Friday, 3 May 2013

"ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी" तथा मानसिक सशक्तिकरण
"ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी" के माध्यम से बहुत कुछ सरलता से संभव है जो किसी अन्य माध्यम से या तो असंभव है या इतना मुश्किल कि उसके लिए समर्थ होना भी मुश्किल है। जैसे सामान्य काम काजी लोग जिनका बिज़नस या उनकी नौकरी इतनी स्थिर या यथा स्थिति में है कि उसमे यथोचित विकास ही नहीं हो पाता। ऐसे लोग अपने बिज़नस या नौकरी को लेकर काफी परेशान रहते हैं क्योकि दिन पर दिन खर्चे बढ़ते चले जाते हैं। वैसे भी समय के साथ विकास जरूरी होता है। इसका एक मात्र उपाय है "मानसिक सशक्तिकरण" के माध्यम से मानसिक उन्नयन जो किसी भी स्थिति में सामान्य पारंपरिक मनोविज्ञान से संभव ही नहीं है। यदि वो किसी बिज़नस एक्सपर्ट के पास जाते हैं तो उनकी फीस ही इतनी ज्यादा है कि किसी के लिए भी उसके लिए समर्थ होना बहुत मुश्किल है। दरअसल यह मामला अवधारणा का है जो "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी" के माध्यम से ही संभव है। इस प्रकार के बहुत से लोग मेरे पास आते हैं जिनको "उन्नत मानसिकता" की बहुत सख्त आवश्यकता होती है वो सफलता पूर्वक "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी" के मध्यम इसे प्राप्त भी करते हैं।
एक दिलचस्प मामला मेरे पास करीब 2 साल पहले एक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव का आया था वो एक इन्सुलिन बनाने वाली कंपनी के एम.आर. थे, काफी दिनों से उनका प्रमोशन नहीं हो पा रहा था। मेरे पास आए और "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी" के माध्यम से उन्होंने अपनी मानसिकता को काफी उन्नत कर लिया जिससे उनकी काम करने की क्षमता (वर्क-मेन्टल एफिशिएंसी) बहुत बढ़ गयी, परिणाम ये हुआ कि मात्र 4 महीने के अन्दर ही उनका प्रमोशन हो गया। आज वो दिल्ली में है पूरी दिल्ली के एरिया मेनेजर हैं कंपनी की तरफ से उनको गाडी तथा रहने की सुविधा भी मिली हुई है, शानदार जीवन जी रहे हैं सतत विकास व उन्नति के साथ।
मेरे ऐसे मित्रों की भी एक बड़ी संख्या है जिन्होंने छात्र जीवन में ही "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी" के माध्यम से अपना "मानसिक सशक्तिकरण" कराया था उनमे से सभी के सभी आज बहुत अच्छी - अच्छी पदों पर हैं। लेकिन बहुत से लोग इससे वंचित रह गए क्योंकि उन्होंने मुझे मजाक में लिया था उनमे से बहतेरे आज भी भटक रहे हैं या फिर गलत तरीके से नौकरी प्राप्त किया।  

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