Saturday, 23 March 2013

हमारे गोरखपुर शहर ही नहीं पूरे भारत में ये परंपरा है कि किसी के भी घर में किसी नवजात का जन्म हुआ नहीं कि कुछ खास किस्म के लोग ढोल - मजीरा ले के सत्याग्रह करने पहुँच जाते हैं हालांकि इन सत्याग्रहियों से लोगों को खासी परेशानी होती है लेकिन हम भारतीय लोग बड़े सहृदयी होते हैं बुरा नहीं मानते कुछ उपहार स्वरूप दे के ससम्मान उनको विदा करते हैं तब कहीं जा कर सत्याग्रह से मुक्ति मिलती है। लेकिन समस्या तब खडी हो जाती है जब दिए गए उपहार से वो संतुष्ट ही नहीं होते मारे गुस्से में कुछ सत्याग्रही तो अपना बहुत कुछ दर्शनीय बनाने पर उतारू हो जाते हैं। ऐसे ही एक सत्याग्रही से मैंने उसकी गंदी हरकतों के बारे में पूछा सफाई देते हुए तो कहने लगा "...हम केजरीवाल नहीं हैं ..." मैंने उस सत्याग्रही से पूछा "...इसमें तुमको सफाई देने की क्या जरूरत है ..." उसने उत्तर देते हुए कहा "...भ्रष्टाचार मुद्दा है तो सफाई जरूरी है ..." मैंने कहा "...दिल्ली तो बहुत दूर है ..." सत्याग्रही ने बड़े आत्मविश्वास से कहा "...केजरीवाल के लिए दूर है ..." मुझे समझ में नहीं आया तो पूछा "...मुझे समझ में नहीं आया ..." सत्याग्रही मुझे समझाते हुए कहा "...हम भ्रष्टाचार से लड़ने के बजाय हिस्सेदारी के लिए लड़ रहे हैं ..." मुझे आश्चर्य हुआ "...तो घर - घर ढोल-मजीरा ले के घूमने क्या जरूरत है ..." उसने कहा "...तभी तो हिस्सेदारी सुनिश्चित होगी ..." मैंने कहा "...तो फिर और मजबूत करने का प्रयास क्यों नहीं करते 'आप' ..." उस सत्याग्रही ने कहा "...हमने पहले ही कहा कि केजरीवाल नहीं हैं हम ..." मैंने फिर सवाल पूछा "...नहीं हो तो इस तरह सत्याग्रह क्यों करते हो ..." सत्याग्रही जवाब देते हुए कहा "...क्यों ! हमारा कोई हक़ नहीं बनता है क्या ...?" मैंने उसे सुझाव देते हुए कहा "...तो तुमको हक़ की लड़ानी चाहिए ..." सत्याग्रही ने कहा "...सत्याग्रह भी उसीका हिस्सा है ..." मैंने कहा "...इससे न सिर्फ लोगों को परेशानी होती है बल्कि क्रेडिबिलिटी का भी जबरदस्त खतरा है ..." सत्याग्रही बोला "...क्या फर्क पड़ता है ..." मैंने आश्चर्य से पूछा "...क्यों फर्क नहीं पड़ता ...?"  सत्याग्रही ने जवाब दिया "...जब अन्ना हजारे के न होने से क्रेडिबिलिटी पर फर्क नहीं पड़ा तो चिंता किस बात की ...!" मैंने कहा "...लेकिन नरेन्द्र मोदी तो क्रेडिबिलिटी की बहुत चिंता करते हैं ..." उसने पूछा "...केवल सद्भावना सभाओं से ही कैसे संभव है ...?" मैंने कहा "... मैदान तो उन्होंने मार ही लिया अब नेशनल मैदान मारने की तैयारी कर रहे हैं संभव है तभी तो ..." सत्याग्रही ने कहा "...यही तो केजरीवाल भी करेंगे ..." मैंने पूछा "...लेकिन वो आपकी तरह सत्याग्रह करके ये सब कैसे कर लेंगे ...?" सत्याग्रही बोला "...जैसे हम लोगों की चिंता घर-घर जा कर करते हैं ..." मैंने पूछा "...समग्र चिंतन या अवधारणा तो नहीं दिखती ..." सत्याग्रही बोला "...इसीलिए तो अन्ना हजारे की तरह हम भी घोषणा कर रहे हैं कि हम केजरीवाल नहीं हैं ..." मैंने कहा "...लेकिन कुछ तो होना चाहिए ..." सत्याग्रही बोला "...अब कश्मीर के मुद्दे पर जूता खाने के बाद भी कुछ समग्र हो जाए तो ..." मैंने जिज्ञासावश पूछा "...तो का मतलब ...?" सत्याग्रही ने बड़े आराम से उत्तर देते हुए कहा "...तो का मतलब राष्ट्रीय चिंता ..." मुझे उसके इस उत्तर पर बहुत आश्चर्य हुआ, मैंने जिज्ञासावश पूछा "...तब फिर सत्याग्रह ...?" सत्याग्रही चलने मुद्रा बनाने लगा था और उसने जाते-जाते कहा "...आर.टी.आई. और जनलोकपाल का अहसान मान के कुछ तो दे ही दीजियेगा उनको जैसे कांग्रेस को अब तक देते आए हैं...अच्छा नमस्कार ...!" वो ढोल बजाते के निकल गया।  

