Monday, 29 April 2013

“ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी” तथा मेडिकल प्रोफेशनल्स
ऐसा नहीं है कि चिकित्सकों (डॉक्टरों) को मानसिक या शारीरिक समस्याएँ नहीं होती। अक्सर देखा गया है कि बहुत अधिक समझौतावादी दृष्टिकोण अपनाने के कारण तथा अन्य कारणों जैसे अत्यधिक कार्यभार, अत्यधिक मानसिक दबाव, तनाव आदि से उनको भी मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसका परिणाम होता मानसिक क्षमता में कमी जिससे वो काफी चिडचिडे, प्रतिक्रियावादी और अन्य मानसिक विकारों के चपेट में आ जाते हैं। इससे न सिर्फ उनका प्रोफेशन प्रभावित होता है बल्कि संबंधों के साथ-साथ घर का माहौल भी खराब होने लगता है। पारंपरिक मनोचिकित्सा एवं मनोविज्ञान के पास इसका कोई समाधान नहीं है इस वास्तविकता से वो भली भांति परिचित होने के कारण वे समस्याओं को झेलने के लिए बाध्य होते हैं। लेकिन अब कारगर समाधान के रूप में “ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी” है जिससे न वो अपनी परेशानियों से पूरी तरह मुक्त हो सकते हैं बल्कि अपने मानसिक क्षमता में आशातीत वृद्धि भी कर सकते हैं।
हमारे गोरखपुर शहर के ही बहुत से डाक्टर इसका लाभ उठा चुके हैं। मै यहाँ पर बड़े गंभीर केस का उल्लेख करना चाहूँगा, लगभग 1.5 साल पहले एक एनेस्थेसिया के डॉक्टर ने मुझसे संपर्क किया। दरअसल पिछले 18 सालों से मानसिक विकृति से पीड़ित थे और उनको मनोचिकित्सकीय स्तर पर "डिप्रेशन" के तौर पर डायग्नोज़ किया गया था और उसीका 18 साल से इलाज चल रहा था बेचारे नींद की गोली खा के सोते थे सबेरे उठते ही काफी थका हुआ महसूस करते थे। इन सब कारणों से उनके संबंधों पर भी प्रभाव पड़ने लगा था। जब “ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी” के माध्यम से उनकी मानसिक अवस्था की जाँच की गयी तो पता चला कि उनको डिप्रेशन है ही नहीं उन्हें negative attitude की समस्या थी। इसी के अधार पर उनके मस्तिष्क को "सशक्त" कर दिया गया, मात्र 1.5 महीने में ही रोग और दवाओं से उनको पूरी तरह मुक्ति मिल गयी। ऐसे बहुत से डॉक्टर हैं जिन्होंने "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" की मदद से स्वयं, पत्नी एवं बच्चों सहित पूरे परिवार को मानसिक रूप से सशक्त कर चुके हैं। 

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