शहर में कोई शोर नहीं हुआ कोई मुनादी नहीं हुई तो वित्तमंत्री को खुद ही मोर्चा संभालना पड़ा। बड़े अरमानो से उन्होंने जनभावना का ख्याल रखा था अपने बजट में लेकिन इससे वो कुछ और भी साबित करना चाहते थे मतलब साफ़ था उनका, वो चाहते थे कि अगर कोई जूता पहना है तो लोग अपनी आँखें मूँद लें और कहें देखो वो जूता नहीं पहनता। इसी नंगईगिरी पर मैंने एक कट्टर कांग्रेसी को पकड़ा तो कहने लगे "...देखिये भारत का विकास हो रहा है ..." मैंने कहा "...पॉजिटिव, नेगेटिव या ...?" उन्होंने कहा "...नरेन्द्र मोदी की तरह मै तीसरा ओपीनियन नहीं रखता ..." मैंने पूछा "...माफीनामा ले के घूमने से क्या होगा ..." वो बोले "...देखिये हम लोगों को बहुत देखना पड़ता है ..." मैंने फिर पूछा "...आपके राजीव जी 95% लीकेज की बात स्वीकारते थे , आपके राहुल जी भी यही करते हैं ..." बात कटते हुए वो बीच में बोले "...चिदंबरम जी ने 70 बनाम 30 का आंकड़ा प्रस्तुत किया है .." मैंने भी बीच में टोकते हुए कहा "...तब हो रहा भारत निर्माण या निर्वाण ...?" वो बोले "...आप सीएजी पर मत जाईये न ..." मैंने पूछा "...वो क्यों..." वो कहने लगे "...सीएजी वालों को सीमित मूल्यांकन करने की आदत है वो लोग सम्पूर्णता से नहीं देख पाते ..." मैंने कहा "...तो सामन्ती युग के डकैतगिरी को मान्यता मिलेगी ..." वो बोले "..आप कुछ भी कह लीजिये नीतियां नीतियां होती हैं ..." मैंने कटाक्ष करते हुए कहा "...भले उल्टी गंगा बहने लगे ..." उन्होंने पूछा "...हम लोग चैतन्य नहीं हैं क्या ..." मैंने कहा "...कल के राजीव जी और आज के राहुल जी 95% पर कब्जा कर 5% जनता में फेकते थे और हैं बाद में कहते हैं कि भ्रष्टाचार है ..." उन्होंने कहा "...देखिये उनका कहना वाजिब है ..." मैंने कहा "...फिर चिदंबरम साहब 70% का अहसान किस लिए कर रहे हैं ..." वो बोले "...वित्तमंत्री काफी पढेलिखे हैं ..." मैंने कहा "...जब उन दोनों अधपढ़ों की बात वाजिब है तो ..." वो तपाक से पलट कर बोले "...तो का क्या मतलब ..." मैंने कहा " ...तो का मतलब यदि आपको पता है इसका सीधा मतलब है ये भी आपको पता है कहाँ जा रहा है ..." वो गुस्से में बोले "...आपका मतलब वो 95% उलटे हमारे पास आ रहा है ...हम भ्रष्ट हैं ...?" मैंने कहा "...ये तो आपके राजीव जी, राहुल जी और अब चिदंबरम जी ही कह रहे हैं ..." वो बोले "...सीएजी वाले पता नहीं किस मिट्टी के बने हैं ...? मैंने कहा "...सोच लीजिये 60,000 करोड़ का बोल रहे हैं वो लोग ..." वो बोले "...कांग्रेस अपनी नीतियों से पलटने वाली नहीं है ..." मैंने तर्क करते हुए कहा "...ये तो सामन्ती के युग डाकू मलखान सिंह, मंगल सिंह और ना जाने क्या-क्या वालों से भी गयी गुजरी नीति हो गयी ..." उन्होंने गुस्से में कहा "...आपको हमारा सम्मान करना चाहिए ..." मैंने कहा "...ये आपका अपमान कैसे है लकड़ी को लकड़ी नहीं तो लोहा कहा जाए ..." वो बोले "..हम लोगों ने किसानो के लिए बहुत कुछ किया ..." मैंने कहा "...करने से पहले छीनने की व्यवस्था क्यों कर ली ...? उन्होंने कहा "...ये सिस्टम का दोष है ..." मैंने कहा "...वो डाकू लोग भी अमीरों का छीन के जो गरीबों को देते थे ...उन गरीबों से तो नहीं छीनते थे ..?" वो निरीहता से बोले "...देखिये भ्रष्टाचार है हम क्या करें ...?" मैंने कहा "...यदि आपको पता कि भ्रष्टाचार है तो फिर समस्या क्या है ख़त्म कर दीजिये उसको ..." वो बोले "...अरे कैसे ख़त्म कर दें ..." मैंने कहा "...वैसे ही जैसे सामने दुश्मन है तो गोली मार दीजिये ...हो गया ..." वो बोले "...ये नामुमकिन है ..." मैंने पूछा " ...क्यों ...?" वो बोले "...रामसिंह की तरह हम लोग कायर नहीं है जो जेलआत्महत्या कर लेंगे ..." मैंने खिन्नता से कहा "...आपको जीवन इतना प्यारा है ..." वो बोले "...इससे कीमती कोई नहीं ...कुछ भी कर सकते हैं हम लोग ...बस नमस्कार " मुझे भी आश्चर्य से नमस्कार करना पड़ा....
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