Sunday, 10 March 2013

पाकिस्तान से राजा परवेज अशरफ अजमेर में चादर चढाने आये तो कुछ तूफानी करने के चक्कर में  विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद उनके स्वागत में लोट गए। उन्होंने ने क्या सोच के ऐसा किया ये उनके प्रेसीडेंट मैडम की बीमारी तरह बिल्कुल रहस्य तो नहीं है लेकिन इतना तो लगता ही है कि उनको किसी न किसी बैसाखी की जरूरत जरूर है। मैंने उनके समर्थक से बात किया तो कहने लगे "...हर किसी को पुण्य कमाने का अधिकार है .." मैंने थोड़ा तीव्र कटाक्ष में कहा "...पुण्य कमाना या  पाप धोना ..." वो पूछते हुए बोले "...कैसा पाप ... " मैंने कहा "...इसके लिए कूटनीतिक घोटाले की क्या जरूरत थी ...?" वो बोले "...पोलिटिकल ट्रेंड के हिसाब से  चलना  जरूरी है ..." मैंने पूछा "... क्या ये गलत नहीं है ...?" उन्होंने जवाब देते हुए कहा "...जिस रास्ते पर महाजन चलें वो रास्ता गलत नहीं होता ..." मैंने कहा "...जो राजा साहेब ने किया है वो छिछोर छाप शैतान का या महाजन का काम है ...?" उन्होंने मुझे समझाते हुए कहा "...देखिये हमें अपनी संस्कृति बहुत प्यारी है ..." मैंने कहा "...ये तूफानी करने का ख्याल उनका अपना था ...?" उन्होंने कहा "...हम लोग बहुत सहृदयी हैं लिहाजा सबका ख्याल रखते हैं ..." मैंने कहा "...इसीलिए सलमान खान की उनको याद आ गयी ..." वो बोले "...इंस्पिरेशन कहीं से मिले बुरा नहीं होता ..." मैंने पूछा "...इससे उनका पुराना पाप कट जाएगा ...?" वो बोले "..देखिये वो पापी नहीं हैं ..." मैंने तपाक से पूछा ".. फिर क्या हैं वो ..?" उन्होंने निरीहता से जवाब दिया "...केजरीवाल से मत पूछियेगा ..." मैंने आश्चर्य से पूछा "...क्यों ..." वो बोले "...उनको ओथेन्टीसिटी का पता नहीं है .." मैंने कहा "...ये नया तरीका है पाप धोने का मेरा मतलब पुण्य कमाने का ..." वो बोले "...कांग्रेस हमेशा से ही इन्नोवेटिव रही है ..." मैंने कहा "...इसीलिए अब ये नामवाद शुरू हुआ है ...कुछ तूफानी करते हैं ...क्यों ...?" वो बोले "...अगर यही है तो हर्ज़ क्या है ..." मैंने उनसे पूछा "...किसी अपाहिज का इंटरव्यू किया है क्या ..." वो बोले "...मैंने कहा न हम लोग बड़े सहृदयी हैं ..." मैंने पूछा "...तब तो उनकी भी याद आई होगी उनको ..." उन्होंने कहा "...इसीलिए तो ये सब करना जरूरी था ..." मैंने कहा "...कुछ तो जन भावना का भी ख्याल ..." वो बीच में ही बात कटते हुए बोले "...देखिये उनकी यात्रा सरकारी नहीं थी लिहाजा जन भावना का सवाल ही कहा उठता है ..." मेरा दिमाग चकराया फिर पूछा "...जब सरकारी यात्रा नहीं थी तो फिर कुछ तूफानी करने की जरूरत क्या थी ...?" वो सफाई देते हुए शायराना अंदाज़ में बोले "...देखिये कुछ तो मजबूरियां रही होंगी वरना यूँ ही कोई बेवफा नहीं होता ...!" मैंने कहा "...क्यों आपके पाकिस्तानी आकाओं का दबाव था ...?" वो बोले "...देखिये ऐसी कोई बात नहीं है ..." मैंने पूछा "...क्या बात है फिर ..." वो मनमोहन सिंह के अंदाज़ में बोले "...सवालों का आबरू रखना जरूरी था ..." मैंने कहा "...राजा साहेब आपकी आबरू थे क्या ...?" वो चुप हो गए ...बहुत देर तक बिल्कुल चुप रहे तो मैंने उनसे विदा ले लिया। 

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