पाकिस्तान में सपने बड़े सस्ते बिकते हैं पता नहीं किस गली में अमेरिका के नाक में उंगली करने का सपना मिले या फिर किस गली कश्मीर हडपने का सपना मिल जाए वगैरह वगैरह । वस्तुतः पाकिस्तान में सपनो का व्यापक व्यापार जिया-उल-हक़ ने 80 के उत्तरार्ध में शुरू किया था नतीजा ये हुआ कि आज पाकिस्तान खुद उस कुत्ते की जिन्दगी जीने को मजबूर है जो कहीं का भी नहीं रहा, लेकिन हमारे कांग्रेसी भाईयों को पाकिस्तान पर बहुत दया आती है। उनके हर सपने को पूरा करने की शपथ खाए बैठे हैं पूरा कर के रहेंगे। पाकिस्तान की ही अंधी गलियों में बिकने वाले सपनो की दुकान से 26.11 के दोषी अजमल कसाब और उसकी टीम सपना ही खरीदने गयी थी ठीक उसकी कीमत की भरपाई भी करने की कोशिश भरसक कांग्रेसियों ने की लेकिन डेंगू ने सारा खेल बिगाड़ दिया। मैंने कांग्रेसी से पूछा तो वे मानवता की दुहाई देते हुए बोले " ...पाकिस्तान हामारा पड़ोसी है .." मैंने पूछा "...ये आकाशवाणी आपको कब सुनाई दी ...?" वो कुछ नहीं बोले। ऐसे ही सपनों के पाकिस्तानी खरीदार से पूछा "...कहाँ तक पढ़े हो ...?" वो बोला "...ए . के . 47 चलाना चाहता हूँ .." मैंने फिर पूछा "...वो ठीक है लेकिन क्यों ..?" वो बोला "...मेरे दोस्तों के पास कलाश्निकोव है ...वो ले कर घुमते भी हैं .." मैंने कहा "...तो तुम उन पर रौब ज़माना चाहते हो ..!" वो बोला "...हाँ ! रौब तो जमाऊंगा लेकिन उसके साथ-साथ बड़ा आदमी भी बनना है मुझे ..." मैंने पूछा "...क्या मतलब है तुम्हारा ...?" कहने लगा "...इंडिया जाऊंगा और वहाँ का पी .एम . बनूँगा ..." मुझे बहुत आश्चर्य हुआ पूछा "...तुमको इतना भरोसा कैसे है ...?" उसने जवाब दिया "...यहाँ हाफिज सईद जनाब जैसे ऐसा ही कहते है ...!" मैंने उत्कंठा से पूछा "...थोड़ा साफ साफ बताओ .." उसने कहा "...वो लोग कहते है पाकिस्तान में कुत्तों की जिन्दगी से निजात पानी है तो इंडिया चले जाओ ...जन्नत में पहुँच जाओगे ..." मैंने कहा "... इसीलिए ए . के . 47 लेना चाहते हो ...?" उसने कहा " ... वहां के होम मिनिस्टर ने कहा है कि सारे हिन्दू आतंकवादी हो चुके हैं इसलिए ..." मैंने फिर पूछा "...पी . एम . कैसे बनोगे ...?" उसने कहा "...मेरी जैसे लोगों की मदद करने के लिए वहां कांग्रेस तो है ही ...!" मैंने फिर पूछा "...तुमको इतना कॉन्फिडेंस कैसे है ..?" उसने कहा "...आपके शकील अहमद ने कहा की आडवानी जी इंडिया पाकिस्तान से सत्ता के लिए गए ...!" मैंने कहा "...लेकिन पी .एम . तो नहीं बन पाए ...!" उन्सने तपाक से कहा "...मनमोहन सिंह तो बन गए ...इन्दर कुमार गुजराल भी बन ही गए थे ...लिहाजा हम भी बन ही जाएँगे..."...लेकिन जाओगे कैसे ...?" मैंने पूछा तो उसने उत्तर देते हुए कहा "...जैसे और लोग जाते हैं ..." मैंने कहा "...लेकिन ऐसे तो लोग मारे भी जाते हैं ..." उसने बड़ी बेबाकी से जवाब दिया "...जब इंडियन सोल्जर के साथ ऐसी बेरहमी होने पर कांग्रेस गवर्नमेंट ने पाकिस्तान के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया तो मेरा भी कुछ नहीं बिगड़ेगा ..इस बात की गारंटी हाफिज सईद लेता है ...वैसे भी इंडिया में उनको आजकल बड़ी इज्जत मिल रही है ..." मेरे सामने चुप हो जाने के सिवा कोई और चारा ही नहीं था।
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