"ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" तथा कोचिंग करने वाले छात्र
कोचिंग करके विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams ) जैसे CPMT, AIPMT, AIIMS, AIJEE, UPTU, BANK P.O., CIVIL CERVICES आदि की तैयारी करने वाले छात्रों को "उच्च मानसिक व बौद्धिक क्षमता" की बहुत आवश्यकता रहती है। "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" की सहायता से "मानसिक सशक्तिकरण" प्राप्त कर लेने वाले प्रतियोगी छात्र अत्यधिक मानसिक तनाव और दबाव का सकारात्मक उपयोग करते हुए सरलता से और सहज रूप में अपनी बौद्धिक स्मरण शक्ति, कल्पना शक्ति, तार्किक शक्ति, आत्मविश्वास, अवसर प्रबंधन, तेजी से सही निर्णय लेने के क्षमता, बौद्धिक विमर्श आदि अन्य जीवंत प्रवित्तियोँ को पूरी तरह सुदृढ़ और बहुत मजबूत कर सकते हैं जिससे छात्र तेजी से तो सीखते , समझते और याद करते ही हैं साथ ही उतनी ही तत्परता से वो अपने स्मरण शक्ति का प्रयोग करते हुए ज्ञान का उचित उपयोग भी करते हैं यह "बौद्धिक क्षमता" मात्र "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" से ही मिलना संभव है कहीं और से नहीं। "मानसिक सशक्तिकरण" बहुत आवश्यक होता है क्यों कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में पैसा बहुत लगता है और उससे बड़ी बात समय बहुत कीमती होता है जितना समय बीतता जाता है उतना ही पैसा लगता जाता है। ऐसी परिस्थितियों में मानसिक तनाव व दवाव बढ़ाने वाले बहुत से करक-घटक होते हैं जिनके कारण छत्रों की न सिर्फ क्षमता कम हो जाती है और उनका चयन भी मुश्किल में पड़ जाता है बल्कि कई प्रकार की "मानसिक विकृतियों" के भी शिकार हो जाते हैं जिसके कारण उनको सामान्य जीवन जीने में भी मुश्किल होती है। "उच्च मानिसक दबाव व तनाव" को ठीक से प्रबंधित न कर पाने के कारण उनका बहुमूल्य धन तो डूबता ही है साथ ही समय भी गवां देते हैं। इसलिए इन परेशानियों से बचने एवं अपना चयन समय से सुनिश्चित करने के लिए ये बहुत आवश्यक है कि कोचिंग संस्थाओं से जुड़ने (Joining Coaching Institutes ) पहले निश्चित रूप से वे अपनी मानसिकता और बौद्धिकता को "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" के माध्यम से सशक्त कर लें। इससे सामय और पैसे दोनों की बचत होगी और फिर ये एडवांस थेरेपी बहुत सस्ती भी है और सटीकता के हद तक कारगर भी।
वैसे सामान्यतः ऐसे बहुत से छात्र लखनऊ, कानपुर, कोटा आदि से आते हैं जिन्होंने अत्यधिक तनाव और दबाव के कारण कोचिंग ज्वाइन करने कुछ ही दिनों बाद कोचिंग छोड़ दिया था, ध्यान देने वाली बात ये है कि देश की लगभग सभी बड़ी और नामी कोचिंग संस्थाएं अपने यहाँ मनोवैज्ञानिक भी रखती हैं लेकिन वे समस्या का समाधान करने बजाय और गंभीर बना देते हैं। ऐसा एक मामला आया था कानपुर के छात्र का जो PMT/CPMT आदि की तैयारी कर रहा था। लगभग 6 महीने तैयारी करने के बाद अत्यधिक तनाव के कारण उसका पेट खराब रहने लगा, इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाने के कारण उसे पीलिया ने भी जकड लिया नतीजतन उसे कानपुर छोड़ना पड़ गया। पूरे दो साल तक उसका इलाज चला फिर भी उसका पेट ठीक नहीं हो रहा था। जब उसने मुझसे संपर्क किया तो उसके मनोअवस्था का ग्राफोलोगजिकल जाँच के बाद पता चला कि वो गंभीर डिप्रेशन में है। फिर उसी के आधार पर "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" उसका "मानसिक सशक्तिकरण" कर दिया गया, नतीजा ये हुआ कि न सिर्फ उसका पेट बिल्कुल ठीक हो गया बल्कि उसका उसी साल CPMT से MBBS में सिलेक्शन भी हो गया।
कोटा से भी बहुत से केसेस आते हैं जिनको डिप्रेशन, ओबसेशन आदि की शिकायत होती है जिससे उनका मन पढने में बिल्कुल नहीं लगता "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" के माध्यम से पूरी मानसिक शक्ति प्राप्त कर लेते हैं साथ ही चयन भी सुनिश्चित कर लेते हैं।
