"हेलीकाप्टर घोटाले" में हवा खाने गयी सीबीआई की टीम सफलता पूर्वक खाली हाथ वापस आ गयी। बड़े उदस थे बेचारे सीबीआई वाले कोई हवाई अड्डे पर स्वागत करने नहीं आया। मैंने एक अधिका(री) से इस पूछा तो कहने लगे "...अरे हम लोग सेतु समुद्रम परियोजना पर काम करने थोड़े न गए थे ..." मैंने कहा "...यात्रा तो सफल रही ...!" उन्होंने कहा "...किसी को तो होना चाहिए था ..." मैंने पूछा "...आपको तो अप्रेशिएशन लेटर मिल ही जाएगा ...!" उन्होंने कहा "...लेकिन कुछ तो होना चाहिए ..." मैंने कहा "...आप तो करेंगे ही ...खाली हाथ लौटे हैं ...फिर भी जाँच रिपोर्ट जमा करेंगे ..." वो बोले "...देखिये हम लोगों ने कोशिश बहुत की थी ..." मैंने कहा "...किसी का पेट खराब हो गया था क्या ..." वो मुस्की मरते हुए बोले "...मामला कोर्ट में चल रहा है ..." मैंने कहा "...यही पता करने इटली जाने के क्या जरूरत थी ..." इसपर वो भड़क कर बोले "...आपका मतलब क्या है ... " मैंने कहा "...इसको पता करने के लिए आपको मंगल ग्रह पर जाना चाहिए था ..." उन्होंने मुझसे ही पूछ लिया "..उससे क्या होता ...?" मैंने उत्तर देते हुए पूछा "...मुझे क्या पता ..आप बताईये ..!" उन्होंने जवाब दिया "...देखिये वहां जाना जरूरी था ..." मैंने कहा "...ये नौटंकी तो बोफोर्स के समय से ही अन्य घोटालों में भी दिखती है ..." वो गरम हो कर बोले "...ये नौटंकी नहीं है ..." मैंने कहा "...तो क्या दसटंकी है ...." तभी एक खांटी कांग्रेसी आ गए कहने लगे "...देखिये ये सरकार और पार्टी का अंदरूनी मामला है ..." मैंने कहा "...पैसा तो पब्लिक का है ..." उन्होंने कहा "...लेकिन टैक्स तो सरकार लेती है ..." मैंने पूछा "...बदले में पब्लिक को मिलता क्या है ...?" उन्होंने उत्तर देते हुए कहा "...देखिये ये टैक्स है कास्ट नहीं ..." मैंने पूछा "...इसका क्या मतलब है ...?" उन्होंने उत्तर दिया "...कोई मजबूरी नहीं ...?" मैंने कहा "...वोट लेने की भी नहीं ..." उनका सीधा सा उत्तर था "...वो मैनेजमेंट का कमाल होता है ..." मैंने कहा "... ये तो सीधे-सीधे सीनाजोरी है ..." उन्होंने स्पष्ट किया "...देखिये ये टैक्स है न की कीमत, लिहाजा पूरा अधिकार है इसपर ..." मैंने कहा "..जनता ये टैक्स देश चलाने के लिए देती है न कि सरकार चलाने के लिए ..." वो बोले "...अंडरस्टुड होने और लिखे होने में काफी फर्क होता है ..." मैंने फिर कहा "...यानी सारे के सारे घोटाले अंडरस्टुड थे . .." उन्होंने बड़े लापरवाही से कहा "...क्या फर्क पड़ता है ..." मैंने कहा "...क्यों .." उनका सीधा सा प्रश्न मुझसे था "...आपको हैदराबाद ब्लास्ट की खबर है ...?" मैंने कहा "..उसमे भी घोटाला है क्या ...?" उनका सीधा सा उत्तर था "...आपको वो सब देखना चाहिए ..." मेरी जिज्ञासा बढ़ गयी "...मतलब आप चाहते हैं की लोगों की नजर घोटाले से हट जाए ..." उन्होंने कहा "...देखिये घोटाले -वोटाले ये सब डेली रूटीन जॉब्स हैं ..." मैंने कहा "..और ब्लास्ट भी रूटीन होते जा रहे हैं ..." उन्होंने कहा "...अब क्या करें सारे देश का ध्यान "बेनेफिटेड फर्स्ट फॅमिली" पर आ गया था ..." मैंने कहा "...इसिलिए ब्लास्ट बहुत जरूरी थे ..!" वो बोले "...यही तो मैनेजमेंट है ..." मैंने कहा "...डेमोक्रेसी हट के मैनेजमेंट आ गयी ..!" उन्होंने साफ़ कर दिया "...नहीं ! है तो डेमोक्रेसी ही, मामला सिर्फ अटेंशन मैनेजमेंट का है बस ..." ये कहते हुए वो चले गए ! कहाँ गए ये शोध का विषय है कांग्रेस की प्रेसीडेंट मैडम की बीमारी की तरह ...
