसरों के ओपेनियन पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ता है अपेक्षाकृत अपने अन्दर छिपी प्रतिभा पर भरोसा करने के। इसका परिणाम ये होता है कि वे भटकाव के शिकार हो जाते हैं और उनके सामने जिस प्रकार का कार्य प्रस्ताव आता है उसे आधे-अधूरे मन से स्वीकार करने के बाध्यता रहती है। पूरे मन से स्वीकार न करने के कारण वे अपनी सर्वोत्तम प्रस्तुति उस संस्था को नहीं डे पाते जिससे न तो संस्था का पर्याप्त विकास हो पता है और न ही वे स्वयं अपना विकास कर पाते हैं। अतः ये बहुत आवश्यक है वे सभी छात्र - छात्राएं अपनी छिपी प्रतिभा के पहचाने और उसी के अनुसार अपने करियर का चयन करें। इससे न केवल वो अपना सर्वोत्तम प्रस्तुति देने में सफल रहेंगे बल्कि वे अपना विकास भी कायदे से कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें सबसे बेहतरीन और विकसित विधा "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" की सहायता लेनी चाहिए जो उनका सूक्ष्म अनुसंधान कर उनकी प्रतिभा को तो निकालेगी ही साथ ही उसके उपयोग का स्वभाविक रास्ता भी सुझाएगी।
मऊ जिले का मामला है एक छात्र जो बी.एड. कर रहा था कुछ दिनों पहले अचानक डिप्रेशन में आ गया और उत्तरोत्तर उसका ये मर्ज बढ़ता ही जा रहा था लिहाजा उसने अपने आप को उसने BHU के मनोचिकित्सा विभाग में दिखाया। इलाज शुरू हुआ हर 15 दिनों पर उसे डॉक्टर के परामर्श के अनुसार दवा लेने के साथ-साथ परम्परिक मनोविज्ञान के अनुसार उसकी काउन्सलिंग भी होती थी। इन सबके बावजूद उसकी स्थिति खराब होती ही जा रही थी। लगभग 6-7 महीने के बाद जब वो BHU से दवा लेकर और काउन्सलिंग करवाकर लौटा तो और स्थिति खराब हो जाने के कारण लगभग तीन दिनों के बाद उसने आत्महत्या करने की नियत से पुल से नदी में छलांग लगा दी। वो तो अच्छा हुआ कि पास में ही कुछ मछुआरे थे जिन्होंने उसे बचा लिया। उसने उसके बाद उसने "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" की शरण ली। आज न सिर्फ डिप्रेशन से पूरी तरह मुक्त है बल्कि उसके शब्दकोश से असंभव और भाग्य शब्द ही गायब चुके हैं क्योंकि "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" की बदौलत वो मानसिक रूप से वो बेहद मजबूत हो चुका है।
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