Friday, 22 March 2013

हाथी की पीठ पर बिना पहिये का टेम्पू चढ़ा भर देने से दलित उत्थान थोड़े हो जाता है लेकिन उसमे समस्या एक यही है कि यही एक ही रास्ता सुझाया जाता जाता है। ज्यादा सोचिये मत नहीं तो ...देख लीजिये आए थे जादू की झप्पी देने उल्टे जेलर साहब ही झप्पी लेने का इन्तजार कर रहे हैं। बहुत खुशी तो नहीं कम से कम इतनी खुशी बहन जी को हुई ही होगी कि उनको पता चला होगा नेताजी की भागीरथ तपस्या को भंग करने में माननीय उच्चतम न्यायलय ने अपनी अंतिम मुहर लगा दी। नेताजी ने बड़ी भागीरथ तपस्या की थी मुन्ना भाई के झप्पी की गंगा को उत्तर प्रदेश में बहाने के लिए, जब मुन्ना भाई के झप्पी की गंगा की पहली लहर बहन जी की और फेंका तो ठीक उसी समय बहन जी ने भागीरथ की तपस्या को भंग करने के लिए भगवन शिव के अवतार में अपनी जटाएं खोल के खडी हो गईं थी। लेकिन पता नहीं मुन्ना भाई को क्या हो गया था कि 1993 मुंबई विस्फोट वाले अहंकार में गंगा मईया की तरह हो गए थे कि मै शिव को बहा ले जाउंगी। लेकिन जब बहन जी ने अपना रौद्र रूप दिखाया तो मुन्ना भाई उस समय भी उनकी जटाओं में उलझ कर रह गए थे। खैर ये तो बीते समय की बात हो गयी कल जब माननीय उच्चतम न्यायलय का फैसला आया तो मुन्ना भाई के सामने कोई चारा ही नहीं था सिवाय वाह-वाह करने के, बहन जी ने कोई बयान नहीं दिया लेकिन यही उनका अपने आप में बहुत बड़ा बयान है मुन्ना भाई के जादू की झप्पी की लत बहुत बड़े - बड़े  सूरमाओं को लग गयी है लिहाजा लिहाजा निकल पड़े हैं मुन्ना भाई की गंगा को शिव की जटाओं से निकालने के लिए, लकिन पता नहीं बीजेपी वालों को ये क्यों नहीं लगी उल्टे वो ये झप्पी जेलर साहब को दिलवाने पर उतारू दीखते हैं। मैंने एक भाजपाई से बात की तो कहने लगे "...हम लोगों को संविधान के जादू की झप्पी की लत लगी है ..." मैंने कहा "...मुन्ना भाई सेलेब्रिटी है ..." उन्होंने कहा "...बिल्कुल अपने घर के हैं ...राहुल गाँधी की तरह हमारे घर खाना हडपने थोड़े ही आते हैं ..." मैंने कहा "...फ़ूड सिक्योरिटी की तरह सेलेब्रिटी सिक्योरिटी भी होनी चाहिए ..." उल्टे उन्होंने मुझे पूछा "...क्यों ...?" मैंने कहा "...इसलिए कि बड़े - बड़े सूरमा उनके छाती पीट रहे हैं ..." उन्होंने कहा "...उन लोगों को अपनी छाती पीटनी चाहिए न कि दूसरों की ..." मैंने पूछा "...क्या ये संकेत है कि बहन जी और आप फिर से इस मुद्दे पर साथ-साथ हैं ..." उन्होंने साफ करते हुए कहा "...ये कोई मुद्दा ही नहीं है ..." मैंने पूछा "...इसलिए कि कुछ दिन पहले नेताजी ने सरे आम राजनाथ सिंह और बीजेपी तारीफ करने के साथ-साथ सम्भावना भी उन्होंने व्यक्त कर दी थी ...?"  उन्होंने उत्तर देते हुए कहा "...मुन्ना भाई को जेल जाना ही होगा ..." मैंने कहा "...क्या इससे सरकार गिर जाएगी ..." उन्होंने उत्तर दिया "...हम संविधान के साथ हैं न्याय के साथ हैं नकि सरकार के साथ ..." मैंने पूछा "...इससे बहन जी सीबीआई से सुरक्षित कैसे हो जाएंगी ...?" उन्होंने मुझे डांटते हुए कांग्रेस के पास जा के इस सवाल जवाब ढूढने का आदेश दिया तो मुझे भी जाना ही पड़ा क्या करें ...

Tuesday, 19 March 2013

चलते चलते लंगड़ी मारना किसी भी के लिए भी उतना अजीब नहीं होता जितना बैठे बिठाए कुर्सी से ढकेल देने  की कोशिश करना। मेरे गोरखपुर शहर की मस्त फागुनी बयार में उड़ती धूल किसी के लिए भी ऐसा अजीब सा अहसास करा देने के लिए पर्याप्त है, टेम्पू वाले तो मजा ले ही रहे हैं नगर निगम वाले भी दयावान बन के थोड़ी बहुत राहत दिखाने के बहाने मजा लेने से नहीं चूक रहे।अभी थोड़े दिनों पहले अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया तो शहर के लोगों को बहुत आश्चर्य हुआ सो थोड़ी सी ही इन्क्वायरी करने पर ही  पता चल गया कि किसी की पहली साल गिरह है। नगर निगम के लोगों ने कुछ और होली की सौगात के तौर पर कुछ देने की सोची तो पोकलेन मशीन ले कर निकल पड़े। मैंने मशीन के चालक से पूछा तो कहने लगा "...नाली का कचरा साफ़ करना जरूरी होता है ..." मैंने पूछा "... पानी के साथ बहने में क्या दिक्कत है...?" उसने जवाब दिया "...यहाँ भी सेकुलर डेमोक्रेसी का ही बोल बाला है ..." मुझे उसकी बात पे गुस्सा आया तो डांटते हुए कहा " ...मजाक किसी और से करना ..." उसने कहा "...बेनी बाबू आएँगे तब ना ..." मैंने पूछा "...क्यों कोई दिक्कत है क्या उनको ..." वो कहने लगा "...कोई नकली छाप असली दांव खेल रहा है ..." मैंने आश्चर्य से पूछा "...क्या मतलब ..." वो बोला "...चले थे लगड़ी मारने  ...." मैंने बात काटते हुए बीच में ही पूछा "...साफ साफ क्यों नहीं कहते ..." वो बोला "...वो तो तब होगा जब मशीन काम करना शुरू कर देगी ..." मैंने कहा "...तुम्हारा मशीन से क्या लेना - देना ..." उसने उल्टे मुझसे ही पूछा "....क्यों जैसे बेनी बाबू का इस पहली साल गिरह का लेना देना हो सकता है तो मेरा क्यों नहीं हो सकता ...?" मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ  कहा "...बहुत ज्यादा दिमाग रखते हो ..." उसने जवाब दिया "...डीडीयू यूनिवर्सिटी में गोल्ड मैडल से चूके थे ..." मैंने कहा "...मतलब आईएएस (एन.क्यू.).." अब आश्चर्यचकित होने बारी उसकी थी सो उसने पूछा "...एन.क्यू. मतलब ...?" मैंने कहा "...ठंडा हो के नॉट क्वालिफाइड ...!" उसने याद करते हुए कहा "...क्या ज़माना था ...मेरी जय-जयकार होती थी ..." मैंने अफ़सोस जताते हुए कहा "...वही तो स्थिति बड़ी खराब है ...!"  उसने कहा "...राजनीति में भी ..." मैंने बीच में ही बात काटते हुए कहा "..लोकल या नेशनल ..." उसने कहा "...नेशनल में नुकसान ज्यादा है ..." मैंने पूछा " ...वो कैसे ...?" उसने उत्तर देते हुए कहा "...आप ही देखिये प्रियंका गाँधी ने बेनी बाबू को डिप्लोएड कर दिया ..." मैंने पूछा "...ये तो उनका बयान है ..." उसने कहा "...आप अगर पोकलेन चला के देखिये सब समझ में आ जाएगा ..." मैंने उसकी तारीफ करते हुए कहा "...बड़ा गर्व है तुमको अपने अनुभव पर ..." उसने कहा "...योग्यता में हम किसी से कम थोड़े ही हैं ..." मैंने कहा "...तुमको कैसे पता ..." उसने बड़े आत्मविश्वास से कहा "...कैसे नहीं पता ...इस पोकलेन मशीन पर बैठ के देखिये दुनियां के वास्तविक नज़ारे दिखेंगे आपको ..." मैंने कहा "...योग्यता में तुम किसी से कम कैसे नहीं हो ..." उसने कहा "...क्योंकि राहुल गाँधी के उपाध्यक्ष होने बावजूद प्रियंका गाँधी अमेठी आ गईं हैं ..." मैंने सुझाव देते हुए कहा "...तुमको कोशिश करनी चाहिए ..." तभी उसका सुपर वाईजर उसे डाटते हुए काम करने का आदेश देने लगा तो मुझे भी धीरे से खिसक लेना बेहतर लगा सो मैंने वैसा ही किया .... 

