Thursday, 18 April 2013

हमारे गोरखपुर शहर के उचक्कों और पाकिस्तानी आतंकवादियों में अब खासी समानता आ गयी है पहले जहाँ चोरी छिपे बहुत कुछ होता था अब तो सरे आम कुक्कुर की पूंछ में बम बांध कर तमाशा देख कर ताली भी बजा रहे हैं, इसके साथ - साथ सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण समानता ये है कि दोनों को तरकुल (ताड़) के पेड़ पर चढ़कर बड़े शान से थूकने के लिए बहुत मजबूत सीढ़ी उपलब्ध हो गयी है। हमारी गोरखपुर की जनता ही है उचक्कों और आतंकवादीयों में फर्क नहीं करती जैसे आदर्शवादी स्वरुप में हमारा संविधान नागरिकों में फर्क नहीं करता भले ही छिछोर और टीका - टोपारी छाप सेकुलर नेता ऐसा करने से बाज नहीं आते। यही बाजगिरी का आलम है कि बड़े आराम से वो जहाँ चाहते हैं थूक के चले जा रहे हैं। तरकुल पर चढ़ के थूकने बाद एक उचक्का छाप आतंकवादी नीचे उतरा तो बड़े शान से काटजू साहब का गुडगान कर रहा था तो मैंने पूछा "...काटजू साहब ने कहा था क्या ऊपर चढ़ कर उत्पात करने के लिए ..." वो बोला "...काहे वो बोलेंगे .." मैंने पूछा "...फिर ..." वो बोला "...ये सब थूकने का काम पूछ कर थोड़े ही किया जाता है ...ये सब काम करने के बाद हम लोग उनको सूचना दे देते हैं ....बाकी सारा काम वो देख लेते हैं ..." मैंने पूछा "...तुमको डर नहीं लगता ..." वो बोला "...पूरी सरकार के साथ हम भी खड़े हैं ..." मैंने जिज्ञासावश अपना पक्ष रखा "...तुम खड़े हो सकते हो सरकार के साथ पर  सरकार थोड़े न खडी है तुम लोगों के साथ ..." वो बोला "...क्यों बिना खड़े हुए ही माफ़ी नामा का दौर चल रहा है ...!" मैंने आश्चर्य से कहा "...हाँ लगता तो ऐसा ही है ..." वो बोला "...देखियेगा उन साहब के कन्धों पर बैठ के हम शहर भर हम घूम-घूम के थूकेंगे ..." मैंने कहा "...लेकिन नियम कानून भी कोई चीज़ होती है ..." वो बोला "...कोई कुछ नहीं करेगा... आपको पता नहीं है क्या कि वो जनाब सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश रह चुके हैं ..." मैंने आशचर्य से कहा "...ये तो तुम्हारे लिए समस्या होनी चाहिए ..." वो उचक्का छाप आतंकवादी बड़े आत्मविश्वास से बोला "...यही तो हमारी सिक्योरिटी है ..." मेरा मुह दुखद आश्चर्य से खुला रह गया फिर वो बोला "...देखिएगा अगर हम फसेंगे तो पूरी की पूरी सरकार फंसेगी ..." मैंने आश्चर्य से फिर  पूछा "...क्या तुमको थोडा भी डर नहीं लगता ..." वो बोला "...किस बात का डर ...पहले भी हम सेफ थे ही अब तो सपने में भी हम सेफ हो चुके हैं ..." मैंने फिर दुखद आश्चर्य से पूछा "...इसीलिए बीजेपी पार्टी के सामने भी थूकने पहुँच गए ..." वो बोला "...पहुंचे नहीं शान से गए और शान से आए ..." मैंने कहा "...अब तुमको कोई नहीं बचा सकता ... " वो बोला "...माफ़ीनामा तो पहले से कानूनी जामा वालों ने एडवांस में तैयार करा रखा है  ..." मैंने कहा "...ये लोग कौन ..." वो बोला "...वही जो लोग पहले आप लोगों को  न्याय देते थे अब हम लोगों को  देंगे ..." मैंने चेतावनी देते हुए गुस्से में कहा "...ये सब नौटंकी बहुत दिनों तक नहीं चलेगी ..." वो बड़े ठंडे दिमाग से बोला "...नरेन्द्र मोदी दिल्ली प्रधानमंत्री बन कर आएँगे तब न ..." मैंने पूछा "...क्यों तुमको कोई शक है क्या ..." वो फिर ठन्डे दिमाग से बोला "...पहले उनको काटजू साहब से निबटना पड़ेगा हम तो फिर भी बहुत बड़ी हस्ती है ...पूरे इंडिया का ठेका लिए घूम - घूम के थूक रहे हैं ..." ये कह वो उचक्का छाप आतंकवादी जोर-जोर से अट्टहास करने लगा ....मैंने फिर कुछ पूछने के कोशिश नहीं की ...  

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