बहुत से मित्रों ने मुझे मेसेज भेजा कि मेरा कोई कटाक्ष कांग्रेसी सरकार के इस "हेलीकाप्टर महांघोटाले" पर नहीं आया। मित्रों ये महांघोटाला ऐसा है कि व्यंग और कटाक्ष से कहीं ज्यादा घिनौना इसलिए है कि व्यंग का भी एक स्तर होता है। ऊपर से नीम चढ़ा ये कि हमारे प्रधानमन्त्री महोदय को सवालों के आबरू की चिंता खाए जा रही है वो कुछ बोल देंगे तो पता नहीं किसकी आबरू चली जाएगी सो उनको चुप रहना ही बेहतर लगता है। इस सरकार का इस कदर घिनौनापन कि किसी भी नागरिक का मन न सिर्फ दुःख से भर उठे बल्कि इस हद तक क्रोधित करने वाला है कि इस कटाक्ष करने के बजाय ऐसा लगता है कि पूरी की पूरी कांग्रेस पार्टी को ऊपर से नीचे तक काट कर फेंक देना चाहिए। एक चैनल पर इस पार्टी के प्रवक्ता सत्यव्रत चतुर्वेदी (उनको तो देख के ही ऐसा लगता है कि उनके मुख से असत्य के सिवा कुछ निकलेगा ही नहीं ..वैसे कांग्रेस में सब के सब ऐसे ही हैं) आए थे इसी महाघोटाले के मुद्दे पर बड़ा ही ऊटपटांग तर्क दे रहे थे कि सरकार ने सीबीआई जांच बैठा दी है लिहाजा सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। क्या बात है भारत का शायद ही कोई क्षेत्र ऐसा बचा हो जिसमें इस सरकार ने घोटाला ना किया हो वैसे हमारे शास्त्रों शरीर की बनावट के बारे में कहा कहा गया है "क्षिति जल पावक गगन समीरा, पञ्च तत्व यहि बना शरीरा " घोटालों के सन्दर्भ में यह तथ्य इस सरकार पर अक्षरशः लागू होती है इन्होने न तो क्षिति (जमीन) छोड़ा (जीजा जी, कोयला घोटाला), जल को नहीं छोड़ा (थोरियम घोटाला), पावक (अग्नि) को नहीं छोड़ा (अमेरिका से न्यूक्लियर डील) और समीर यानि वायु को भी नहीं छोड़ा (2 G घोटाला तो जग जाहिर है ही ). कोढ़ में खाज ये कि मूलभूत के अतिरिक्त अंतरिक्ष, अन्य क्षेत्र और सभी कुछ जिसको जहाँ जितना मिला लूट कर घोंट लेने पर उतारू ही दिखता है वरना ऐसा क्या कारण है कि आरटीआई से मांगने पर भी श्रीमति सोनिया गाँधी अपनी आय और आयकर का ब्यौरा नहीं देतीं ? अपंगों की बैसाखी पर भी इस सरकार ने बड़ी शान से सीना चौड़ा करते हुए डाका डाला बदले में करने वाले को पुरस्कार स्वरुप शान से विदेश मंत्रालय मिलता है। यकीन मानिये कनिष्क सिंह जिनका जिनका नाम सी डब्लू जी घोटाले में पहले भी आ चुका है और इस महाघोटाले में भी आ रहा है राहुल गाँधी के बहुत करीबी भी हैं बहुत हद तक संभव है कि बहत कुछ हड़प लेने के बावजूद उनको भी पुरस्कार स्वरुप बहुत कुछ मिलेगा ही। सीबीआई से जांच का मतलब सीधा सा यही है कि किसी ने यदि किसी की दाएं हाथ से हत्या कर दी तो हत्यारा यह तर्क दे कर बच रहा है कि मै बाएँ हाथ से जाँच करा लेता हूँ देखियेगा दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। वैसे जब कांग्रेस की इमानदारी पर मुझे किसी मजे हुए राजनीतिज्ञ द्वारा हुए दिए हुए वक्तव्य की याद आती है उनका कहना था "...जब कांग्रेस इमानदारी की बात करती है तो ऐसा लगता है जैसे कोई हिजड़ा कामशास्त्र समझा रहा हो ..."
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