Monday, 11 February 2013

मलमल के झकास सफेद कुर्ता-पायजामा साथ में "अन्ना" टोपी पहने एक खांटी कांग्रेसी कुर्सी से चिपके मंद-मंद मुस्कुराते हुए अपना संभवतः भविष्य देख रहे थे ...मैंने तभी उनसे पुछा "...किसी और को भी फांसी पर चढ़ाना है क्या ..?" वो अचम्भित होते हुए बोले "... अरे नहीं नहीं ...!" मैंने कहा "...तो हो गया काम ..." वो बोले "...काम तो हो गया ..." मैंने कहा "...बड़ा सुकून महसूस कर रहे हैं .." उन्होंने कहा "...असली सुकून तो तब मिलेगा जब असली आतंकवादी सूली पर चढ़ेंगे ...""..तो क्या अजमल और अफजल असली नहीं थे ..?" मैंने  जिज्ञासावश पूछा तो वो कहने लगे "..पहले पी. एम. महोदय और मैडम प्रसीडेंट बहुत आंसू बहा चुकी हैं .." मैंने कहा "...मतलब अब हिन्दुओं की बारी है ...!" उनकी मुस्कराहट बढ़ गयी वो बोले "...कोशिश जारी है ...आखिर प्रसीडेंट मैडम को भी तो खुश करना है ..." मैंने कहा "...मतलब आपकी प्रेसीडेंट मैडम खुश नहीं हैं इस फांसी से ..." उन्होंने कहा "...आखिर मामला संतुलित भी तो होना चाहिए ..." मैंने फिर पूछा "...जब आपकी प्रेसीडेंट मैडम खुश नहीं है तो फिर आपका ये गेट अप ..." उन्होंने कहा "...ये अफजल उसके पहले अजमल ..." मैंने बीच में ही टोका "...इसीलिए ये झकास सफ़ेद मलमल ..." वो हँसते हुए बोले "...भाजपा को इस पर राजनीति नहीं करनी चाहिए .." मैंने पूछा " ...तो फिर उनको क्या करनी चाहिए ...आपके गृहमंत्री ने ये नहीं कहा ..." वो बोले "...देखिये ये गाँधी टोपी बदल कर अन्ना टोपी हो गयी ..." मैंने पूछा "...भरोसा दिलाने के लिए ये पर्याप्त कैसे है ...?" उन्होंने उत्तर दिया "...अन्ना जी ने ही भरोसा दिया था राहुल गाँधी का भावुक भाषण सुन कर ..." मैंने कहा "...लेकिन भाजपा वाले थोड़ा भी लिहाज नहीं कर रहे क्यों ..." उन्होंने प्रतिउत्तर में कहा "...इसीलिए तो हिन्दू आतंकवादी हो गए हैं ...बुजुर्गों का लिहाज भी भूल गए हैं ..." मैंने फिर पूछा "...भाजपा को करना क्या चाहिए ...?" वो बोले "...आतंकवाद एक सामान्य समस्या है जिससे हमारे साथ-साथ पाकिस्तान भी जूझ रहा है ..." मैंने बीच में ही टोका "...तो करना क्या चाहिए भाजपा को .." वो तपाक से बोले "...लिहाज करना चाहिए और क्या ..." मैंने फिर पूछा "...वो लोग तो ये सब भूल चुके हैं ...फिर ..." वो बोले "...देखिये मामला उतना गंभीर नहीं है जितना कि दिखाया जाता है ..." मैंने पूछा "...भाजपा के इस गलती पर आप क्या सजा देंगे उनको .." उन्होंने उत्तर देते हुए कहा "...उनका एनडीए टूट रहा है ...!" मैंने बीच में ही कहा "...आपका कहना है कि वो अपनी करनी का फल भुगत रहे हैं ...!" वो बोले "...नितीश कुमार भले ही एनडीए में हों लेकिन हैं तो हमारी ही बिरादरी के ...!" मैंने बीच में ही टोका "...तो .." वो बोले "...टपका कैसे दिया जाता है उनको अच्छी तरह पता है ..." मैंने कहा "...आपका आत्मविश्वास बहुत बढ़ गया है ...!" वो हँसते हुए बोले "...यही तो राजनीति है कब किसको सूली पर चढ़ाना है ...कब किसको सूली से उतारना है ...सब पता है ..." मैंने कहा "...इसमें यमराज भी आपकी मदद कर रहे है अजमल के समय डेंगू फैला था और अफजल के समय स्वाइन फ्लू ..." उन्होंने कहा "..ये तो  इत्तेफाक है ..." मैंने फिर कहा "...लेकिन कानून, देश , सिस्टम भी तो कोई चीज है .." काफी देर तक वो कुछ नहीं बोले कुर्सी से चिपके ही रहे ...शायद अब वास्तव में उनको बहुगुणा के १९७४ का चिपको आन्दोलन याद आ रहा था।

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