Sunday, 17 March 2013

लगता है नितीश कुमार हिंदुत्व का डबलबेड अब काटने को दौड़ रहा है तभी कांग्रेस की चरमराती खटिया की ओर ललचाई नजरों से देख रहे हैं। पता नहीं उनको उस कांग्रेसी खटिये की चरमराहट में इटली का संगीत कैसे सुनाई दे रहा है खैर ये वो ही जाने लेकिन अब पता नहीं मोदी के नामोमंत्र के बाद उनको क्या हुआ कि मय जद्दू राज्जा-गदाई ले कर पहुँच गए रामलीला मैदान, मैंने एक जद्दू नेता से पूछा तो कहने लगे "...हम लोग संघर्ष करने आए हैं ..." मैंने पूछा "...किस रासलीला के लिए ..." वो बोले "...रासलीला के लिए नहीं स्पेशल दर्जे के लिए .." मैंने कहा "...ये कौन सा दर्जा होता है ..." वो गुस्से में बोले "...आपको नहीं पता है क्या बिहार कितना पिछड़ा है ...?" मैंने कहा "...तो शासन किस लिए कर रहे हैं ...?" उन्होंने कहा "...हम चुनाव जीते है ..." मैंने कहा "...जिसके साथ जीते हैं वो तो नरेंद्र मोदी की तरह कॉंफिडेंट है आपकी ही ..." वो बीच में ही बात कटते हुए बोले "...मोदी का नाम मत लीजिये ..." मैंने कहा "...क्यों खटमल के भी कान होते हैं क्या ..." वो थोडा झल्लाते हुए बोले "...हम लोगों को विशेष पैकेज चाहिए ..." मैंने कहा "...उनके खटिया का तो उडिचन ही ढीला होता जा रहा है आप जाएँगे लीकेज से तो टूटेगा नहीं...?" वो बोले "...हम उसी के साथ रहेंगे जो ये सुविधा हमको देगा ..." मैंने कहा "...राज्जा-गदाई तो आपके पास है ही फिर परशानी क्या है ..." उन्होंने उत्तर देते हुए कहा "...परेशानी है तभी न ..." मैंने कहा "...जो आपको ऐसी बढ़िया सुविधा दे रहा है उसकी सुविधा आपको काट रही है ..." वो नाराज होते हे बोले "...नहीं चाहिए हमको ऐसी सुविधा ..." मैंने पूछा "...इतनी बढ़िया राज्जा - गदाई है लेकिन खटिया आपकी गोल है ..." वो मुझे समझाते हुए बोले "...देखिये हम लोग नरेंद्र मोदी को बर्दाश्त नहीं कर सकते ..." मैंने कहा "...यही बात तो आप अडवानी जी के पहले भी कहते फिर रहे थे ..." वो बोले "...तब की बात और थी ..." मैंने कहा "...क्यों मोदी की मिठाई गप्प से अन्दर जब अहसान की बारी आई तो उसी से पेट खराब होने की नौटंकी हो रही है ..." वो बोले "...जो भी हो हम और नरेंद्र मोदी साथ-साथ नहीं रह सकते ..." मैंने कहा "...स्पेशल का दर्जा उसको मिलता है जो स्पेशल होता है ...तो मोदी की तरह स्पेशल क्यों नहीं हो जाते ..." वो बोले "...हम लोग सेक्युलर हैं ..." मैंने कहा "....पहले जिसके साथ सोफे पर आराम फरमा चुके हैं क्या वैसा कुछ मिलेगा ...?" वो बोले "...हमको हमारा अधिकार चाहिए बस ..." मैंने कहा "...नरेंद्र मोदी ने आपको आपका अधिकार कोसी के बाढ़ के समय दिया तो क्यों फेर दिए थे आप ...?" वो बोले "...ईमान भी कोई चीज होती है ..." मैंने कहा "...बगैर खटिया के आपकी इमादारी पर कोई विश्वास कैसे करे ...?" वो मरे खुशी से सीना चौड़ा करते हुए बोले "...यही तो ! कांग्रेस में क्रेडिबिलिटी का कोई सवाल ही नहीं है ..." मैंने कहा "...बिहार में आपकी जमीन है ही कहाँ ..." वो बोले "...देखिये हम वो कर के दिखा देंगे ..." मैंने कहा "...हाँ ...मन चंगा तो पटना में दरभंगा ...!" वो बोले "...बीजेपी हमारे कारण सत्ता में आई है ..." मैंने कहा " ...वो तो सफलता में आपसे 25% आगे यानी 92% पर हैं ...कहीं रज्जो - गदाई गोल हो गया तो ...?" वो बोले "...जो भी हो हम अपना अधिकार ले के रहेंगे ..." मैंने कहा "...ढीले हो चुके उडिचन वाली खटिया की चरमराहट से निकलने वाला इटैलियन संगीत वाह इटली क्या बात है ...मैंने कहा नमस्कार .. भगवान आपको स्पेशल दर्जे का पैकेज दिलवाए ....!   

