कोई हसीना जब बीच चौराहे पर मिर्ची चबाने लगे तो समझ लीजिये अनिष्ट होने वाला है। कल सबेरे-सबेरे जब हिना रब्बानी का मिर्ची चबाना अख़बारों दिखा तभी लग गया कि कुछ न कुछ जरूर गड़बड़ है शाम होते-होते पाकिस्तानी असेम्बली से इज्जतदार लोगों ने सूरज पर थूकना शुरू कर दिया। खैर राजा परवेज़ अशरफ तो 'कुछ तूफानी करते हैं' स्टाइल में दावत ए वलीमा हमारे 'भारतीय राजनीति के सलमान खान' से ठूंस ले गए थे सो नमक हरामी तो उनको करनी ही थी लेकिन बाकी लोग जिस तरह के ख्वाब में जी रहे थे उससे तो यही लगता है भारत का कांग्रेसी हुक्मरान उनकी जेब में पलता है। सबेरे की मिर्ची पाकिस्तानी हुक्मरानों को कुछ ज्यादा ही लग गयी थी लेकिन शाम होते होते उन लोगों को थूकना जरूरी हो गया था। एक महाशय टीवी पर बता रहे थे कि भारत इंटरनेशनल सिनारियो में कहीं है ही नहीं, अफगानिस्तान से अंकल सैम की फौज वापस जा रही है लिहाजा भारत को कुछ करना चाहिए अपनी उपस्थिति दर्शानी चाहिए, पता नहीं यहाँ इष्टमित्र कौन है वेस्टमित्र कौन है पता ही नहीं चलता। आए थे मछली मारने मछुआरा मार के चले गए लगे हाथ तूफानी करने के लिए सलमान जी बैसाखी खोज रहे थे पता नहीं खुद के लिए या किसी और के लिए। हमारे कांग्रेसी हुक्मरानों की करतूत को कैसे लिया जाए समझ में नहीं आता जब संसद में उन पांच शहीदों को श्रद्धांजलि दी जा रही थी तो कैबिनेट का कोई वरिष्ठ सदस्य सदन में मौजूद ही नहीं था। असल नीति का पता नहीं कहाँ से इंस्पायर की जा रही है यहाँ पर फिट होना बहुत दूर की बात है उल्टे हमारा और हमारे बहादुर और वीरों सिर कलम करने पर उतारू है। ऐसे विषय पर क्या कहा जाए घोटाले दर घोटाले, मंहगाई अलग परेशान किये हुए है इधर पिद्दी भर का छिछोर अलग से थूकता फिर रहा है। अभी गुजरात के चुनावों में जिस तरह नरेंद्र मोदी ने महात्मा गाँधी के एक कोटेशन को मुद्दा बनाया था उसकी बहुत महती जरूरत है कि '...स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद कांग्रेस को ख़त्म कर देना चाहिए ...' वास्तव महात्मा गाँधी बहुत दूरदर्शी थे और जवाहर लाल नेहरू की करतूतों से भली भांति परिचित थे। आज की कांग्रेस उस समय की कांग्रेस से भी कहीं गयी गुज़री दिखती है। अभी किसी कांग्रेसी ने एक मित्र के टाइमलाइन पर पोस्ट मारा था कि भारत की तुलना अमेरिका से नहीं करनी चाहिए पता नही उनको ये पता है भी या नहीं कि दक्षिण कोरिया भारत से साल भर बाद 1948 में स्वतंत्र हुआ और मात्र 16 बाद ही खुद को विकसित राष्ट्र घोषित कर दिया। क्या हमारे पास ऐसा कुछ भी नहीं है ? वास्तव में हमारे पास उससे कहीं बहुत ज्यादा है और हम मात्र 10 साल में ही विकसित राष्ट्र हो सकते है नरेंद्र मोदी ने ये साबित कर दिया है। लेकिन इस देश का दुर्भाग्य है कि महात्मा गाँधी की अनिच्छा के बावजूद कांग्रेस बची रह गयी। विकास का सारा पैसा कांग्रेस का पेट भरने में चला गया आज भी जा रहा है और जिस रस्ते से जा रहा है उसी का परिणाम है कि पिद्दी भर का पकिस्तान हमारे साथ इस तरह की घिनौनी हरकत करता है और और क्या कहा जाए ....मन पीड़ा, क्षोभ और क्षोभ से भर उठता है ...
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