Monday, 25 February 2013

"हेलीकाप्टर घोटाले" में हवा खाने गयी सीबीआई की टीम सफलता पूर्वक खाली हाथ वापस आ गयी। बड़े उदस थे बेचारे सीबीआई वाले कोई हवाई अड्डे पर स्वागत करने नहीं आया। मैंने एक अधिका(री) से इस पूछा तो कहने लगे "...अरे हम लोग सेतु समुद्रम परियोजना पर काम करने थोड़े न गए थे ..." मैंने कहा "...यात्रा तो सफल रही ...!" उन्होंने कहा "...किसी को तो होना चाहिए था ..." मैंने पूछा "...आपको तो अप्रेशिएशन लेटर मिल ही जाएगा ...!" उन्होंने कहा "...लेकिन कुछ तो होना चाहिए ..." मैंने कहा "...आप तो करेंगे ही ...खाली हाथ लौटे हैं ...फिर भी जाँच रिपोर्ट जमा करेंगे ..." वो बोले "...देखिये हम लोगों ने कोशिश बहुत की थी ..." मैंने कहा "...किसी का पेट खराब हो गया था क्या ..." वो मुस्की मरते हुए बोले "...मामला कोर्ट में चल रहा है ..." मैंने कहा "...यही पता करने इटली जाने के क्या जरूरत थी ..." इसपर वो भड़क कर बोले "...आपका मतलब क्या है ... " मैंने कहा "...इसको पता करने के लिए आपको मंगल ग्रह पर जाना चाहिए था ..."  उन्होंने मुझसे ही पूछ लिया "..उससे क्या होता ...?" मैंने उत्तर देते हुए पूछा "...मुझे क्या पता ..आप बताईये ..!" उन्होंने जवाब दिया "...देखिये वहां जाना जरूरी था ..." मैंने कहा "...ये नौटंकी तो बोफोर्स के समय से ही अन्य घोटालों में भी दिखती है ..." वो गरम हो कर बोले "...ये नौटंकी नहीं है ..." मैंने कहा "...तो क्या दसटंकी है ...." तभी एक खांटी कांग्रेसी आ गए कहने लगे "...देखिये ये सरकार और पार्टी का अंदरूनी मामला है ..." मैंने कहा "...पैसा तो पब्लिक का है ..." उन्होंने कहा "...लेकिन टैक्स तो सरकार लेती है ..." मैंने पूछा "...बदले में पब्लिक को मिलता क्या है ...?" उन्होंने उत्तर देते हुए कहा "...देखिये ये टैक्स है कास्ट नहीं ..." मैंने पूछा "...इसका क्या मतलब है ...?" उन्होंने उत्तर दिया "...कोई मजबूरी नहीं ...?" मैंने कहा "...वोट लेने की भी नहीं ..." उनका सीधा सा उत्तर था "...वो मैनेजमेंट का कमाल होता है ..." मैंने कहा "... ये तो सीधे-सीधे सीनाजोरी है ..." उन्होंने स्पष्ट किया "...देखिये ये टैक्स है न की कीमत, लिहाजा पूरा अधिकार है इसपर ..." मैंने कहा "..जनता ये टैक्स देश चलाने के लिए देती है न कि सरकार चलाने के लिए ..." वो बोले "...अंडरस्टुड होने और लिखे होने में काफी फर्क होता है ..." मैंने फिर कहा "...यानी सारे के सारे घोटाले अंडरस्टुड थे . .." उन्होंने बड़े लापरवाही से कहा "...क्या फर्क पड़ता है ..." मैंने कहा "...क्यों .." उनका सीधा सा प्रश्न मुझसे था "...आपको हैदराबाद ब्लास्ट की खबर है ...?" मैंने कहा "..उसमे भी घोटाला है क्या ...?" उनका सीधा सा उत्तर था "...आपको वो सब देखना चाहिए ..." मेरी जिज्ञासा बढ़ गयी "...मतलब आप चाहते हैं की लोगों की नजर घोटाले से  हट जाए ..." उन्होंने कहा "...देखिये घोटाले -वोटाले ये सब डेली रूटीन जॉब्स हैं ..." मैंने कहा "..और ब्लास्ट भी रूटीन होते जा रहे हैं ..." उन्होंने कहा "...अब क्या करें सारे देश का ध्यान "बेनेफिटेड फर्स्ट फॅमिली" पर आ गया था ..." मैंने कहा "...इसिलिए ब्लास्ट बहुत जरूरी थे ..!" वो बोले "...यही तो मैनेजमेंट है ..." मैंने कहा "...डेमोक्रेसी हट के मैनेजमेंट आ गयी ..!" उन्होंने साफ़ कर दिया "...नहीं ! है तो डेमोक्रेसी ही, मामला सिर्फ अटेंशन मैनेजमेंट का है बस ..."   ये कहते हुए वो चले गए ! कहाँ गए ये शोध का विषय है कांग्रेस की प्रेसीडेंट मैडम की बीमारी की तरह ...

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