Friday, 15 March 2013

कोई हसीना जब बीच चौराहे पर मिर्ची चबाने लगे तो समझ लीजिये अनिष्ट होने वाला है। कल सबेरे-सबेरे जब हिना रब्बानी का मिर्ची चबाना अख़बारों दिखा तभी लग गया कि कुछ न कुछ जरूर गड़बड़ है शाम होते-होते पाकिस्तानी असेम्बली से इज्जतदार लोगों ने  सूरज पर थूकना शुरू कर दिया। खैर राजा परवेज़ अशरफ तो 'कुछ तूफानी करते हैं' स्टाइल में दावत ए वलीमा हमारे 'भारतीय राजनीति के सलमान खान' से ठूंस ले गए थे सो नमक हरामी तो उनको करनी ही थी लेकिन बाकी लोग जिस तरह के ख्वाब में जी रहे थे उससे तो यही लगता है भारत का कांग्रेसी हुक्मरान उनकी जेब में पलता है। सबेरे की मिर्ची पाकिस्तानी हुक्मरानों को कुछ ज्यादा ही लग गयी थी लेकिन शाम होते होते उन लोगों को थूकना जरूरी हो गया था। एक महाशय टीवी पर बता रहे थे कि भारत इंटरनेशनल सिनारियो में कहीं है ही नहीं, अफगानिस्तान से अंकल सैम की फौज वापस जा रही है लिहाजा भारत को कुछ करना चाहिए अपनी उपस्थिति दर्शानी चाहिए, पता नहीं यहाँ इष्टमित्र कौन है वेस्टमित्र कौन है पता ही नहीं चलता। आए थे मछली मारने मछुआरा मार के चले गए लगे हाथ तूफानी करने के लिए सलमान जी बैसाखी खोज रहे थे पता नहीं खुद के लिए या किसी और के लिए। हमारे कांग्रेसी हुक्मरानों की करतूत को कैसे लिया जाए समझ में नहीं आता जब संसद में उन पांच शहीदों को श्रद्धांजलि दी जा रही थी तो कैबिनेट का कोई  वरिष्ठ सदस्य सदन में मौजूद ही नहीं था। असल नीति का पता नहीं कहाँ से इंस्पायर की जा रही है यहाँ पर फिट होना बहुत दूर की बात है उल्टे हमारा और हमारे बहादुर और वीरों सिर कलम करने पर उतारू है। ऐसे विषय पर क्या कहा जाए घोटाले दर घोटाले, मंहगाई अलग परेशान किये हुए है इधर पिद्दी भर का छिछोर अलग से थूकता फिर रहा है। अभी गुजरात के चुनावों में जिस तरह नरेंद्र मोदी ने महात्मा गाँधी के एक कोटेशन  को मुद्दा बनाया था उसकी बहुत महती जरूरत है कि '...स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद कांग्रेस को ख़त्म कर देना चाहिए ...' वास्तव महात्मा गाँधी बहुत दूरदर्शी थे और जवाहर लाल नेहरू की करतूतों से भली भांति परिचित थे। आज की कांग्रेस उस समय की कांग्रेस से भी कहीं गयी गुज़री दिखती है। अभी किसी कांग्रेसी ने एक मित्र के टाइमलाइन पर पोस्ट मारा था कि भारत की तुलना अमेरिका से नहीं करनी चाहिए पता नही उनको ये पता है भी या नहीं कि दक्षिण कोरिया भारत से साल भर बाद 1948 में स्वतंत्र हुआ और मात्र 16 बाद ही खुद को विकसित राष्ट्र घोषित कर दिया। क्या हमारे पास ऐसा कुछ भी नहीं है ? वास्तव में हमारे पास उससे कहीं बहुत ज्यादा है और हम मात्र 10 साल में ही विकसित राष्ट्र हो सकते है नरेंद्र मोदी ने ये साबित कर दिया है। लेकिन इस देश का दुर्भाग्य है कि महात्मा गाँधी की अनिच्छा के बावजूद कांग्रेस बची रह गयी। विकास का सारा पैसा कांग्रेस का पेट भरने में चला गया आज भी जा रहा है और जिस रस्ते से जा रहा है उसी का परिणाम है कि पिद्दी भर का पकिस्तान हमारे साथ इस तरह की घिनौनी हरकत करता है और और क्या कहा जाए ....मन पीड़ा, क्षोभ और क्षोभ से भर उठता है ...   

Thursday, 14 March 2013

अन्य जगहों के भांति घोर राजस्थानी रेगिस्तान की भीषण गर्मी में भी कांग्रेसी जीजाजी अपने समर्थक सहयोगी के साथ पुश्तैनी लंगोटी सुखाने पहुँच गए तभी किसी स्थानीय ने उनको देख के ताल ठोकते हुए पूछा "...दिल्ली में पानी बहुत ज्यादा है क्या ..." कांग्रेसी जीजाजी  ने कोई जवाब नहीं दिया लेकिन इससे उस स्थानीय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा, फिर उनके सहयोगी की धमकी सुन कर स्थानीय चले गए। पर मुझे सहयोगी ने बताया कि कांग्रेसी जीजाजी  "जीजाजी" के नाम से न सिर्फ कुख्यात हैं बल्कि जिमखाने के मशहूर बाहुबली भी माने जाते हैं। ये धमकी सुन के मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने सहयोगी से ललकाराने के लहजे में पूछा  तो सहयोगी ने कहा "...क्या परेशानी है ..." मैने तैश में कहा "...आपको घूम - घूम के गन्दगी फ़ैलाने का कोई अधिकार नहीं है ..." सहयोगी ने कहा "...वो कही भी आ जा सकते  हैं और कुछ भी कर सकते हैं ..." मैने कहा "... क्यों रेगिस्तान में मछली मारने की कला इटली से सीख कर आए हैं ...?" सहयोगी ने कहा "...देखो  उनकी और मेरी बॉडी ..." मैने कहा "...इससे क्या मछलियाँ ज्यादा मिलती हैं  ...?" सहयोगी ने धमकी देते हुए कहा "...उठा के कहीं और शिफ्ट कर दिया जाएगा ..." इसपर मुझे मीडिया-मीडिया चिल्लाना पड़ा तो जीजाजी और उनके सहयोगीने चुप कराने की कोशिश की लेकिन आश्चर्य से कड़े हो कर पूछा  "...मीडिया मीडिया चिल्लाने की क्या जरूरत है ...? " मैने कहा "...क्यों मुझे मीडिया पर भरोसा नहीं करना चाहिए अगर आप लोगों से  डर लगे तो ...?" सहयोगी ने कहा "...नहीं सीबीआई पर, मुख्यमंत्री पर या सरकार पर भरोसा कीजिये  ..." मैने कहा "...भोपाल गैस कांड से मन नहीं भरा, बोफोर्स से दगवाने के बाद भी मन नहीं भरा, बहुत - बहुत उघटापैंची करके भी मन नहीं भरा तो ...." सहयोगी ने बीच में ही बात कटते हुए कहा "...चुप एकदम चुप !!! बक करने की कोई जरूरत नहीं है ..." मैने गुस्से से कहा "...क्यों इटली से मछुआरा मारने आपके रिश्तेदार आए थे ...?" सहयोगी बोले "...वो मछुआरा मारने नहीं आए थे ...?" मैंने बीच में ही टोकते हुए कहा "...तो फिर रिश्तेदारी निभाने का ये कौन सा तरीका है ...?" सहयोगी बोले "...ये सब होता रहता है ..." मैने पूछा "...आपके घर में ये सब क्यों नहीं होता ..." सहयोगी ने उत्तर देते हुए कहा "...वास्तव में अब आपको हमारे शीशे के घर पर पत्थर नहीं फेंकना चाहिए ..." मैने कहा "...मेरा घर तो शीशे का नहीं है ..." सहयोगी ने धमकी देते हुए कहा "...केजरीवाल बनने के ज्यादा कोशिश मत कीजिये ..." मैंने कहा "...मुझे न तो केजरीवाल बनना है और न ही राहुल गाँधी ..." सहयोगी ने धमकी देते हुए कहा "...राहुल गाँधी का नाम मत लीजिये..." मैने कहा "...क्यों ... सारी खुदाई एक तरफ जोरू का भाई एक तरफ ...!" सहयोगी ने कहा "...देखिये उन्हें देश में कहीं भी अपनी लंगोटी सुखाने से कोई नहीं रोक सकता ...आप भी नहीं ..." मैने कहा "...आप क्या चाहते हैं कि सभी लोग आपके लिए रेड कारपेट बिछा दें ..." सहयोगी बोले "...वो तो करना ही पड़ेगा ..." मैने साफ - साफ़ कह दिया "... मै मछुआरा या कोई और नहीं हूँ ये आप अच्छी तरह समझ लीजिये ..." तभी जीजाजी ने अपना मोबाईल निकाल के कहीं मिलाया थोडी ही देर पुलिस के सायरन की आवाज सुनाई देने लगी ...फिर मेरे सामने भागने के सिवा कोई और चारा ही नहीं था .....   