आनंद का जुगाड़ मने Pleasure Technology जैसे Talking Crows Sitting on Buffalo's Back
Monday, 25 February 2013
Thursday, 21 February 2013
बड़े-बड़े उचक्के भी आजकल अपने रेपुटेशन को लेकर खासे चिंतित दिख रहे थे। बड़े दिनों से किसी रहनुमा की तलाश में मारे-मारे फिर रहे थे।चलिए अच्छा हुआ कोई तो उनको अपना रहनुमा मिल ही गया। दिल बात कम से कम अब तो राष्ट्रीय स्तर पर सुने जाने की भरपूर उम्मीद जग ही गयी लिहाजा कम से कम अब तो मीडिया वालों सावधान हो ही जाना चाहिए। बड़े दिनों के बाद कपिल सिब्बल आज अखबारों में दिखे उस चेतावनी के साथ कि उचक्कों की शान ही बढ़ गयी। उनके इसी स्टैंड पर कांग्रेस का सीना कितना चौड़ा हुआ मैंने नापा तो नहीं लेकिन कहने वाले सीधे यही कह रहे हैं कि चौड़ा हुआ है। मैंने खुश हो चुके कांग्रेसी से इस बारे में पूछा तो कहने लगे "...वो मानव संसाधन विकास मंत्री हैं ..." मैंने कहा "...जानकारी देने के लिए धन्यवाद .." उन्होंने मेरा उपहास उड़ाते हुए कहा "...आपको इतनी छोटी सी बात भी नहीं पता !.." मैंने पूछा "...उनके कर्तव्यों में विस्तार हुआ है क्या ..." उन्होंने उत्तर देते हुए कहा "...हम लोगों में फर्क करके राजनीति नहीं करते ...!" मैंने कहा "...मतलब सभी लोग आपके लिए एक सामान हैं ..." उन्होंने कहा "...मानव संसाधन का मतलब यही होना चाहिए ..." मैंने कहा "...मतलब कलमाड़ी, आपकी प्रेसीडेंट मैडम, मनमोहन सिंह वगैरह-वगैरह और अन्ना हजारे आपके लिए एक जैसे ही हैं ...?" वो बोले "...कानून और उसका दायरा सबके लिए एक सामान होता है ..." मैंने कहा "... मतलब ... ?" वो बोले "...सबको उसके दायरे से बहार निकलने का पूरा अवसर मिलना चाहिए ..." मैंने कहा "...लेकिन कभी अफजल गुरु, कसाब या दाउद इब्राहीम ने तो ये कभी नहीं कहा कि मीडिया उनको बदनाम कर रहा है ...?" उन्होंने जवाब दिया "...वो लोग धर्मनिरपेक्ष नहीं थे ..." मैंने फिर पूछा "...मतलब जो लोग सेक्युलर हैं उनको कोई घोटाला, चोरी-डकैती या पाकेटमारी करने की पूरी छूट मिलनी चाहिए ..." वो भड़कते हुए बोले "...मीडिया को अपने हद रहना चाहिए ..." मैंने कहा "...हद तो आप पार कर रहे हैं ..." उन्होंने जवाब दिया "...लगता है हमें कोई और रास्ता अपनाना पड़ेगा ..." मैंने कहा "...वो तो कपिल सिब्बल ने साफ़ कर ही दिया है ...कि कोई और रास्ता अपनाना पड़ेगा ..." वो बोले "...हमें अपना दायरा भी बढ़ाना पड़ेगा ..." मैंने कहा "...इसीलिए तो बड़े-बड़े उचक्कों का भी सीना चौड़ा हो गया है ..." उन्होंने कहा "...उन्हें आप उचक्का कह के बदनाम न करें ..." मैंने कहा "...वो तो अपनी करनी से बदनाम हो रहे हैं ..." उन्होंने मुझसे पूछते हुए कहा "...उनकी करनी का मूल्यांकन करने का अधिकार आपको किसने दिया ..." मैंने सकारात्मक लहजे में पूछा "...समस्या क्या है आपको ..." उन्होंने झल्लाते हुए उत्तर दिया "...आपको क्या पता है एक-एक वोट की कीमत ...!" मैंने कहा "...मतलब आप अपने ऊपर लगे आरोपों को जस्टिफाई करने के लिए चाहते हैं कि कोई आपकी ओर न देखे ..." वो बोले "...देखे लेकिन सीबीआई के नजरिये से ..." इसके बाद एक वो राष्ट्रपति का अभिभाषण सुनने चले गए। मेरे लिए समस्या अब ये है कि सीबीआई का नजरिया मै कहाँ से लाऊं ?
Monday, 18 February 2013
हमारे गोरखपुर शहर की दो बदनाम चीजें मशहूर हैं एक शहर का सोमवारी जाम दूसरे डाक्टरों के दलाल के रूप में रिक्शे वाले। खैर जाम तो जाम है हर कदम पर खैरमकदम करता मिलता है इस उपहार के साथ कि इस जाम में बड़े-बड़े बकलोलों को भी ज्ञानी होने का दर्जा मिल जाए। ऐसे ही मैंने एक ज्ञानी से पूछा तो कहने लगे "..जाम में अच्छा टाइम पास हो जाता है .." मैंने कहा "...राष्ट्रीय परिदृश्य पर कुछ दिखता है क्या ...?" वो बोले "..इसीलिए तो सरकार जाम लगने नहीं देती .." वो मुझे नमस्कार करके आगे बढ़ गए। मैंने एक रिक्शे वाले को रोका तो उसने सीधे मुझसे पूछा "...क्या हुआ है ...?" मैंने कहा "...कुछ नहीं .." उसने जबरदस्ती पूछा "...अरे आप घबराईये नहीं ...साफ-साफ बताईये .." मुझे गुस्सा आया मैंने उसे डांटते हुए कहा "...मुझे गोलघर जाना है चलोगे ..." वो बोला "..काहे नहीं चलेंगे ...लेकिन किस डॉक्टर को दिखाना है ..." मुझे फिर रहा नहीं गया "...बकवास बंद करो ...चलना है तो बोलो ... " उसने कहा "...बैठिये .." मेरे बैठने के बाद वो चलने लगा तभी मुझे किसी की मिस्ड कॉल आई तो मेरा गुस्सा बढ़ गया तो रिक्शेवाला बोला "...लगता है आपको बीपी की प्रॉब्लम है .." मैंने कहा "...