"ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" तथा प्रोफेशनल स्टूडेंट्स
अक्सर ऐसा देखा जाता है कि प्रोफेशनल कोर्सेज जैसे (MBBS, BE, B.Tech, MBA, BBA, MCA etc.) आदि कोर्सेस में दाखिला लेते हैं तो वे बहुत ज्यादा तनाव का तो सामना करते ही हैं साथ ही हैं कई प्रकार की कुंठा के भी शिकार हो जाते हैं कोर्स पूरा करने का तनाव तो होता ही है साथ ही कोई और विकल्प न होने कारण स्थिति और भी विकट हो जाती है ऐसी गंभीर समस्या केवल कम्पटीशन बीट करके दाखिला लेने वालों के साथ भी बहुत बड़ी मात्रा में होती है यही कारण है IIT जैसे संस्थान में अध्ययन करने वाले छात्र नशे के चपेट में आ जाते हैं शराब का नशा तो आम बात हो चुकी है डिप्रेशन, एंग्जायटी डिसऑर्डर, पर्सनालिटी डिसऑर्डर आदि मानिसक विकृतियाँ लगभग आम हो चली हैं इन संस्थाओं का कॉन्फेशन पेज इस खतरनाक स्थिति को दर्शाता है। जो छात्र डोनेशन दे कर प्रोफेशनल संस्थाओं में दाखिला लेते हैं उनकी स्थिति तो और भी बुरी होती है। किसी भी कीमत पर हमें इन संस्थाओं को मानसिक विकृतियों से बचाना बहुत आवश्यक है क्योंकि इससे न सिर्फ उत्पादकता प्रभावित होती है बल्कि इन छत्रों की "मानसिक क्षमता" पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। इस गंभीर समस्या का स्थाई समाधान "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" से ही संभव है। क्योंकि मात्र इसी विधा से हम प्रोफेशनल छात्रों को "मानसिक शक्ति" प्रदान कर सकते हैं।
अभी कुछ दिनों पहले एक मामला लखनऊ के एक B. Tech के छात्र का आया था। दरअसल उसका दाखिला मध्य प्रदेश के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में डोनेशन पर हुआ था। किसी प्रकार से वो पहला साल तो निकाल लिया लेकिन दूसरे साल में उसे बहुत परेशानी होने लगी अध्ययन से उसका मन भागने लगा और धीरे-धीरे उसकी आत्महत्या करने की इच्छा बढ़ने लगी थी। वह घर लौट आया तो वास्तव में घर वाले बिल्कुल स्तब्ध रह गए थे। लेकिन जीवन की बात समझ कर समझौता करने पर विवश थे। लेकिन उन्होंने ""ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" की सहायता ली और मात्र 1 महीने के अन्दर वो छात्र न सिर्फ डिप्रेशन से बिल्कुल बहार आ गया बल्कि "मानसिक रूप से अत्यंत सशक्त" भी गया। वो अपने कॉलेज गया और पढाई फिर से शुरू की अब काफी शानदार परफोर्मेंस है उसका। दरअसल उन सभी छत्रों को इस "उन्नत और अतिविकसित मनोविज्ञान" का लाभ निश्चित रूप से उठाना चाहिए जो प्रोफेशनल कोर्स कर रहे हैं इससे वो नया इतिहास भी रच सकते हैं। उन छत्रों को तो अवश्य ही इस विधा से अपनी मानसिकता को सशक्त कर लेना चाहिए जो प्रोफेशनल कोर्सेस में दाखिला लेने जा रहे हैं जिससे न सिर्फ वो अपने कोर्स को शानदार तरीके से पूरा कर सकें, कई पेटेंट भी हासिल कर सकें बल्कि विकृतियों से भी दूर रह सकें।
अक्सर ऐसा देखा जाता है कि प्रोफेशनल कोर्सेज जैसे (MBBS, BE, B.Tech, MBA, BBA, MCA etc.) आदि कोर्सेस में दाखिला लेते हैं तो वे बहुत ज्यादा तनाव का तो सामना करते ही हैं साथ ही हैं कई प्रकार की कुंठा के भी शिकार हो जाते हैं कोर्स पूरा करने का तनाव तो होता ही है साथ ही कोई और विकल्प न होने कारण स्थिति और भी विकट हो जाती है ऐसी गंभीर समस्या केवल कम्पटीशन बीट करके दाखिला लेने वालों के साथ भी बहुत बड़ी मात्रा में होती है यही कारण है IIT जैसे संस्थान में अध्ययन करने वाले छात्र नशे के चपेट में आ जाते हैं शराब का नशा तो आम बात हो चुकी है डिप्रेशन, एंग्जायटी डिसऑर्डर, पर्सनालिटी डिसऑर्डर आदि मानिसक विकृतियाँ लगभग आम हो चली हैं इन संस्थाओं का कॉन्फेशन पेज इस खतरनाक स्थिति को दर्शाता है। जो छात्र डोनेशन दे कर प्रोफेशनल संस्थाओं में दाखिला लेते हैं उनकी स्थिति तो और भी बुरी होती है। किसी भी कीमत पर हमें इन संस्थाओं को मानसिक विकृतियों से बचाना बहुत आवश्यक है क्योंकि इससे न सिर्फ उत्पादकता प्रभावित होती है बल्कि इन छत्रों की "मानसिक क्षमता" पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। इस गंभीर समस्या का स्थाई समाधान "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" से ही संभव है। क्योंकि मात्र इसी विधा से हम प्रोफेशनल छात्रों को "मानसिक शक्ति" प्रदान कर सकते हैं।
अभी कुछ दिनों पहले एक मामला लखनऊ के एक B. Tech के छात्र का आया था। दरअसल उसका दाखिला मध्य प्रदेश के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में डोनेशन पर हुआ था। किसी प्रकार से वो पहला साल तो निकाल लिया लेकिन दूसरे साल में उसे बहुत परेशानी होने लगी अध्ययन से उसका मन भागने लगा और धीरे-धीरे उसकी आत्महत्या करने की इच्छा बढ़ने लगी थी। वह घर लौट आया तो वास्तव में घर वाले बिल्कुल स्तब्ध रह गए थे। लेकिन जीवन की बात समझ कर समझौता करने पर विवश थे। लेकिन उन्होंने ""ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" की सहायता ली और मात्र 1 महीने के अन्दर वो छात्र न सिर्फ डिप्रेशन से बिल्कुल बहार आ गया बल्कि "मानसिक रूप से अत्यंत सशक्त" भी गया। वो अपने कॉलेज गया और पढाई फिर से शुरू की अब काफी शानदार परफोर्मेंस है उसका। दरअसल उन सभी छत्रों को इस "उन्नत और अतिविकसित मनोविज्ञान" का लाभ निश्चित रूप से उठाना चाहिए जो प्रोफेशनल कोर्स कर रहे हैं इससे वो नया इतिहास भी रच सकते हैं। उन छत्रों को तो अवश्य ही इस विधा से अपनी मानसिकता को सशक्त कर लेना चाहिए जो प्रोफेशनल कोर्सेस में दाखिला लेने जा रहे हैं जिससे न सिर्फ वो अपने कोर्स को शानदार तरीके से पूरा कर सकें, कई पेटेंट भी हासिल कर सकें बल्कि विकृतियों से भी दूर रह सकें।
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