इटली ने "हेलीकाप्टर घोटाले" का कोई भी कागज़-पत्तर देने से साफ़ मना कर दिया तो चारो ओर हल्ला हो गया। भारत सरकार की asafal के रूप में इसे देखा जा रहा है। मुझे पता नहीं क्यों बहुत आश्चर्य हो रहा है, सीधी सी बात है इसमें हल्ला मचने वाली बात कौन सी है अंततः मामले की जांच सीबीआई कर रही है। मुझे तो यही समझ में नहीं आता की सीबीआई वाले कागज़ मांगने ही क्यों गए ? मैंने मुह छुपा कर कोने में बैठे एक खांटी कांग्रेसी से पूछा तो वे अपना मुह और छुपाने लगे तो मैंने उन्हें संबोधित किया तो कहने लगे "...देखिये मै कभी हेलीकाप्टर पर न बैठा हूँ और न कभी बैठूँगा ..." मैंने खीझ दिखाते हुए कहा "..तो कर क्या रहे है आप कांग्रेस में रह के ...?" उन्होंने कहा "...देखिये मै बहुत ईमानदार हूँ ..." मैंने कहा "..तो इसका क्या मतलब आप घोटाले पर घोटाला करेंगे .. ?" उन्होंने कहा "...मनमोहन सिंह और ए . के . एंटोनी मिस्टर क्लीन हैं बहुत ईमानदार है ..." मैंने कहा "..मतलब इटली का आरोप सही है ..." वो रिरियाते हुए बोले "...ये मै कैसे कह सकता हूँ मामला हाई कमान का है ..." मैंने पूछा "...आप अपना मुह क्यों छुपा रहे थे ...?" वो बोले "...मनमोहन सिंह बार-बार आबरू की बात करते हैं ...मेरे पास वो है नहीं ...ले दे के एक मुह ही बचता है .." मैंने कहा "...लेकिन बाक़ी लोग तो अपना मुह नहीं छुपा रहे हैं ..?" उलटे उन्होंने मुझसे पूछा "...आपका मतलब ...?" मैंने कहा "...आपकी प्रेसीडेंट मैडम ने तो बड़े धूम-धडाके से एएमयू के कोन्वोकेशन में भाषण दिया .." उन्होंने कहा "...देखिये इसमें मै क्या कर सकता हूँ ...?" मैंने कहा "...मुह छुपा के बात करने के बजाय सीधे मुह बात कीजिये ...!" वे कहने लगे "...देखिये बाकी लोगों की तरह मेरे पिता जी ने बलिदान दिया, माता जी ने बलिदान दिया ...बहुत कुछ किया इस देश के लिए ...खानदानी और खांटी कांग्रेसी हूँ ..." मैंने कहा "...इसी लिए अब आप लोग देश की बलि लेना चाहते हैं .." उन्होंने कहा "...मुझे कुछ मत कहिये ..." मैंने कहा "...तो आप कांग्रेस में ही रहेंगे न ..." वो बोले "...सीबीआई मामले की जाँच कर रही है ..." मैंने कहा "...वो तो कर रही है फिर .." उनका जवाब था "...फिर मतलब जब घोटाला हुआ ही नही तो कांग्रेस क्यों छोड़ेंगे हम ...?" मैंने आश्चर्य से पूछा "...जांच से पहले ही आप ये कैसे कह सकते हैं ...? उन्होंने जवाब दिया "...सीबीआई की निष्ठां पर हमें पूरा-पूरा भरोसा है ..." मैंने फिर पूछा "...सीबीआई तो यही पता नहीं कर पाई कि कागज-पत्तर के लेन-देन के लिए ये सही समय है भी या नहीं ..." उनका जवाब था "...अब आपसे वो ट्रेनिंग थोड़े ही न लेंगे ..." मैंने कहा "...मामला इटली की अदालत में है ये छोटी सी बात भी सीबीआई पता नहीं कर पाई ..." वो गुस्से में बोले "...देखिये उनका वहां जाना जरूरी था ..." मैंने कहा "...अब या तो सीबीआई बकलोल है या फिर देश की जनता ..." वो बोले "...कुछ तो करते हुए दिखना या दिखाना जरूरी था ही .." मैंने बोला "...ये तो स्किल का मामला है ..." उन्होंने कहा "...स्किल का नहीं स्टैंड का मामला है ..." मैंने पूछा "...वो कैसे ...?" उन्होंने उत्तर दिया "...हमें खुद को ऊपर ही रखना जरूरी है ... " मैंने कहा "...सेना के जहाजों की सीटों का फोम उखड गया था क्या ..." वो बोले "...आराम मिलेगा तभी तो ऊपर रहेंगे ...!" मैंने कहा "...मतलब अब आप भी मुह नहीं छुपाएंगे ..." वो बोले "...देखिये मेरा मुह छुपाना पर्सनल मामला था ..." मैंने तपाक से बीच में ही टोका "...ये ...?" वो बोले "...अंतरात्मा की आवाज पर पार्टी पर मेरा स्टैंड ..." मेरा दिमाग कन्फ्यूज़ करने लगा लेकिन मुझे विश्वास हो चला था इस समय एक अर्थशास्त्री बिल्कुल कुल नए अर्थशास्त्र पर काम कर रहा है जिसे "घोटालों का अर्थशास्त्र" कहा जा सकता है जिसमे सबकी भागीदारी सुनिश्चित होनी जरूरी है चाहे जैसे भी मुह छुपा के या सीनाजोरी करके ...
No comments:
Post a Comment