Saturday, 23 March 2013

हमारे गोरखपुर शहर ही नहीं पूरे भारत में ये परंपरा है कि किसी के भी घर में किसी नवजात का जन्म हुआ नहीं कि कुछ खास किस्म के लोग ढोल - मजीरा ले के सत्याग्रह करने पहुँच जाते हैं हालांकि इन सत्याग्रहियों से लोगों को खासी परेशानी होती है लेकिन हम भारतीय लोग बड़े सहृदयी होते हैं बुरा नहीं मानते कुछ उपहार स्वरूप दे के ससम्मान उनको विदा करते हैं तब कहीं जा कर सत्याग्रह से मुक्ति मिलती है। लेकिन समस्या तब खडी हो जाती है जब दिए गए उपहार से वो संतुष्ट ही नहीं होते मारे गुस्से में कुछ सत्याग्रही तो अपना बहुत कुछ दर्शनीय बनाने पर उतारू हो जाते हैं। ऐसे ही एक सत्याग्रही से मैंने उसकी गंदी हरकतों के बारे में पूछा सफाई देते हुए तो कहने लगा "...हम केजरीवाल नहीं हैं ..." मैंने उस सत्याग्रही से पूछा "...इसमें तुमको सफाई देने की क्या जरूरत है ..." उसने उत्तर देते हुए कहा "...भ्रष्टाचार मुद्दा है तो सफाई जरूरी है ..." मैंने कहा "...दिल्ली तो बहुत दूर है ..." सत्याग्रही ने बड़े आत्मविश्वास से कहा "...केजरीवाल के लिए दूर है ..." मुझे समझ में नहीं आया तो पूछा "...मुझे समझ में नहीं आया ..." सत्याग्रही मुझे समझाते हुए कहा "...हम भ्रष्टाचार से लड़ने के बजाय हिस्सेदारी के लिए लड़ रहे हैं ..." मुझे आश्चर्य हुआ "...तो घर - घर ढोल-मजीरा ले के घूमने क्या जरूरत है ..." उसने कहा "...तभी तो हिस्सेदारी सुनिश्चित होगी ..." मैंने कहा "...तो फिर और मजबूत करने का प्रयास क्यों नहीं करते 'आप' ..." उस सत्याग्रही ने कहा "...हमने पहले ही कहा कि केजरीवाल नहीं हैं हम ..." मैंने फिर सवाल पूछा "...नहीं हो तो इस तरह सत्याग्रह क्यों करते हो ..." सत्याग्रही जवाब देते हुए कहा "...क्यों ! हमारा कोई हक़ नहीं बनता है क्या ...?" मैंने उसे सुझाव देते हुए कहा "...तो तुमको हक़ की लड़ानी चाहिए ..." सत्याग्रही ने कहा "...सत्याग्रह भी उसीका हिस्सा है ..." मैंने कहा "...इससे न सिर्फ लोगों को परेशानी होती है बल्कि क्रेडिबिलिटी का भी जबरदस्त खतरा है ..." सत्याग्रही बोला "...क्या फर्क पड़ता है ..." मैंने आश्चर्य से पूछा "...क्यों फर्क नहीं पड़ता ...?"  सत्याग्रही ने जवाब दिया "...जब अन्ना हजारे के न होने से क्रेडिबिलिटी पर फर्क नहीं पड़ा तो चिंता किस बात की ...!" मैंने कहा "...लेकिन नरेन्द्र मोदी तो क्रेडिबिलिटी की बहुत चिंता करते हैं ..." उसने पूछा "...केवल सद्भावना सभाओं से ही कैसे संभव है ...?" मैंने कहा "... मैदान तो उन्होंने मार ही लिया अब नेशनल मैदान मारने की तैयारी कर रहे हैं संभव है तभी तो ..." सत्याग्रही ने कहा "...यही तो केजरीवाल भी करेंगे ..." मैंने पूछा "...लेकिन वो आपकी तरह सत्याग्रह करके ये सब कैसे कर लेंगे ...?" सत्याग्रही बोला "...जैसे हम लोगों की चिंता घर-घर जा कर करते हैं ..." मैंने पूछा "...समग्र चिंतन या अवधारणा तो नहीं दिखती ..." सत्याग्रही बोला "...इसीलिए तो अन्ना हजारे की तरह हम भी घोषणा कर रहे हैं कि हम केजरीवाल नहीं हैं ..." मैंने कहा "...लेकिन कुछ तो होना चाहिए ..." सत्याग्रही बोला "...अब कश्मीर के मुद्दे पर जूता खाने के बाद भी कुछ समग्र हो जाए तो ..." मैंने जिज्ञासावश पूछा "...तो का मतलब ...?" सत्याग्रही ने बड़े आराम से उत्तर देते हुए कहा "...तो का मतलब राष्ट्रीय चिंता ..." मुझे उसके इस उत्तर पर बहुत आश्चर्य हुआ, मैंने जिज्ञासावश पूछा "...तब फिर सत्याग्रह ...?" सत्याग्रही चलने मुद्रा बनाने लगा था और उसने जाते-जाते कहा "...आर.टी.आई. और जनलोकपाल का अहसान मान के कुछ तो दे ही दीजियेगा उनको जैसे कांग्रेस को अब तक देते आए हैं...अच्छा नमस्कार ...!" वो ढोल बजाते के निकल गया।  

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