कोचिंग करके विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams ) जैसे CPMT, AIPMT, AIIMS, AIJEE, UPTU, BANK P.O., CIVIL CERVICES आदि की तैयारी करने वाले छात्रों को "उच्च मानसिक व बौद्धिक क्षमता" की बहुत आवश्यकता रहती है। "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" की सहायता से "मानसिक सशक्तिकरण" प्राप्त कर लेने वाले प्रतियोगी छात्र अत्यधिक मानसिक तनाव और दबाव का सकारात्मक उपयोग करते हुए सरलता से और सहज रूप में अपनी बौद्धिक स्मरण शक्ति, कल्पना शक्ति, तार्किक शक्ति, आत्मविश्वास, अवसर प्रबंधन, तेजी से सही निर्णय लेने के क्षमता, बौद्धिक विमर्श आदि अन्य जीवंत प्रवित्तियोँ को पूरी तरह सुदृढ़ और बहुत मजबूत कर सकते हैं जिससे छात्र तेजी से तो सीखते , समझते और याद करते ही हैं साथ ही उतनी ही तत्परता से वो अपने स्मरण शक्ति का प्रयोग करते हुए ज्ञान का उचित उपयोग भी करते हैं यह "बौद्धिक क्षमता" मात्र "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" से ही मिलना संभव है कहीं और से नहीं। "मानसिक सशक्तिकरण" बहुत आवश्यक होता है क्यों कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में पैसा बहुत लगता है और उससे बड़ी बात समय बहुत कीमती होता है जितना समय बीतता जाता है उतना ही पैसा लगता जाता है। ऐसी परिस्थितियों में मानसिक तनाव व दवाव बढ़ाने वाले बहुत से करक-घटक होते हैं जिनके कारण छत्रों की न सिर्फ क्षमता कम हो जाती है और उनका चयन भी मुश्किल में पड़ जाता है बल्कि कई प्रकार की "मानसिक विकृतियों" के भी शिकार हो जाते हैं जिसके कारण उनको सामान्य जीवन जीने में भी मुश्किल होती है। "उच्च मानिसक दबाव व तनाव" को ठीक से प्रबंधित न कर पाने के कारण उनका बहुमूल्य धन तो डूबता ही है साथ ही समय भी गवां देते हैं। इसलिए इन परेशानियों से बचने एवं अपना चयन समय से सुनिश्चित करने के लिए ये बहुत आवश्यक है कि कोचिंग संस्थाओं से जुड़ने (Joining Coaching Institutes ) पहले निश्चित रूप से वे अपनी मानसिकता और बौद्धिकता को "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" के माध्यम से सशक्त कर लें। इससे सामय और पैसे दोनों की बचत होगी और फिर ये एडवांस थेरेपी बहुत सस्ती भी है और सटीकता के हद तक कारगर भी।
वैसे सामान्यतः ऐसे बहुत से छात्र लखनऊ, कानपुर, कोटा आदि से आते हैं जिन्होंने अत्यधिक तनाव और दबाव के कारण कोचिंग ज्वाइन करने कुछ ही दिनों बाद कोचिंग छोड़ दिया था, ध्यान देने वाली बात ये है कि देश की लगभग सभी बड़ी और नामी कोचिंग संस्थाएं अपने यहाँ मनोवैज्ञानिक भी रखती हैं लेकिन वे समस्या का समाधान करने बजाय और गंभीर बना देते हैं। ऐसा एक मामला आया था कानपुर के छात्र का जो PMT/CPMT आदि की तैयारी कर रहा था। लगभग 6 महीने तैयारी करने के बाद अत्यधिक तनाव के कारण उसका पेट खराब रहने लगा, इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाने के कारण उसे पीलिया ने भी जकड लिया नतीजतन उसे कानपुर छोड़ना पड़ गया। पूरे दो साल तक उसका इलाज चला फिर भी उसका पेट ठीक नहीं हो रहा था। जब उसने मुझसे संपर्क किया तो उसके मनोअवस्था का ग्राफोलोगजिकल जाँच के बाद पता चला कि वो गंभीर डिप्रेशन में है। फिर उसी के आधार पर "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" उसका "मानसिक सशक्तिकरण" कर दिया गया, नतीजा ये हुआ कि न सिर्फ उसका पेट बिल्कुल ठीक हो गया बल्कि उसका उसी साल CPMT से MBBS में सिलेक्शन भी हो गया।
कोटा से भी बहुत से केसेस आते हैं जिनको डिप्रेशन, ओबसेशन आदि की शिकायत होती है जिससे उनका मन पढने में बिल्कुल नहीं लगता "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" के माध्यम से पूरी मानसिक शक्ति प्राप्त कर लेते हैं साथ ही चयन भी सुनिश्चित कर लेते हैं।
No comments:
Post a Comment