Tuesday, 12 March 2013

शहर में कोई शोर नहीं हुआ कोई मुनादी नहीं हुई तो वित्तमंत्री को खुद ही मोर्चा संभालना पड़ा। बड़े अरमानो से उन्होंने जनभावना का ख्याल रखा था अपने बजट में लेकिन इससे वो कुछ और भी साबित करना चाहते थे मतलब साफ़ था उनका, वो चाहते थे कि अगर कोई जूता पहना है तो लोग अपनी आँखें मूँद लें और कहें देखो वो जूता नहीं पहनता। इसी नंगईगिरी पर मैंने एक कट्टर कांग्रेसी को पकड़ा तो कहने लगे "...देखिये भारत का विकास हो रहा है ..." मैंने कहा "...पॉजिटिव, नेगेटिव या ...?" उन्होंने कहा "...नरेन्द्र मोदी की  तरह मै तीसरा ओपीनियन नहीं रखता ..." मैंने पूछा "...माफीनामा ले के घूमने से क्या होगा ..." वो बोले "...देखिये हम लोगों को बहुत देखना पड़ता है ..." मैंने फिर पूछा "...आपके राजीव जी 95% लीकेज की बात स्वीकारते थे , आपके राहुल जी भी यही करते हैं ..." बात कटते हुए वो बीच में बोले "...चिदंबरम जी ने 70 बनाम 30 का आंकड़ा प्रस्तुत किया है .." मैंने भी बीच में टोकते हुए कहा "...तब हो रहा भारत निर्माण या निर्वाण ...?" वो बोले "...आप सीएजी पर मत जाईये न ..." मैंने पूछा "...वो क्यों..." वो कहने लगे "...सीएजी  वालों को सीमित मूल्यांकन करने की आदत है वो लोग सम्पूर्णता से नहीं देख पाते ..." मैंने कहा "...तो सामन्ती युग के डकैतगिरी को मान्यता मिलेगी ..." वो बोले "..आप कुछ भी कह लीजिये नीतियां नीतियां होती हैं ..." मैंने कटाक्ष करते हुए कहा "...भले उल्टी गंगा बहने लगे ..." उन्होंने पूछा "...हम लोग चैतन्य नहीं हैं क्या ..." मैंने कहा "...कल के राजीव जी और आज के राहुल जी 95% पर कब्जा कर 5% जनता में फेकते थे और हैं बाद में कहते हैं कि भ्रष्टाचार है ..." उन्होंने कहा "...देखिये उनका कहना वाजिब है ..." मैंने कहा "...फिर चिदंबरम साहब 70% का अहसान किस लिए कर रहे हैं ..." वो बोले "...वित्तमंत्री काफी पढेलिखे हैं ..." मैंने कहा "...जब उन दोनों अधपढ़ों की बात वाजिब है तो ..." वो तपाक से पलट कर बोले "...तो का क्या मतलब ..." मैंने कहा " ...तो का मतलब यदि आपको पता है इसका सीधा मतलब है ये भी आपको पता है कहाँ जा रहा है ..." वो गुस्से में बोले "...आपका मतलब वो 95% उलटे हमारे पास आ रहा है ...हम भ्रष्ट हैं ...?" मैंने कहा "...ये तो आपके राजीव जी, राहुल जी और अब चिदंबरम जी ही कह रहे हैं ..." वो बोले "...सीएजी वाले पता नहीं किस मिट्टी के बने हैं ...? मैंने कहा "...सोच लीजिये 60,000 करोड़ का बोल रहे हैं वो लोग ..." वो बोले "...कांग्रेस अपनी नीतियों से पलटने वाली नहीं है ..." मैंने तर्क करते हुए कहा "...ये तो सामन्ती के युग डाकू मलखान सिंह, मंगल सिंह और ना जाने क्या-क्या वालों से भी गयी गुजरी नीति हो गयी ..." उन्होंने गुस्से में कहा "...आपको हमारा सम्मान करना चाहिए ..." मैंने कहा "...ये आपका अपमान कैसे है लकड़ी को लकड़ी नहीं तो लोहा कहा जाए ..." वो बोले "..हम लोगों ने किसानो के लिए बहुत कुछ किया ..." मैंने कहा "...करने से पहले छीनने की व्यवस्था क्यों कर ली ...? उन्होंने कहा "...ये सिस्टम का दोष है ..." मैंने कहा "...वो डाकू लोग भी अमीरों का छीन के जो गरीबों को देते थे ...उन गरीबों से तो नहीं छीनते थे ..?" वो निरीहता से बोले "...देखिये भ्रष्टाचार है हम क्या करें ...?" मैंने कहा "...यदि आपको पता कि भ्रष्टाचार है तो फिर समस्या क्या है ख़त्म कर दीजिये उसको ..." वो बोले "...अरे कैसे ख़त्म कर दें ..." मैंने कहा "...वैसे ही जैसे सामने दुश्मन है तो गोली मार दीजिये ...हो गया ..." वो बोले "...ये नामुमकिन है ..." मैंने पूछा " ...क्यों ...?" वो बोले "...रामसिंह की तरह हम लोग कायर नहीं है जो जेलआत्महत्या कर लेंगे ..." मैंने खिन्नता से कहा "...आपको जीवन इतना प्यारा है ..." वो बोले "...इससे कीमती कोई नहीं ...कुछ भी कर सकते हैं हम लोग ...बस नमस्कार " मुझे भी आश्चर्य से नमस्कार करना पड़ा....

