Friday, 3 May 2013

"ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथीरेपी" तथा जटिल मानसिक विकृतियाँ
"ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथीरेपी" के सटीकता एवं अत्यंत सूक्ष्म स्तर पर भी मानसिक विकृतियों के मूल कारणों की पहचान कर लेने की क्षमता के कारण इसके लिए किसी प्रकार के प्रकार के मानसिक विकृति का औषधि रहित एवं स्थाई निदान करना बिल्कुल सरल है चाहे वो विकृति कितनी भी जटिल क्यों न हो। यह  इतनी उन्नत एवं विकसित विद्या है कि इसके लिए जटिलता का कोई मतलब ही नहीं है। वैसे भी अध्ययनों में यह पाया गया है कि एक ही प्रवृत्ति के "न्यूरल पाथवेज" में गड़बड़ी के कारण भी अनेक मानसिक विकृतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं जिसे मात्र "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी" से ही ठीक किया जा सकता है कोई और उपाय नहीं है।
ऐसा ही एक व्यक्ति लगभाग 4 वर्षों से कई प्रकार की मानसिक विकृतियों (मल्टीपल मेन्टल डिसऑडर्स) से बहुत अधिक परेशान थे, वो एक अध्यापक थे और 3.5 वर्षों से अपनी मानसिक परेशनी के कारण स्कूल नहीं जा पा रहे थे। बहुत अधिक दवाओं के बहुत अधिक सेवन भी उनके स्वास्थ्य को तेजी से नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा था। दरअसल उनकी परेशानी "पैनिक अटैक" से शुरू हुई थी फिर मूड डिसऑर्डर हुआ, शिजोफ्रेनिया के हलके लक्षण भी दिखने लगे थे जो उनकी आर्थिक असुरक्षा के कारण था, पर्सनालिटी डिसऑर्डर, निराशावादिता सहित PTSD भी था। "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी" की सहयता से पहले 15 दिनों में ही उनकी दवा की मात्र घट कर आधी रह गयी फिर अगले 10 दिनों में उनको दवाओं से मुक्ति मिल गयी। फिर अगले करीब 20 से 25 दिनों में वो इतने ठीक हो गए कि स्कूल भी जाने लगे फिर उसके बाद पर्याप्त  "मानसिक सस्शक्तिकरण" के पश्चात बच्चों को ट्यूशन पढ़ा कर अपनी आमदनी बढ़ने में सफल हैं। 

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