तो तू क्या करेगा ..." उसने कहा "...मै आपको बढ़िया डॉक्टर के यहाँ ले चलता हूँ ..." मैंने कहा "...तो तू दलाल है क्या उस डॉक्टर का ..." उसने बड़ी गैरत से कहा "...देखिये हम लोगों की भी इज्जत है ..." मैंने कहा "...सीधे-सीधे बता कहना क्या चाहता है ...?" वो बोला "...हमको ऐसा-वैसा मत समझिये ..हमारा बॉस कोई कांग्रेस का नेता नहीं है ..." मुझे लग गया कि "जाम का ज्ञान" इसे भी अच्छा खासा मिला हुआ है सो मैंने पूछा "...कांग्रेस का नेता नहीं है तो क्या है वो ..." वो बोला "...समाजसेवी है ..." मैंने फिर पूछा "...था तो कांग्रेसी ही न ..." वो बोला "...ये मेरा बिज़नेस है भले ही लोग इसे दलाली कहते हैं ..." मैंने कहा "...बड़ा स्वाभिमान है तुझे ..." उसने कहा "...मुझे मार्कंडेय काटजू मत समझिये ..." मैंने कहा "...कब आए थे वो ..." वो बोला "...मै आधार कार्ड देख कर सवारी नहीं बैठाता ..." मैंने आशंका जाहिर करते हुए पूछा "...मतलब तुमने दलाली की ट्रेनिंग बिना परिचय के उनको दे दी ..." वो बोला "...गोरखपुर में बहुत से काम बिना नाव-गाँव पूछे होता है ..." मैंने कहा "...वो तो सीधे-सीधे कांग्रेस की दलाली कर रहे हैं ..." वो बोला "... इससे अच्छा बिज़नेस इस फील्ड में और क्या हो सकता है ...?" मैंने कहा "...सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश रह चुके है ..!" उसने कहा "...ये तो इस शहर का एक्सपरटाईज़ है कि ऐसे ऐसे लोग भी बहुत कुछ सीखने यहाँ चले आते हैं ..." मैंने उसे उकसाते हुए पूछा "...तू ही किसी पीसीआई का प्रेसीडेंट या ऐसा कुछ क्यों नहीं बन जाता ...?" उसने बड़े शान्ति से उत्तर दिया "...मुझे जो पसंद है वो ये पार्टी नहीं दे सकती ..." मैंने पूछा "...क्या चाहिए तुझे "...वो बोला "...काले धन में हिस्सा .." मैंने पूछा "...कोई अप्रोच किया इसके लिए ..." वो कुछ नहीं बोल रहा था ...मेरे बार-बार पूछने पर भी वो कुछ नहीं बोला तो मुझे भी चुप हो जाना पड़ा। थोड़ी ही देर में मेरे उतरने का स्थान आ गया ...पैसे देते समय वो कमीशन को लेकर भुनभुना रहा था।
Sunday, 17 February 2013
इटली ने "हेलीकाप्टर घोटाले" का कोई भी कागज़-पत्तर देने से साफ़ मना कर दिया तो चारो ओर हल्ला हो गया। भारत सरकार की asafal के रूप में इसे देखा जा रहा है। मुझे पता नहीं क्यों बहुत आश्चर्य हो रहा है, सीधी सी बात है इसमें हल्ला मचने वाली बात कौन सी है अंततः मामले की जांच सीबीआई कर रही है। मुझे तो यही समझ में नहीं आता की सीबीआई वाले कागज़ मांगने ही क्यों गए ? मैंने मुह छुपा कर कोने में बैठे एक खांटी कांग्रेसी से पूछा तो वे अपना मुह और छुपाने लगे तो मैंने उन्हें संबोधित किया तो कहने लगे "...देखिये मै कभी हेलीकाप्टर पर न बैठा हूँ और न कभी बैठूँगा ..." मैंने खीझ दिखाते हुए कहा "..तो कर क्या रहे है आप कांग्रेस में रह के ...?" उन्होंने कहा "...देखिये मै बहुत ईमानदार हूँ ..." मैंने कहा "..तो इसका क्या मतलब आप घोटाले पर घोटाला करेंगे .. ?" उन्होंने कहा "...मनमोहन सिंह और ए . के . एंटोनी मिस्टर क्लीन हैं बहुत ईमानदार है ..." मैंने कहा "..मतलब इटली का आरोप सही है ..." वो रिरियाते हुए बोले "...ये मै कैसे कह सकता हूँ मामला हाई कमान का है ..." मैंने पूछा "...आप अपना मुह क्यों छुपा रहे थे ...?" वो बोले "...मनमोहन सिंह बार-बार आबरू की बात करते हैं ...मेरे पास वो है नहीं ...ले दे के एक मुह ही बचता है .." मैंने कहा "...लेकिन बाक़ी लोग तो अपना मुह नहीं छुपा रहे हैं ..?" उलटे उन्होंने मुझसे पूछा "...आपका मतलब ...?" मैंने कहा "...आपकी प्रेसीडेंट मैडम ने तो बड़े धूम-धडाके से एएमयू के कोन्वोकेशन में भाषण दिया .." उन्होंने कहा "...देखिये इसमें मै क्या कर सकता हूँ ...?" मैंने कहा "...मुह छुपा के बात करने के बजाय सीधे मुह बात कीजिये ...!" वे कहने लगे "...देखिये बाकी लोगों की तरह मेरे पिता जी ने बलिदान दिया, माता जी ने बलिदान दिया ...बहुत कुछ किया इस देश के लिए ...खानदानी और खांटी कांग्रेसी हूँ ..." मैंने कहा "...इसी लिए अब आप लोग देश की बलि लेना चाहते हैं .." उन्होंने कहा "...मुझे कुछ मत कहिये ..." मैंने कहा "...तो आप कांग्रेस में ही रहेंगे न ..." वो बोले "...सीबीआई मामले की जाँच कर रही है ..." मैंने कहा "...वो तो कर रही है फिर .." उनका जवाब था "...फिर मतलब जब घोटाला हुआ ही नही तो कांग्रेस क्यों छोड़ेंगे हम ...?" मैंने आश्चर्य से पूछा "...जांच से पहले ही आप ये कैसे कह सकते हैं ...? उन्होंने जवाब दिया "...