Sunday, 10 March 2013

पाकिस्तान से राजा परवेज अशरफ अजमेर में चादर चढाने आये तो कुछ तूफानी करने के चक्कर में  विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद उनके स्वागत में लोट गए। उन्होंने ने क्या सोच के ऐसा किया ये उनके प्रेसीडेंट मैडम की बीमारी तरह बिल्कुल रहस्य तो नहीं है लेकिन इतना तो लगता ही है कि उनको किसी न किसी बैसाखी की जरूरत जरूर है। मैंने उनके समर्थक से बात किया तो कहने लगे "...हर किसी को पुण्य कमाने का अधिकार है .." मैंने थोड़ा तीव्र कटाक्ष में कहा "...पुण्य कमाना या  पाप धोना ..." वो पूछते हुए बोले "...कैसा पाप ... " मैंने कहा "...इसके लिए कूटनीतिक घोटाले की क्या जरूरत थी ...?" वो बोले "...पोलिटिकल ट्रेंड के हिसाब से  चलना  जरूरी है ..." मैंने पूछा "... क्या ये गलत नहीं है ...?" उन्होंने जवाब देते हुए कहा "...जिस रास्ते पर महाजन चलें वो रास्ता गलत नहीं होता ..." मैंने कहा "...जो राजा साहेब ने किया है वो छिछोर छाप शैतान का या महाजन का काम है ...?" उन्होंने मुझे समझाते हुए कहा "...देखिये हमें अपनी संस्कृति बहुत प्यारी है ..." मैंने कहा "...ये तूफानी करने का ख्याल उनका अपना था ...?" उन्होंने कहा "...हम लोग बहुत सहृदयी हैं लिहाजा सबका ख्याल रखते हैं ..." मैंने कहा "...इसीलिए सलमान खान की उनको याद आ गयी ..." वो बोले "...इंस्पिरेशन कहीं से मिले बुरा नहीं होता ..." मैंने पूछा "...इससे उनका पुराना पाप कट जाएगा ...?" वो बोले "..देखिये वो पापी नहीं हैं ..." मैंने तपाक से पूछा ".. फिर क्या हैं वो ..?" उन्होंने निरीहता से जवाब दिया "...केजरीवाल से मत पूछियेगा ..." मैंने आश्चर्य से पूछा "...क्यों ..." वो बोले "...उनको ओथेन्टीसिटी का पता नहीं है .." मैंने कहा "...ये नया तरीका है पाप धोने का मेरा मतलब पुण्य कमाने का ..." वो बोले "...कांग्रेस हमेशा से ही इन्नोवेटिव रही है ..." मैंने कहा "...इसीलिए अब ये नामवाद शुरू हुआ है ...कुछ तूफानी करते हैं ...क्यों ...?" वो बोले "...अगर यही है तो हर्ज़ क्या है ..." मैंने उनसे पूछा "...किसी अपाहिज का इंटरव्यू किया है क्या ..." वो बोले "...मैंने कहा न हम लोग बड़े सहृदयी हैं ..." मैंने पूछा "...तब तो उनकी भी याद आई होगी उनको ..." उन्होंने कहा "...इसीलिए तो ये सब करना जरूरी था ..." मैंने कहा "...कुछ तो जन भावना का भी ख्याल ..." वो बीच में ही बात कटते हुए बोले "...देखिये उनकी यात्रा सरकारी नहीं थी लिहाजा जन भावना का सवाल ही कहा उठता है ..." मेरा दिमाग चकराया फिर पूछा "...जब सरकारी यात्रा नहीं थी तो फिर कुछ तूफानी करने की जरूरत क्या थी ...?" वो सफाई देते हुए शायराना अंदाज़ में बोले "...देखिये कुछ तो मजबूरियां रही होंगी वरना यूँ ही कोई बेवफा नहीं होता ...!" मैंने कहा "...क्यों आपके पाकिस्तानी आकाओं का दबाव था ...?" वो बोले "...देखिये ऐसी कोई बात नहीं है ..." मैंने पूछा "...क्या बात है फिर ..." वो मनमोहन सिंह के अंदाज़ में बोले "...सवालों का आबरू रखना जरूरी था ..." मैंने कहा "...राजा साहेब आपकी आबरू थे क्या ...?" वो चुप हो गए ...बहुत देर तक बिल्कुल चुप रहे तो मैंने उनसे विदा ले लिया। 

