अभी कुछ दिनों पहले खबर छपी कि किसी ने कपिल सिब्बल को फूल भेंटने के बजाय पूरा का पूरा गमला ही प्रस्तुत कर दिया। पता नहीं उनको बीते दिनों की बातें याद आई कि नहीं जिससे उनके प्रधानमंत्री एवं वित्तमंत्री दो-चार हो चुके हैं। खैर ये मामला तो ऐसा नहीं है कि दिग्विजय सिंह को इसका श्रेय आरएसएस को देना पड़े सो मुझे लगा कि किसी कांग्रेसी का ही हाथ होना चाहिए मैंने एक कांग्रेसी से पूछा तो कहने लगे "...मै दिग्विजय सिंह नहीं हूँ .." मैंने पूछा "... फिर ..." वो उलटे मुझसे ही पूछने लगे "...कहीं आप आरएसएस कैडर या सपोर्टर तो नहीं ...?" मैंने आश्चर्य से कहा "...उससे क्या होगा ..?" वो कहने लगे "...लाठी ही बची है चलने के लिए ..." मैंने कहा "...घबराईये मत ऐसा कुछ नहीं है ..." फिर वे कुछ हिम्मत जुटा कर बोले "...देखिये वे ठीक लोग नहीं हैं ...!" मैंने पूछा "...फिर ठीक कौन है ...?" उन्होंने कहा "...इंदिरा जी ने कहा था भ्रष्टाचार ग्लोबल समस्या है ...!" मैंने कहा "...सही बात है ..." इस पर वो कहने लगे "...इसी के हिसाब से जनता और आरएसएस का बर्ताव भी होना चाहिए .." मैंने पूछा "...इस पर कोई शोध कार्य प्रारम्भ नहीं हुआ क्या ...?" उन्होंने उत्तर दिया "...यही तो माईनस करने की जरूरत है .." मैंने आश्चर्य से पूछा "...क्यों ...?" उनका सीधा सा उत्तर था "...क्यों कि कांग्रेस से बेहतर कोई नहीं है ..." मैंने डांटते हुए कहा "...मै टीवी एंकर हूँ क्या ...?" लम्बी साँस लेते हुए वो बोले "...चलिए कम से कम ऑफ दी रिकॉर्ड कुछ तो रहेगा ...वैसे घोटालों को माइनस करवाना जरूरी है .." मैंने कहा "...हो रहा भारत निर्माण तो फिर इसकी क्या जरूरत है ..." उन्होंने कहा "...यही तो अब गनीमत है ..." मैंने कहा "...नहीं तो पिछली बार की तरह जूते मिलते ...बेचारे आडवानी भी आपकी चपेट में आगए ..." उन्होंने कहा "...देखिये हम लोग जन हित का पूरा ख्याल रखते हैं ..." मैंने कहा "...वो तो है इसीलिए फूल के बजाय पूरा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट ही उनको ऑफर कर दिया गया ..." उन्होंने मुझे शांत करते हुए कहा "...देखिये वो मानव संसाधन विकास मंत्री हैं ..." मैंने कहा "...तब तो काफी कुछ संभावनाएं हैं ..." उन्होंने आश्चर्य से मुझसे पूछा "...वो कैसे ...?" मैंने कहा "...यूनिट ऑफर आप करिए रेफ़र आरएसएस को कर दीजिये .." उनको शायद कुछ समझ में नहीं आया तो पूछा "...मै समझा नहीं ..." मैंने समझाते हुए कहा"...उनके ही लहजे में उनका पत्ता साफ क्यों नहीं कर देते .."उनकी आँखों मे चमक नहीं आई लेकिन कुछ छिपाते हुए बोले "...आप थोडा स्पष्ट कीजिये .." मैंने स्पष्ट करते हुए कहा "...आप उनको गमालिया या जूतिया दीजिये फिर उंगली आरएसएस की तरफ उठा दीजिये ..." उनको तो जैसे सांप ही सूंघ गया सफाई देते हुए उन्होंने कहा "...दखिये हम कांग्रेसी बड़े ईमानदार लोग हैं ..." मैंने कहा "...चलिए गनीमत है बाला साहेब ठाकरे स्वर्गवासी हो चुके हैं नहीं तो ..." वो और डर गए फिर डरते हुए बोले "...देखिये मेरे ऊपर आप शक मत कीजिये ..." मैंने उनको आश्वासन देते हुए कहा "...घबराईये मत ये शक मेरे तक ही सीमित रहेगा ..." वो खुश होते हुए शिकायती लहजे में बोले "...आप ही बताईये 3500 करोड़ जैसे घोटाले पर घोटाले हुए मेरा भी कुछ हक बनता है कि नहीं ..." मैंने कहा "...जनता का पैसा ..." बीच में ही बात काटते हुए वो बोले "...अजी छोडिये जनता का पैसा ...खून पसीना चुनाव में हम बहाते हैं ...अच्छा नमस्कार ..." ये कहते हुए वो चले गए।
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