सीबीआई की निष्ठां पर हमें पूरा-पूरा भरोसा है ..." मैंने फिर पूछा "...सीबीआई तो यही पता नहीं कर पाई कि कागज-पत्तर के लेन-देन के लिए ये सही समय है भी या नहीं ..." उनका जवाब था "...अब आपसे वो ट्रेनिंग थोड़े ही न लेंगे ..." मैंने कहा "...मामला इटली की अदालत में है ये छोटी सी बात भी सीबीआई पता नहीं कर पाई ..." वो गुस्से में बोले "...देखिये उनका वहां जाना जरूरी था ..." मैंने कहा "...अब या तो सीबीआई बकलोल है या फिर देश की जनता ..." वो बोले "...कुछ तो करते हुए दिखना या दिखाना जरूरी था ही .." मैंने बोला "...ये तो स्किल का मामला है ..." उन्होंने कहा "...स्किल का नहीं स्टैंड का मामला है ..." मैंने पूछा "...वो कैसे ...?" उन्होंने उत्तर दिया "...हमें खुद को ऊपर ही रखना जरूरी है ... " मैंने कहा "...सेना के जहाजों की सीटों का फोम उखड गया था क्या ..." वो बोले "...आराम मिलेगा तभी तो ऊपर रहेंगे ...!" मैंने कहा "...मतलब अब आप भी मुह नहीं छुपाएंगे ..." वो बोले "...देखिये मेरा मुह छुपाना पर्सनल मामला था ..." मैंने तपाक से बीच में ही टोका "...ये ...?" वो बोले "...अंतरात्मा की आवाज पर पार्टी पर मेरा स्टैंड ..." मेरा दिमाग कन्फ्यूज़ करने लगा लेकिन मुझे विश्वास हो चला था इस समय एक अर्थशास्त्री बिल्कुल कुल नए अर्थशास्त्र पर काम कर रहा है जिसे "घोटालों का अर्थशास्त्र" कहा जा सकता है जिसमे सबकी भागीदारी सुनिश्चित होनी जरूरी है चाहे जैसे भी मुह छुपा के या सीनाजोरी करके ...
Saturday, 16 February 2013
बहुत से मित्रों ने मुझे मेसेज भेजा कि मेरा कोई कटाक्ष कांग्रेसी सरकार के इस "हेलीकाप्टर महांघोटाले" पर नहीं आया। मित्रों ये महांघोटाला ऐसा है कि व्यंग और कटाक्ष से कहीं ज्यादा घिनौना इसलिए है कि व्यंग का भी एक स्तर होता है। ऊपर से नीम चढ़ा ये कि हमारे प्रधानमन्त्री महोदय को सवालों के आबरू की चिंता खाए जा रही है वो कुछ बोल देंगे तो पता नहीं किसकी आबरू चली जाएगी सो उनको चुप रहना ही बेहतर लगता है। इस सरकार का इस कदर घिनौनापन कि किसी भी नागरिक का मन न सिर्फ दुःख से भर उठे बल्कि इस हद तक क्रोधित करने वाला है कि इस कटाक्ष करने के बजाय ऐसा लगता है कि पूरी की पूरी कांग्रेस पार्टी को ऊपर से नीचे तक काट कर फेंक देना चाहिए। एक चैनल पर इस पार्टी के प्रवक्ता सत्यव्रत चतुर्वेदी (उनको तो देख के ही ऐसा लगता है कि उनके मुख से असत्य के सिवा कुछ निकलेगा ही नहीं ..वैसे कांग्रेस में सब के सब ऐसे ही हैं) आए थे इसी महाघोटाले के मुद्दे पर बड़ा ही ऊटपटांग तर्क दे रहे थे कि सरकार ने सीबीआई जांच बैठा दी है लिहाजा सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। क्या बात है भारत का शायद ही कोई क्षेत्र ऐसा बचा हो जिसमें इस सरकार ने घोटाला ना किया हो वैसे हमारे शास्त्रों शरीर की बनावट के बारे में कहा कहा गया है "क्षिति जल पावक गगन समीरा, पञ्च तत्व यहि बना शरीरा " घोटालों के सन्दर्भ में यह तथ्य इस सरकार पर अक्षरशः लागू होती है इन्होने न तो क्षिति (जमीन) छोड़ा (जीजा जी, कोयला घोटाला), जल को नहीं छोड़ा (थोरियम घोटाला), पावक (अग्नि) को नहीं छोड़ा (अमेरिका से न्यूक्लियर डील) और समीर यानि वायु को भी नहीं छोड़ा (2 G घोटाला तो जग जाहिर है ही ). कोढ़ में खाज ये कि मूलभूत के अतिरिक्त अंतरिक्ष, अन्य क्षेत्र और सभी कुछ जिसको जहाँ जितना मिला लूट कर घोंट लेने पर उतारू ही दिखता है वरना ऐसा क्या कारण है कि आरटीआई से मांगने पर भी श्रीमति सोनिया गाँधी अपनी आय और आयकर का ब्यौरा नहीं देतीं ? अपंगों की बैसाखी पर भी इस सरकार ने बड़ी शान से सीना चौड़ा करते हुए डाका डाला बदले में करने वाले को पुरस्कार स्वरुप शान से विदेश मंत्रालय मिलता है। यकीन मानिये कनिष्क सिंह जिनका जिनका नाम सी डब्लू जी घोटाले में पहले भी आ चुका है और इस महाघोटाले में भी आ रहा है राहुल गाँधी के बहुत करीबी भी हैं बहुत हद तक संभव है कि बहत कुछ हड़प लेने के बावजूद उनको भी पुरस्कार स्वरुप बहुत कुछ मिलेगा ही। सीबीआई से जांच का मतलब सीधा सा यही है कि किसी ने यदि किसी की दाएं हाथ से हत्या कर दी तो हत्यारा यह तर्क दे कर बच रहा है कि मै बाएँ हाथ से जाँच करा लेता हूँ देखियेगा दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। वैसे जब कांग्रेस की इमानदारी पर मुझे किसी मजे हुए राजनीतिज्ञ द्वारा हुए दिए हुए वक्तव्य की याद आती है उनका कहना था "...जब कांग्रेस इमानदारी की बात करती है तो ऐसा लगता है जैसे कोई हिजड़ा कामशास्त्र समझा रहा हो ..."