Saturday, 9 March 2013

अमेरिका के व्हार्टन में नरेन्द्र मोदी का आतिथ्य भाषण रद्द कर दिया गया, कोई बहुत आश्चर्य की बात नहीं ये तो वैसा ही है जैसे डॉ. एपीजे अबुल कलाम ने चार बार बी ए आर सी और इंडियन एयर फ़ोर्स की परीक्षा में असफल रहे , उनकी योग्यता विक्रम साराभाई ने पहचाना आगे चल कर साबित भी हुआ। लेकिन राहुल गाँधी को बुलाया गया था और आश्चर्यजनक रूप से उन्होंने वहां जाने से मना कर दिया। मैंने एक खांटी कांग्रेसी से इस बारे में बात की तो कहने लगे "...देखिये वो संगठन देखना चाहते हैं .." मैंने कहा "..वहां न जाने से कांग्रेस की डूबती लुटिया उपरियाएगी ...?" उन्होंने मुझे शांत करते हुए कहा "...देखिये वो पार्टी के प्रति समर्पित हैं ..." मैंने कहा "...फिर उनको बार-बार इटली, स्विटज़रलैंड या और जगहों पर  ...?" उन्होंने कहा "... तफरी अलग चीज है और ये अलग ..." मैंने कहा "...हाँ कम से कम केजरीवाल जैसा तो दिमाग होना ही चाहिए ..." उन्होंने पूछा  "...क्या मतलब ..." मैंने कहा "...धर्म निरपेक्ष गाली देने तो आना ही चाहिए ..." उन्होंने कहा "...'आप' के केजरीवाल सदा संतुलन का ध्यान रखते हैं ..." मैंने कहा "...आपके राहुल जी से नरेन्द्र मोदी का ये कैसा संतुलन ...?" वो बोले "...हमें किसी भी स्तर पर उनसे आगे ही दिखना है ..." मैंने कहा "... इसके लिए तो कुछ बुद्धि का होना भी जरूरी है ..." वो बोले "...इसीलिए तो राहुल जी ने शादी नहीं करने की घोषणा कर दी ..." मैंने कहा "...भारतीय राजनीति का 'लता मंगेशकर' बनाने का इरादा है ...?" वो थोड़ा उत्साहित हो कर बोले "...बिलकुल लिविंग लेजेंड के तरह ..." मैंने टोकते हुए कहा "...लेकिन राग दुखद गा के क्या होगा ..." वो बोले "... बिना लोगों को इमोशनल किये सफलता नहीं मिलती ..." मैंने कहा "...राजीव, संजय और इंदिरा गाँधी का समय अभी भी चल रहा है क्या ...? वो बोले "... नहीं चल रहा है तो चला दिया जाएगा ..." मैंने पूछा "...इसके लिए राजनीति का 'लता मंगेशकर' बनना कैसे उपयोगी है ...?" उन्होंने जवाब दिया "...देखिये जयपुर के बाद पूरी स्थिति बदल रही है ..." मैंने कहा "...इसीलिए राहुल जी को व्हार्टन की तैयारी करने का मौका नहीं मिला ...?" उन्होंने कहा "...नहीं ऐसा नहीं है ..." मैंने कहा "...हाँ उसके लिए तो पढ़ा-लिखा होना भी जरूरी नहीं है ...!" उन्होंने कहा " हमारा मकसद नरेन्द्र मोदी को पछाड़ना है .." मैंने कहा "...रेलगाड़ियों और सरकारी बसों में गाना गा के कोई करोडपति हुआ है क्या ...?" ऊहोने कहा "...राहुल जी राजनीति का स्तर मेन्टेन करना चाहते हैं ..." मैंने कहा "...श्रीराम कालेज में तो बढाने की बात हो रही थी ..." वो बोले "...इसीलिए नरेन्द्र मोदी को वीज़ा की प्रॉब्लम है ..." मैंने पूछा "...राहुल गाँधी के  'लता मंगेशकर' बन जाने से स्तर  कैसे बढ़ जाएगा ..." उन्होंने कहा "..देखिये वो एक बुद्धिमान राजनीतिज्ञ हैं ..." मैंने आश्चर्य से कहा  "...चलिए कांग्रेस तो उनके लिए हमेशा से ही तैयार खडी है .." वो बोले "...अब वो तैयार कांग्रेस को करेंगे ..." मैंने पूछा "...तो फिर मतलब क्या है राजनीति का ...?" उन्होंने बड़ी सरलता से उत्तर दिया "..आपको तो पता है इसके कोई खास क्राइटेरिया नहीं है न एजुकेशनल और न ही मोरल ओनली इमोशनल ..." मैंने आश्चर्य से कहा "....हाँ यही बात है तो व्हार्टन जाना चाहिए था राहुल जी को ..." वो गरज कर बोले "...वॉर वहां करो जहाँ दुश्मन हो ..." कहते हुए वो अपना सीना चौड़ा कर रहे थे। मरे दिमाग राहुल गाँधी के बुद्धिमान सहयोगी से बात करके चकरा रहा था ...कोई प्रश्न ही नहीं था मेरे पास।

