बड़े-बड़े उचक्के भी आजकल अपने रेपुटेशन को लेकर खासे चिंतित दिख रहे थे। बड़े दिनों से किसी रहनुमा की तलाश में मारे-मारे फिर रहे थे।चलिए अच्छा हुआ कोई तो उनको अपना रहनुमा मिल ही गया। दिल बात कम से कम अब तो राष्ट्रीय स्तर पर सुने जाने की भरपूर उम्मीद जग ही गयी लिहाजा कम से कम अब तो मीडिया वालों सावधान हो ही जाना चाहिए। बड़े दिनों के बाद कपिल सिब्बल आज अखबारों में दिखे उस चेतावनी के साथ कि उचक्कों की शान ही बढ़ गयी। उनके इसी स्टैंड पर कांग्रेस का सीना कितना चौड़ा हुआ मैंने नापा तो नहीं लेकिन कहने वाले सीधे यही कह रहे हैं कि चौड़ा हुआ है। मैंने खुश हो चुके कांग्रेसी से इस बारे में पूछा तो कहने लगे "...वो मानव संसाधन विकास मंत्री हैं ..." मैंने कहा "...जानकारी देने के लिए धन्यवाद .." उन्होंने मेरा उपहास उड़ाते हुए कहा "...आपको इतनी छोटी सी बात भी नहीं पता !.." मैंने पूछा "...उनके कर्तव्यों में विस्तार हुआ है क्या ..." उन्होंने उत्तर देते हुए कहा "...हम लोगों में फर्क करके राजनीति नहीं करते ...!" मैंने कहा "...मतलब सभी लोग आपके लिए एक सामान हैं ..." उन्होंने कहा "...मानव संसाधन का मतलब यही होना चाहिए ..." मैंने कहा "...मतलब कलमाड़ी, आपकी प्रेसीडेंट मैडम, मनमोहन सिंह वगैरह-वगैरह और अन्ना हजारे आपके लिए एक जैसे ही हैं ...?" वो बोले "...कानून और उसका दायरा सबके लिए एक सामान होता है ..." मैंने कहा "... मतलब ... ?" वो बोले "...सबको उसके दायरे से बहार निकलने का पूरा अवसर मिलना चाहिए ..." मैंने कहा "...लेकिन कभी अफजल गुरु, कसाब या दाउद इब्राहीम ने तो ये कभी नहीं कहा कि मीडिया उनको बदनाम कर रहा है ...?" उन्होंने जवाब दिया "...वो लोग धर्मनिरपेक्ष नहीं थे ..." मैंने फिर पूछा "...मतलब जो लोग सेक्युलर हैं उनको कोई घोटाला, चोरी-डकैती या पाकेटमारी करने की पूरी छूट मिलनी चाहिए ..." वो भड़कते हुए बोले "...मीडिया को अपने हद रहना चाहिए ..." मैंने कहा "...हद तो आप पार कर रहे हैं ..." उन्होंने जवाब दिया "...लगता है हमें कोई और रास्ता अपनाना पड़ेगा ..." मैंने कहा "...वो तो कपिल सिब्बल ने साफ़ कर ही दिया है ...कि कोई और रास्ता अपनाना पड़ेगा ..." वो बोले "...हमें अपना दायरा भी बढ़ाना पड़ेगा ..." मैंने कहा "...इसीलिए तो बड़े-बड़े उचक्कों का भी सीना चौड़ा हो गया है ..." उन्होंने कहा "...उन्हें आप उचक्का कह के बदनाम न करें ..." मैंने कहा "...वो तो अपनी करनी से बदनाम हो रहे हैं ..." उन्होंने मुझसे पूछते हुए कहा "...उनकी करनी का मूल्यांकन करने का अधिकार आपको किसने दिया ..." मैंने सकारात्मक लहजे में पूछा "...समस्या क्या है आपको ..." उन्होंने झल्लाते हुए उत्तर दिया "...आपको क्या पता है एक-एक वोट की कीमत ...!" मैंने कहा "...मतलब आप अपने ऊपर लगे आरोपों को जस्टिफाई करने के लिए चाहते हैं कि कोई आपकी ओर न देखे ..." वो बोले "...देखे लेकिन सीबीआई के नजरिये से ..." इसके बाद एक वो राष्ट्रपति का अभिभाषण सुनने चले गए। मेरे लिए समस्या अब ये है कि सीबीआई का नजरिया मै कहाँ से लाऊं ?
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