Friday, 15 February 2013
राहुल गाँधी ने हिटलर स्टाइल में साम्यवादियों को अगरतल्ला में हड़का दिया... साफ साफ कह दिया कि उनको देश बहार फेंक दिया जाएगा। उन्होंने ऐसा करते समय अपनी बाँहों का आस्तीन चढ़ाया था या नहीं मुझे नहीं मालूम लेकिन इतना तो पता चला है कि उनके धमकी से साम्यवादियों में कोई खलबली नहीं मची। एक साम्यवादी कैडर हँसते बात कर रहे थे। मैंने उनके हंसने का राज पूछा तो कहने लगे "...बड़ा ही अच्छा हुआ राहुल गाँधी आ गए ..." मैंने कहा "...लेकिन वो तो आपके खिलाफ प्रचार कर रहे हैं ...!" इसपर उन्होंने जोर से ठहाका लगाया बोले "...अच्छा ! मुझे तो लगा कि वो हमारा प्रचार कर रहे हैं ..." मैंने कहा "...इतना आत्मविश्वास ...!" उन्होंने कहा "...इतना जान लीजिये ये जयपुर नहीं है ..." मेरी जिज्ञासा जागी पूछा "...नहीं तो ...?" उन्होंने सीधा सपाट उत्तर दिया "...नहीं तो हम भी आंसू बहा रहे होते ..." मैंने कहा "...लेकिन उन्होंने तो आप लोगों को धमकी दी है ...!" इस पर वो कहने लगे "...हम लोग मनमोहन सिंह थोड़े ही हैं ...कि एक घुडकी दी और चुप हो गए ..." मैंने कहा "...ऐसे तो आप उनकी पार्टी की अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं ...!" उन्होंने मुझसे ही पूछ लिया "...यदि आपके ऊपर कोई हमला करे तो आपका स्टैंड क्या होगा ...?" मैंने कहा "...लेकिन आपको तो उनके हमले से खशी है ..." वो ठहाका लगते हुए बोले "...जी बिल्कुल ...!" "..फिर .." मैंने उत्सुकता से पूछा "...देखिये राजनीति में ऐसा थोड़े ही होता है कि आप पान खाईये केरल में थूकिये कश्मीर में ..." मेरी जिज्ञासा शांत नहीं हुई मैंने पूछा "...मतलब ...?" उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा "...नरेन्द्र मोदी से पूछिए ..." मैंने जोर से कहा "...थोडा और स्पष्ट करेंगे ...?" उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा "...बिहार, यूपी और गुजरात जैसी नौटंकी यहाँ भी कर रहे हैं ..." मैंने कहा "...तब तो आपको प्रचार करने की जरूरत ही नहीं है ...!" उन्होंने कहा "...हमारा उद्देश्य यही था कि वो अपनी असलियत यहाँ भी दिखा दें ...!" मैंने कहा "...ये चुनाव के बाद पता चलेगा ..." वो बोले "...देखिये हम यहाँ सत्ता में हैं ..." मैंने कहा "...लेकिन वो तो कह रहे हैं वो सत्ता में आ रहे हैं ..." उन्होंने ने जोर से हँसते हुए तर्क दिया "...वो ऐसा तब कर पाएंगे जब हमें देश के बाहर फेंक देंगे ..." मैंने कहा "...वो तो ये भी कह रहे थे की उनका संघर्ष साम्यवादियों को सत्ता से बहार करने का है ..." वो अपनी हंसी रोकते हुए बोले "...भेज देते मनमोहन सिंह को ..." मैंने कहा "...लेकिन उन्होंने तो उनको घुडकी दे कर चुप्प करा दिया है ..." वो बोले "...वही तो अपनी चप्पी से सवालों के आबरू बचाते फिर रहे हैं भले ही देश की आबरू लुट जाए वो भी भरे बाज़ार या चलती ..." मैंने पूछा "...उनकी हिटलर शाही पर आप कुछ नहीं करेंगे ..?" उन्होंने उत्तर दिया "... उन्होंने तो जयपुर में खुद को जज घोषित कर दिया जाहिर है उनको झेलने की बारी कांग्रेसियों की है ...मै क्या कर सकता हूँ ..." मैंने कहा "...मतलब आप कुछ नहीं करेंगे ...!" वो बोलने की स्थिति में थे या नहीं मुझे पता नहीं चल पा रहा था ...लेकिन मुस्कुराते जा रहे थे ....मैंने उनको नमस्कार कह दिया।
Monday, 11 February 2013