Monday, 4 March 2013

मेरे मुहल्ले के यादव जी अभी भी ठीक से अपने आप को संभालने में काफी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। बड़े-बड़े दुर्दिनो में भी वो हिम्मत के साथ बसपा और भाजपा से दो-दो हाथ करते फिरते थे। पिछले साल नेताजी की पार्टी जब बहुमत से जीती थी तो उन्होंने बड़े उत्साह से पूरे मोहल्ले का मुह मीठा कराया था। बेचारे आज सदमे से जूझ रहे हैं। उनके घर जा कर उनका हाल मैंने पूछा तो कहने लगे "...अब हल्ला बोल के क्या होगा .." मैंने कहा "...आपको आराम की जरूरत है ..." वो कहने लगे "...अब तो सारा मुहल्ला बोल रहा है नेताजी ने तो मुँह मुहल्ला खुलवा दिया ..." मैंने सहानुभूति दर्शाते हुए कहा "...राजनीति करने के लिए उम्र पड़ी है आप ठीक तो हो जाईये ..." कहने लगे "...भरी  राज्यसभा में उन्होंने राजनाथ जी से बात किया बताईये ..." मैंने समझाते हुए कहा "...देखिये राजनीति में कोई दुश्मन या कोई दोस्त नहीं होता ये सब होता रहता है ..." वो सुबकते हुए बोले "...यही सब करना था तो फिर ..." मैंने कहा "...देखिये आप नाहक ही लोड ले रहे हैं ...राजनीति संभावनाओं का भी खेल है ..." वो थोड़े गुस्से में बोले "...लेकिन वो तो हमारी भावनाओं से खेल रहे हैं ..." मैंने कहा "...आप उसमे 'सं' जोड़ना मत भूलिए न ..." वो कराहते हुए बोले "...इसी जोड़ - घटाने में तो जान निकली जा रही है ..." मैंने पूछा "...क्या वाकई आपको इतना दुःख हुआ कि होस्पिटलाईज्ड होना पड़ा आपको ..." उन्होंने जवाब दिया "... यकीन मानिये ये दिन देखने के लिए बसपा और भाजपा लोहा नहीं लिए थे हम लोग ..." मैंने कहा "... उस घटना के बाद शायद उनको भी आपकी याद आई और कह दिया ये संभव नहीं है आप बेवजह तूल न दें ..." वो थोडा तैश में आ गए बोले "...तूल कैसे न दिया जाए नरेन्द्र मोदी को देख-देख के मोहल्ले वाले फूल रहे हैं ...." मैंने हौसला बढ़ाते हुए कहा "...आप तो हैं ही लोहा लेने के लिए ..." उन्होंने कहा "...अरे तबियत तो नेताजी लेते गए ..." मैंने ढाढस बढ़ाते हुए कहा "...यही तो समय है अपनी वीरता दिखने का ...." वो कहने लगे "...ढाढस बढाईये या उत्साहित कीजिये हेल्थ तो नेताजी ले बीते ..." मैंने कहा "...वैसे आपके नेताजी मजे हुए पोलिटिशियन हैं कुछ सोच-समझ कर ही ऐसा किया होगा ...." वो बोले "...अगर ऐसा ही होता तो फिर उनको हमारी जरूरत ही क्या थी उनको ..." मैंने कहा "...वो तो है ..." वो कराहते हुए बोले "...बहुत - बहुत हल्ला बोले विश्वास कीजिये कभी भी झंडा नीचे होने नहीं दिए हम लोग ..." मैंने कहा "...बेवजह आप पुराने दिनों को याद करके अपना दर्द बढ़ा रहे हैं ...." वो सफाई देते हुए बोले "...क्या करें अब मन ही है मानता ही नहीं ..." तभी उनका बेटा आ गया मैंने उससे पूछा "...पार्टी कार्यालय से आ रहे हैं क्या ..?" वो शायद थोडा गस्से में था या मूड ठीक नहीं था उसका, उसने बात नही की मैंने यादव जी से पूछा तो कहने लगे "...इसी की चिंता खाए जा रही है बड़े अरमान हैं इसको लेकर ले-दे कर पॉलिटिक्स ही करियर के लिए बचा है ..." मैंने कहा "...कोई और जगह भी ट्राई करना चाहिए ..." उन्होंने कहा "...यही तो समस्या है कहीं और ये खपेगा कैसे .." मैंने कहा "..हाँ वो तो है समस्या वाकई गंभीर है.." उन्होंने कहा "...नरेन्द्र मोदी के प्रभाव में नेता जी भी आगए यकीन ही नहीं होता ..." कहते हुए उन्होंने करवट बदल लिया ...तो मैंने भी शीघ्रातिशीघ्र  स्वास्थ्य लाभ की कामना के साथ विदा ले लिया।
अभी कुछ दिनों पहले खबर छपी कि किसी ने कपिल सिब्बल को फूल भेंटने के बजाय पूरा का पूरा गमला ही प्रस्तुत कर दिया। पता नहीं उनको बीते दिनों की बातें याद आई कि नहीं जिससे उनके प्रधानमंत्री एवं वित्तमंत्री दो-चार हो चुके हैं। खैर ये मामला तो ऐसा नहीं है कि दिग्विजय सिंह को इसका श्रेय आरएसएस को देना पड़े सो मुझे लगा कि किसी कांग्रेसी का ही हाथ होना चाहिए मैंने एक कांग्रेसी से पूछा तो कहने लगे "...मै दिग्विजय सिंह नहीं हूँ .." मैंने पूछा "... फिर ..." वो उलटे मुझसे ही पूछने लगे "...कहीं आप आरएसएस कैडर या सपोर्टर तो नहीं ...?" मैंने आश्चर्य से कहा "...उससे क्या होगा ..?" वो कहने लगे "...लाठी ही बची है चलने के लिए ..." मैंने कहा "...घबराईये मत ऐसा कुछ नहीं है ..." फिर वे कुछ हिम्मत जुटा कर बोले "...देखिये वे ठीक लोग नहीं हैं ...!" मैंने पूछा "...फिर ठीक कौन है ...?" उन्होंने कहा "...इंदिरा जी ने कहा था भ्रष्टाचार ग्लोबल समस्या है ...!" मैंने कहा "...सही बात है ..." इस पर वो कहने लगे "...इसी के हिसाब से जनता और आरएसएस का बर्ताव भी होना चाहिए .." मैंने पूछा "...इस पर कोई शोध कार्य प्रारम्भ नहीं हुआ क्या ...?" उन्होंने उत्तर दिया "...यही तो माईनस करने की जरूरत है .." मैंने आश्चर्य से पूछा "...क्यों ...?" उनका सीधा सा उत्तर था "...क्यों कि कांग्रेस से बेहतर कोई नहीं है ..." मैंने डांटते हुए कहा "...मै टीवी एंकर हूँ क्या ...?" लम्बी साँस लेते हुए वो बोले "...चलिए कम से कम ऑफ दी  रिकॉर्ड कुछ तो रहेगा ...वैसे घोटालों को माइनस करवाना जरूरी है .." मैंने कहा "...हो रहा भारत निर्माण तो फिर इसकी क्या जरूरत है ..." उन्होंने कहा "...यही तो अब गनीमत है ..." मैंने कहा "...नहीं तो पिछली बार की तरह जूते मिलते ...बेचारे आडवानी भी आपकी चपेट में आगए ..." उन्होंने कहा "...देखिये हम लोग जन हित का पूरा ख्याल रखते हैं ..." मैंने कहा "...वो तो है इसीलिए फूल के बजाय पूरा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट ही उनको ऑफर कर दिया गया ..." उन्होंने मुझे शांत करते हुए कहा "...देखिये वो मानव संसाधन विकास मंत्री हैं ..." मैंने कहा "...तब तो काफी कुछ संभावनाएं हैं ..." उन्होंने आश्चर्य से मुझसे पूछा "...वो कैसे ...?" मैंने कहा "...यूनिट ऑफर आप करिए रेफ़र आरएसएस को कर दीजिये .." उनको शायद कुछ समझ में नहीं आया तो पूछा "...मै समझा नहीं ..." मैंने समझाते हुए कहा"...उनके ही लहजे में उनका पत्ता साफ क्यों नहीं कर देते .."उनकी आँखों मे चमक नहीं आई लेकिन कुछ छिपाते हुए बोले "...आप थोडा स्पष्ट कीजिये .." मैंने स्पष्ट करते हुए कहा "...आप उनको गमालिया या जूतिया दीजिये फिर उंगली आरएसएस की तरफ उठा दीजिये ..." उनको तो जैसे सांप ही सूंघ गया सफाई देते हुए उन्होंने कहा "...दखिये हम कांग्रेसी बड़े ईमानदार लोग हैं ..." मैंने कहा "...चलिए गनीमत है बाला साहेब ठाकरे स्वर्गवासी हो चुके हैं नहीं तो ..." वो और डर गए फिर डरते हुए बोले "...देखिये मेरे ऊपर आप शक मत कीजिये ..." मैंने उनको आश्वासन देते हुए कहा  "...घबराईये मत ये शक मेरे तक ही सीमित रहेगा ..." वो खुश होते हुए शिकायती लहजे में बोले "...आप ही बताईये 3500 करोड़ जैसे घोटाले पर घोटाले हुए मेरा भी कुछ हक बनता है कि नहीं ..." मैंने कहा "...जनता का पैसा ..." बीच में ही बात काटते हुए वो बोले "...अजी छोडिये जनता का पैसा ...खून पसीना चुनाव में  हम बहाते हैं ...अच्छा नमस्कार ..."  ये कहते हुए वो चले गए।