Monday, 4 March 2013

मेरे मुहल्ले के यादव जी अभी भी ठीक से अपने आप को संभालने में काफी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। बड़े-बड़े दुर्दिनो में भी वो हिम्मत के साथ बसपा और भाजपा से दो-दो हाथ करते फिरते थे। पिछले साल नेताजी की पार्टी जब बहुमत से जीती थी तो उन्होंने बड़े उत्साह से पूरे मोहल्ले का मुह मीठा कराया था। बेचारे आज सदमे से जूझ रहे हैं। उनके घर जा कर उनका हाल मैंने पूछा तो कहने लगे "...अब हल्ला बोल के क्या होगा .." मैंने कहा "...आपको आराम की जरूरत है ..." वो कहने लगे "...अब तो सारा मुहल्ला बोल रहा है नेताजी ने तो मुँह मुहल्ला खुलवा दिया ..." मैंने सहानुभूति दर्शाते हुए कहा "...राजनीति करने के लिए उम्र पड़ी है आप ठीक तो हो जाईये ..." कहने लगे "...भरी  राज्यसभा में उन्होंने राजनाथ जी से बात किया बताईये ..." मैंने समझाते हुए कहा "...देखिये राजनीति में कोई दुश्मन या कोई दोस्त नहीं होता ये सब होता रहता है ..." वो सुबकते हुए बोले "...यही सब करना था तो फिर ..." मैंने कहा "...देखिये आप नाहक ही लोड ले रहे हैं ...राजनीति संभावनाओं का भी खेल है ..." वो थोड़े गुस्से में बोले "...लेकिन वो तो हमारी भावनाओं से खेल रहे हैं ..." मैंने कहा "...आप उसमे 'सं' जोड़ना मत भूलिए न ..." वो कराहते हुए बोले "...इसी जोड़ - घटाने में तो जान निकली जा रही है ..." मैंने पूछा "...क्या वाकई आपको इतना दुःख हुआ कि होस्पिटलाईज्ड होना पड़ा आपको ..." उन्होंने जवाब दिया "... यकीन मानिये ये दिन देखने के लिए बसपा और भाजपा लोहा नहीं लिए थे हम लोग ..." मैंने कहा "... उस घटना के बाद शायद उनको भी आपकी याद आई और कह दिया ये संभव नहीं है आप बेवजह तूल न दें ..." वो थोडा तैश में आ गए बोले "...तूल कैसे न दिया जाए नरेन्द्र मोदी को देख-देख के मोहल्ले वाले फूल रहे हैं ...." मैंने हौसला बढ़ाते हुए कहा "...आप तो हैं ही लोहा लेने के लिए ..." उन्होंने कहा "...अरे तबियत तो नेताजी लेते गए ..." मैंने ढाढस बढ़ाते हुए कहा "...यही तो समय है अपनी वीरता दिखने का ...." वो कहने लगे "...ढाढस बढाईये या उत्साहित कीजिये हेल्थ तो नेताजी ले बीते ..." मैंने कहा "...वैसे आपके नेताजी मजे हुए पोलिटिशियन हैं कुछ सोच-समझ कर ही ऐसा किया होगा ...." वो बोले "...अगर ऐसा ही होता तो फिर उनको हमारी जरूरत ही क्या थी उनको ..." मैंने कहा "...वो तो है ..." वो कराहते हुए बोले "...बहुत - बहुत हल्ला बोले विश्वास कीजिये कभी भी झंडा नीचे होने नहीं दिए हम लोग ..." मैंने कहा "...बेवजह आप पुराने दिनों को याद करके अपना दर्द बढ़ा रहे हैं ...." वो सफाई देते हुए बोले "...क्या करें अब मन ही है मानता ही नहीं ..." तभी उनका बेटा आ गया मैंने उससे पूछा "...पार्टी कार्यालय से आ रहे हैं क्या ..?" वो शायद थोडा गस्से में था या मूड ठीक नहीं था उसका, उसने बात नही की मैंने यादव जी से पूछा तो कहने लगे "...इसी की चिंता खाए जा रही है बड़े अरमान हैं इसको लेकर ले-दे कर पॉलिटिक्स ही करियर के लिए बचा है ..." मैंने कहा "...कोई और जगह भी ट्राई करना चाहिए ..." उन्होंने कहा "...यही तो समस्या है कहीं और ये खपेगा कैसे .." मैंने कहा "..हाँ वो तो है समस्या वाकई गंभीर है.." उन्होंने कहा "...नरेन्द्र मोदी के प्रभाव में नेता जी भी आगए यकीन ही नहीं होता ..." कहते हुए उन्होंने करवट बदल लिया ...तो मैंने भी शीघ्रातिशीघ्र  स्वास्थ्य लाभ की कामना के साथ विदा ले लिया।

No comments:

Post a Comment