मलमल के झकास सफेद कुर्ता-पायजामा साथ में "अन्ना" टोपी पहने एक खांटी कांग्रेसी कुर्सी से चिपके मंद-मंद मुस्कुराते हुए अपना संभवतः भविष्य देख रहे थे ...मैंने तभी उनसे पुछा "...किसी और को भी फांसी पर चढ़ाना है क्या ..?" वो अचम्भित होते हुए बोले "... अरे नहीं नहीं ...!" मैंने कहा "...तो हो गया काम ..." वो बोले "...काम तो हो गया ..." मैंने कहा "...बड़ा सुकून महसूस कर रहे हैं .." उन्होंने कहा "...असली सुकून तो तब मिलेगा जब असली आतंकवादी सूली पर चढ़ेंगे ...""..तो क्या अजमल और अफजल असली नहीं थे ..?" मैंने जिज्ञासावश पूछा तो वो कहने लगे "..पहले पी. एम. महोदय और मैडम प्रसीडेंट बहुत आंसू बहा चुकी हैं .." मैंने कहा "...मतलब अब हिन्दुओं की बारी है ...!" उनकी मुस्कराहट बढ़ गयी वो बोले "...कोशिश जारी है ...आखिर प्रसीडेंट मैडम को भी तो खुश करना है ..." मैंने कहा "...मतलब आपकी प्रेसीडेंट मैडम खुश नहीं हैं इस फांसी से ..." उन्होंने कहा "...आखिर मामला संतुलित भी तो होना चाहिए ..." मैंने फिर पूछा "...जब आपकी प्रेसीडेंट मैडम खुश नहीं है तो फिर आपका ये गेट अप ..." उन्होंने कहा "...ये अफजल उसके पहले अजमल ..." मैंने बीच में ही टोका "...इसीलिए ये झकास सफ़ेद मलमल ..." वो हँसते हुए बोले "...भाजपा को इस पर राजनीति नहीं करनी चाहिए .." मैंने पूछा " ...तो फिर उनको क्या करनी चाहिए ...आपके गृहमंत्री ने ये नहीं कहा ..." वो बोले "...देखिये ये गाँधी टोपी बदल कर अन्ना टोपी हो गयी ..." मैंने पूछा "...भरोसा दिलाने के लिए ये पर्याप्त कैसे है ...?" उन्होंने उत्तर दिया "...अन्ना जी ने ही भरोसा दिया था राहुल गाँधी का भावुक भाषण सुन कर ..." मैंने कहा "...लेकिन भाजपा वाले थोड़ा भी लिहाज नहीं कर रहे क्यों ..." उन्होंने प्रतिउत्तर में कहा "...इसीलिए तो हिन्दू आतंकवादी हो गए हैं ...बुजुर्गों का लिहाज भी भूल गए हैं ..." मैंने फिर पूछा "...भाजपा को करना क्या चाहिए ...?" वो बोले "...आतंकवाद एक सामान्य समस्या है जिससे हमारे साथ-साथ पाकिस्तान भी जूझ रहा है ..." मैंने बीच में ही टोका "...तो करना क्या चाहिए भाजपा को .." वो तपाक से बोले "...लिहाज करना चाहिए और क्या ..." मैंने फिर पूछा "...वो लोग तो ये सब भूल चुके हैं ...फिर ..." वो बोले "...देखिये मामला उतना गंभीर नहीं है जितना कि दिखाया जाता है ..." मैंने पूछा "...भाजपा के इस गलती पर आप क्या सजा देंगे उनको .." उन्होंने उत्तर देते हुए कहा "...उनका एनडीए टूट रहा है ...!" मैंने बीच में ही कहा "...आपका कहना है कि वो अपनी करनी का फल भुगत रहे हैं ...!" वो बोले "...नितीश कुमार भले ही एनडीए में हों लेकिन हैं तो हमारी ही बिरादरी के ...!" मैंने बीच में ही टोका "...तो .." वो बोले "...टपका कैसे दिया जाता है उनको अच्छी तरह पता है ..." मैंने कहा "...आपका आत्मविश्वास बहुत बढ़ गया है ...!" वो हँसते हुए बोले "...यही तो राजनीति है कब किसको सूली पर चढ़ाना है ...कब किसको सूली से उतारना है ...सब पता है ..." मैंने कहा "...इसमें यमराज भी आपकी मदद कर रहे है अजमल के समय डेंगू फैला था और अफजल के समय स्वाइन फ्लू ..." उन्होंने कहा "..ये तो इत्तेफाक है ..." मैंने फिर कहा "...लेकिन कानून, देश , सिस्टम भी तो कोई चीज है .." काफी देर तक वो कुछ नहीं बोले कुर्सी से चिपके ही रहे ...शायद अब वास्तव में उनको बहुगुणा के १९७४ का चिपको आन्दोलन याद आ रहा था।
Friday, 8 February 2013
छात्रों में उच्च मानसिक क्षमता अतिआवश्यक
आज के प्रतियोगी समाज में छात्रों को प्रतियोगिता में आगे बने रहने या निकलने के लिए "उच्च मानसिक क्षमता " की बेहद जरूरत है। हमारी जीवन - चर्या में जितनी क्लिश्ताताएं एवं समानताएं बढती जाती हैं मानसिक समस्याएं भी बढती चली जाती हैं। एक सीमा तक तो हमारा "मस्तिष्क" उन समस्याओं से स्वयं ही निपटने का प्रयास करता है किन्तु जब तनाव, चिंता , क्रोध तथा अवांछित प्रतिक्रिया जब उस सीमा से आगे निकल जाती है तो छात्रों की बुद्धिमत्ता (intelligence) में तेजी से गिरावट होती है जिससे "मानसिक क्षमता" बहुत कम हो जाती है। ऐसे छात्रों का उच्च श्रेणी में आना या बने रहना तथा प्रतियोगी छात्रों का प्रतियोगिता में चयनित होना न सिर्फ काफी मुश्किल हो जाता है बल्कि उस दौर के बाद उनका सामान्य जीवन भी मुश्किल में पड़ जाता है।
