Sunday, 14 April 2013

विद्योत्मा ने जब एक उंगली दिखाई तो "उस" मूर्ख को लगा के ये मेरी एक आँख फोड़ना चाहती है तो उसने दोनों आँखे फोड़ने के उद्देश्य से दो उंगलियां उठा दी, पराजित पंडितों ने व्याख्या की कि यदि ईश्वर एक है तो ईश्वर एवं जीव दो हैं ...ऐसा ही हाल है आज की कांग्रेस का, नरेंद्र मोदी यदि विकास की एक उंगली दिखाते हैं तो  राहुल गाँधी विकास और भ्रष्टाचार की दो उंगलियाँ दिखाते हैं ...पूरी की पूरी कांग्रेस पराजित पंडितों की भांति राहुल गाँधी के भाषण की व्याख्या करती फिर रही है। नरेंद्र भाई मोदी ने युवाशक्ति के उपयोग की बात की तो राहुल गाँधी को लगा इन युवाशक्ति का उपयोग करके मोदी जी हमको मरवाना चाहते हैं जैसे विद्योत्मा ने पांच उंगली दिखाई थी तो "मूर्ख" को लगा था कि ये उसे झापड़ मरना चाहती है तो उसने विद्योत्मा को ये सोच के मुक्का दिखा दिया कि तुम मुझे झापड़ मरोगी तो मै तुमको मुक्का मरूँगा ठीक इसी तर्ज पर राहुल गाँधी ने नरेंद्र भाई मोदी को "मधुमक्खी का छत्ता" दिखा ये सोच के कि देखो यदि तुम मुझे युवाशक्ति से मरवाओगे तो तुम्हारे उपर मधुमक्खी छोड़ दिया जाएगा। सारी कांग्रेस पराजित पंडितों की भांति राहुल गाँधी की वक्तव्य की व्याख्या करती फिर रही है। वैसे भी पराजित पंडितों ने उस "मूर्ख" से कहा भी था तुम चुप रहना ठीक वैसे ही राहुल गाँधी भी चुप थे , शास्त्रार्थ से पराजित पंडितों ने विद्योत्मा से कहा था कि ये प्रकांड पंडित है जैसा कि राहुल गाँधी के बारे में कांग्रेस के पराजित पंडित लगातार कहते फिर रहे हैं लेकिन ये "मौन व्रत धारण" किये हुए हैं राहुल गाँधी भी वैसा ही कर रहे थे लेकिन सी आईआई के मंच पर राहुल गाँधी को अपना मौन व्रत तोडना पड़ गया सारा का सारा खेल बिगड़ गया। अभी पता चला है कांग्रेस के पराजित पंडितों ने राहुल गाँधी को फिर से मौन व्रत धारण करने की सलाह दे दी है। वो मूर्ख जिस डाल पर बैठा था उसी को काट रहा था इसी से पराजित पंडितों को लगा गया था कि दुनियां में इससे बड़ा "मूर्ख" कोई और नहीं हो सकता लेकिन वो शास्त्रार्थ करने को तैयार ही नहीं हो रहा था लेकिन जब शादी का प्रलोभन दिया गया तब वो तैयार हुआ था। लेकिन सीआई आई के मंच पर राहुल गाँधी ने जो कहा वो किसके समझ में क्या आया ये बहुत गंभीर शोध का विषय है लेकिन विद्योत्मा की भूमिका में नरेन्द्र भाई मोदी के उपर राहुल गाँधी के पराजित पंडितों की व्याख्या से उतना ही असर होता दिख रहा है जितना विद्योत्मा ने उस "मूर्ख" से विवाह के पश्चात् "उष्ट्र" के बजाय "उट्र" "उट्र"के उच्चरण के बाद हुआ था लेकिन समस्या यहाँ ये है कि उस समय डेमोक्रेसी नहीं थी आज डेमोक्रेसी है अतः चिंता की कोई बात नहीं। सीआईआई के मंच से राहुल गाँधी ने अपनी बेहद पर्सनल बात शादी की बात क्यों छेड़ी ....बहुत बड़ा सवाल है ...आगे उन्होंने क्या कहा इसका कोई मतलब नहीं है ...उन्होंने शादी शब्द का उच्चरण ही क्यों किया ...इस बात की व्यख्या कांग्रेस के पराजित पंडित नहीं कर रहे हैं ...इसी के साथ एक बहुत बड़ा सवाल ये भी खड़ा होता है कि वो "मूर्ख" तो विद्योत्मा से शादी करने के लालच में शास्त्रार्थ करने को तो तैयार हो गया लेकिन राहुल गाँधी ने किस लालच में सेआईआई के मंच पर आ कर अपना मौन व्रत तोड़ा था...???

No comments:

Post a Comment