चलते चलते लंगड़ी मारना किसी भी के लिए भी उतना अजीब नहीं होता जितना बैठे बिठाए कुर्सी से ढकेल देने की कोशिश करना। मेरे गोरखपुर शहर की मस्त फागुनी बयार में उड़ती धूल किसी के लिए भी ऐसा अजीब सा अहसास करा देने के लिए पर्याप्त है, टेम्पू वाले तो मजा ले ही रहे हैं नगर निगम वाले भी दयावान बन के थोड़ी बहुत राहत दिखाने के बहाने मजा लेने से नहीं चूक रहे।अभी थोड़े दिनों पहले अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया तो शहर के लोगों को बहुत आश्चर्य हुआ सो थोड़ी सी ही इन्क्वायरी करने पर ही पता चल गया कि किसी की पहली साल गिरह है। नगर निगम के लोगों ने कुछ और होली की सौगात के तौर पर कुछ देने की सोची तो पोकलेन मशीन ले कर निकल पड़े। मैंने मशीन के चालक से पूछा तो कहने लगा "...नाली का कचरा साफ़ करना जरूरी होता है ..." मैंने पूछा "... पानी के साथ बहने में क्या दिक्कत है...?" उसने जवाब दिया "...यहाँ भी सेकुलर डेमोक्रेसी का ही बोल बाला है ..." मुझे उसकी बात पे गुस्सा आया तो डांटते हुए कहा " ...मजाक किसी और से करना ..." उसने कहा "...बेनी बाबू आएँगे तब ना ..." मैंने पूछा "...क्यों कोई दिक्कत है क्या उनको ..." वो कहने लगा "...कोई नकली छाप असली दांव खेल रहा है ..." मैंने आश्चर्य से पूछा "...क्या मतलब ..." वो बोला "...चले थे लगड़ी मारने ...." मैंने बात काटते हुए बीच में ही पूछा "...साफ साफ क्यों नहीं कहते ..." वो बोला "...वो तो तब होगा जब मशीन काम करना शुरू कर देगी ..." मैंने कहा "...तुम्हारा मशीन से क्या लेना - देना ..." उसने उल्टे मुझसे ही पूछा "....क्यों जैसे बेनी बाबू का इस पहली साल गिरह का लेना देना हो सकता है तो मेरा क्यों नहीं हो सकता ...?" मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ कहा "...बहुत ज्यादा दिमाग रखते हो ..." उसने जवाब दिया "...डीडीयू यूनिवर्सिटी में गोल्ड मैडल से चूके थे ..." मैंने कहा "...मतलब आईएएस (एन.क्यू.).." अब आश्चर्यचकित होने बारी उसकी थी सो उसने पूछा "...एन.क्यू. मतलब ...?" मैंने कहा "...ठंडा हो के नॉट क्वालिफाइड ...!" उसने याद करते हुए कहा "...क्या ज़माना था ...मेरी जय-जयकार होती थी ..." मैंने अफ़सोस जताते हुए कहा "...वही तो स्थिति बड़ी खराब है ...!" उसने कहा "...राजनीति में भी ..." मैंने बीच में ही बात काटते हुए कहा "..लोकल या नेशनल ..." उसने कहा "...नेशनल में नुकसान ज्यादा है ..." मैंने पूछा " ...वो कैसे ...?" उसने उत्तर देते हुए कहा "...आप ही देखिये प्रियंका गाँधी ने बेनी बाबू को डिप्लोएड कर दिया ..." मैंने पूछा "...ये तो उनका बयान है ..." उसने कहा "...आप अगर पोकलेन चला के देखिये सब समझ में आ जाएगा ..." मैंने उसकी तारीफ करते हुए कहा "...बड़ा गर्व है तुमको अपने अनुभव पर ..." उसने कहा "...योग्यता में हम किसी से कम थोड़े ही हैं ..." मैंने कहा "...तुमको कैसे पता ..." उसने बड़े आत्मविश्वास से कहा "...कैसे नहीं पता ...इस पोकलेन मशीन पर बैठ के देखिये दुनियां के वास्तविक नज़ारे दिखेंगे आपको ..." मैंने कहा "...योग्यता में तुम किसी से कम कैसे नहीं हो ..." उसने कहा "...क्योंकि राहुल गाँधी के उपाध्यक्ष होने बावजूद प्रियंका गाँधी अमेठी आ गईं हैं ..." मैंने सुझाव देते हुए कहा "...तुमको कोशिश करनी चाहिए ..." तभी उसका सुपर वाईजर उसे डाटते हुए काम करने का आदेश देने लगा तो मुझे भी धीरे से खिसक लेना बेहतर लगा सो मैंने वैसा ही किया ....
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