निओसेल्फ : मेंटल एम्पावरमेंट एंड क्यूरिंग सेंटर, अलहदादपुर, गोरखपुर ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी जो एक अतिउन्नत एवं अधिनिक मनोविज्ञान है, के माध्यम से न सिर्फ छात्रों को "मानसिक रूप सशक्त" कर "मानसिक क्षमता" में वृद्धि करती है बल्कि सभी प्रकार की समस्याओं का स्थाई निदान भी उपलब्ध कराती है। इससे छात्रों की मानसिक क्षमता मात्र 2 से 4 सप्ताह में ही कई गुना बढ जाती है।
नोट : निदान बिलकुल औषधि रहित है
विस्तृत जानकारी हेतु कृपया ये लिंक देखें - www facebook.com/Perfect.Neo.Mind या
संपर्क करें - 09838953532
Absolute Need of High Mental Potential in Students
आज के प्रतियोगी समाज में छात्रों को प्रतियोगिता में आगे बने रहने या निकलने के लिए "उच्च मानसिक क्षमता " की बेहद जरूरत है। हमारी जीवन - चर्या में जितनी क्लिश्ताताएं एवं समानताएं बढती जाती हैं मानसिक समस्याएं भी बढती चली जाती हैं। एक सीमा तक तो हमारा "मस्तिष्क" उन समस्याओं से स्वयं ही निपटने का प्रयास करता है किन्तु जब तनाव, चिंता , क्रोध तथा अवांछित प्रतिक्रिया जब उस सीमा से आगे निकल जाती है तो छात्रों की बुद्धिमत्ता (intelligence) में तेजी से गिरावट होती है जिससे "मानसिक क्षमता" बहुत कम हो जाती है। ऐसे छात्रों का उच्च श्रेणी में आना या बने रहना तथा प्रतियोगी छात्रों का प्रतियोगिता में चयनित होना न सिर्फ काफी मुश्किल हो जाता है बल्कि उस दौर के बाद उनका सामान्य जीवन भी मुश्किल में पड़ जाता है।
निओसेल्फ : मेंटल एम्पावरमेंट एंड क्यूरिंग सेंटर, अलहदादपुर, गोरखपुर ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी जो एक अतिउन्नत एवं अधिनिक मनोविज्ञान है, के माध्यम से न सिर्फ छात्रों को "मानसिक रूप सशक्त" कर "मानसिक क्षमता" में वृद्धि करती है बल्कि सभी प्रकार की समस्याओं का स्थाई निदान भी उपलब्ध कराती है। इससे छात्रों की मानसिक क्षमता मात्र 2 से 4 सप्ताह में ही कई गुना बढ जाती है।
नोट : निदान बिलकुल औषधि रहित है
विस्तृत जानकारी हेतु कृपया ये लिंक देखें - www facebook.com/Perfect.Neo.Mind या
संपर्क करें - 09838953532
Absolute Need of High Mental Potential in Students
In today’s competitive world,
students require "high mental ability" to keep or make themselves ahead and beat
the competition. As complications and homogeneousness in circumstances increase
vulnerability towards mental problems also increases. Up to certain level our
mind deals all problems itself but on crossing that level of anxiety, stress, aggression,
etc. in students we witness a
drastic downfall in intelligence and over all mental ability. This results not
only poorly pursuit of courses, un success or rejection in competitions but
also hard complications in their daily routine life.
Neoself
: Mental Empowerment and Curing Center, Allahdadpur, Gorakhpur, offers to the
point and specific solutions to the students by increasing their "Mental Ability" through "Mental Empowerment" by Graphology
and Graphotherapy which is advance and ultramodern form of psychology in multiply just within 2 to 4 weeks.
Note
: Therapy is absolutely without medication
For more details please see the links : www.facebook.com/Perfect.Neo.Mind or Contact - 09838953532
...कांग्रेस को अपना "मेक ओवर" करने के लिए "सोशल नेटवर्किंग" पर "नहीं" आना चाहिए क्योंकि इस पर काम करने के लिए "अतिवादी मनो-अवस्था" की जरूरत है सकारात्मक या नकारात्मक क्योंकि मानव मस्तिष्क "आल या नन" के सिद्धांत पर काम करता है लिहाजा दोनों ही स्थितियां कांग्रेस के लिए बेहद खतरनाक हैं। लिहाजा "मोदी की तर्ज" पर खुद मेक ओवर करने के चक्कर में कांग्रेस अपनी बची - खुची साख भी लुटा बैठेगी, एडवांस मनोविज्ञान के नजरिये से ये तय है ...
