...कांग्रेस को अपना "मेक ओवर" करने के लिए "सोशल नेटवर्किंग" पर "नहीं" आना चाहिए क्योंकि इस पर काम करने के लिए "अतिवादी मनो-अवस्था" की जरूरत है सकारात्मक या नकारात्मक क्योंकि मानव मस्तिष्क "आल या नन" के सिद्धांत पर काम करता है लिहाजा दोनों ही स्थितियां कांग्रेस के लिए बेहद खतरनाक हैं। लिहाजा "मोदी की तर्ज" पर खुद मेक ओवर करने के चक्कर में कांग्रेस अपनी बची - खुची साख भी लुटा बैठेगी, एडवांस मनोविज्ञान के नजरिये से ये तय है ...
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