Wednesday, 6 February 2013
पाकिस्तान में सपने बड़े सस्ते बिकते हैं पता नहीं किस गली में अमेरिका के नाक में उंगली करने का सपना मिले या फिर किस गली कश्मीर हडपने का सपना मिल जाए वगैरह वगैरह । वस्तुतः पाकिस्तान में सपनो का व्यापक व्यापार जिया-उल-हक़ ने 80 के उत्तरार्ध में शुरू किया था नतीजा ये हुआ कि आज पाकिस्तान खुद उस कुत्ते की जिन्दगी जीने को मजबूर है जो कहीं का भी नहीं रहा, लेकिन हमारे कांग्रेसी भाईयों को पाकिस्तान पर बहुत दया आती है। उनके हर सपने को पूरा करने की शपथ खाए बैठे हैं पूरा कर के रहेंगे। पाकिस्तान की ही अंधी गलियों में बिकने वाले सपनो की दुकान से 26.11 के दोषी अजमल कसाब और उसकी टीम सपना ही खरीदने गयी थी ठीक उसकी कीमत की भरपाई भी करने की कोशिश भरसक कांग्रेसियों ने की लेकिन डेंगू ने सारा खेल बिगाड़ दिया। मैंने कांग्रेसी से पूछा तो वे मानवता की दुहाई देते हुए बोले " ...पाकिस्तान हामारा पड़ोसी है .." मैंने पूछा "...ये आकाशवाणी आपको कब सुनाई दी ...?" वो कुछ नहीं बोले। ऐसे ही सपनों के पाकिस्तानी खरीदार से पूछा "...कहाँ तक पढ़े हो ...?" वो बोला "...ए . के . 47 चलाना चाहता हूँ .." मैंने फिर पूछा "...वो ठीक है लेकिन क्यों ..?" वो बोला "...मेरे दोस्तों के पास कलाश्निकोव है ...वो ले कर घुमते भी हैं .." मैंने कहा "...तो तुम उन पर रौब ज़माना चाहते हो ..!" वो बोला "...हाँ ! रौब तो जमाऊंगा लेकिन उसके साथ-साथ बड़ा आदमी भी बनना है मुझे ..." मैंने पूछा "...क्या मतलब है तुम्हारा ...?" कहने लगा "...इंडिया जाऊंगा और वहाँ का पी .एम . बनूँगा ..." मुझे बहुत आश्चर्य हुआ पूछा "...तुमको इतना भरोसा कैसे है ...?" उसने जवाब दिया "...यहाँ हाफिज सईद जनाब जैसे ऐसा ही कहते है ...!" मैंने उत्कंठा से पूछा "...थोड़ा साफ साफ बताओ .." उसने कहा "...वो लोग कहते है पाकिस्तान में कुत्तों की जिन्दगी से निजात पानी है तो इंडिया चले जाओ ...जन्नत में पहुँच जाओगे ..." मैंने कहा "... इसीलिए ए . के . 47 लेना चाहते हो ...?" उसने कहा " ... वहां के होम मिनिस्टर ने कहा है कि सारे हिन्दू आतंकवादी हो चुके हैं इसलिए ..." मैंने फिर पूछा "...पी . एम . कैसे बनोगे ...?" उसने कहा "...मेरी जैसे लोगों की मदद करने के लिए वहां कांग्रेस तो है ही ...!" मैंने फिर पूछा "...तुमको इतना कॉन्फिडेंस कैसे है ..?" उसने कहा "...आपके शकील अहमद ने कहा की आडवानी जी इंडिया पाकिस्तान से सत्ता के लिए गए ...!" मैंने कहा "...लेकिन पी .एम . तो नहीं बन पाए ...!" उन्सने तपाक से कहा "...मनमोहन सिंह तो बन गए ...इन्दर कुमार गुजराल भी बन ही गए थे ...लिहाजा हम भी बन ही जाएँगे..."...लेकिन जाओगे कैसे ...?" मैंने पूछा तो उसने उत्तर देते हुए कहा "...जैसे और लोग जाते हैं ..." मैंने कहा "...लेकिन ऐसे तो लोग मारे भी जाते हैं ..." उसने बड़ी बेबाकी से जवाब दिया "...जब इंडियन सोल्जर के साथ ऐसी बेरहमी होने पर कांग्रेस गवर्नमेंट ने पाकिस्तान के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया तो मेरा भी कुछ नहीं बिगड़ेगा ..इस बात की गारंटी हाफिज सईद लेता है ...वैसे भी इंडिया में उनको आजकल बड़ी इज्जत मिल रही है ..." मेरे सामने चुप हो जाने के सिवा कोई और चारा ही नहीं था।
Monday, 4 February 2013
बच्चों को बुद्धिमान, सशक्त एवं सक्षम बनाएं
अत्यधिक स्कूली दबाव, अनअपेक्षित व्यवहार एवं घरेलू माहौल के कारण बच्चे काफी तनाव का सामना करते हैं। जिससे न सिर्फ उनमे पढ़ाई एवं अन्य आवश्यक कार्यों के प्रति विरक्ति उत्पन्न होने लगती है बल्कि उनकी "मानसिक क्षमता" भी काफी घट जाती है। परिणाम यह होता है है कि न तो पढाई ठीक से कर पाते हैं और न ही उनका व्यवहार ही सही रह पाता है। साथ ही बच्चों में असामाजिकता, निष्ठुरता एवं अन्य व्यावहारिक व मानसिक समस्याएं घर कर जाती हैं।
उपाय सिर्फ एक ही है कि प्रारम्भ में ही बच्चों को मानसिक रूप से सक्षम, सशक्त एवं बुद्धिमान (intelligent) बना दिया जाए जिससे वो पढाई में तो आगे रहें ही साथ ही उनका व्यवहार उच्चकोटि का रहे, उनकी सामाजिकता भी उच्च कोटि की बने। वैसे भी सामान्य बच्चों को अधिक बुद्धिमान, सशक्त एवं सक्षम होना ही चाहिए।
निओसेल्फ़ : मेंटल एम्पावरमेंट एंड क्यूरिंग सेंटर, अलहदादपुर, गोरखपुर इस समस्या का ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी (उन्नत एवं अत्याधुनिक मनोविज्ञान ) के माध्यम से सरल, कारगर एवं स्थाई निदान उपलब्ध कराती है।
नोट - निदान पूर्णतः औषधि रहित है
विस्तृत जानकारी हेतु कृपया लिंक देखें - www.facebook.com/Perfect.Neo.Mind, www.facebook.com/perfect.noe.mind या संपर्क करें - 09838953532
Make Your Child Intelligent, Mentally Capable and Empowered
Due to overburden of schooling, inappropriate behavior towards children and family environment, children face high level of stress. This causes not only reluctance from study but also decreases their "mental potential". This results neither they pursue their study properly nor their behavior in appropriate way. Along with these in children anti-socialism, senselessness, behavioral and mental problems take place.
The best way to deal with these is to make them mentally capable, empowered and intelligent in very beginning during school days so they could ahead in study, keep high level of behavior and sociability Well ! generally all children must be more intelligent, mentally capable and empowered.
Neoself : Mental Empowerment and Curing Center, Allahdadpur, Gorakhpur, provides its to the point, specific, quick and permanent solution through Graphology and Graphotherapy (Advance and Ultramodern Psychology)
Note - Therapy is absolutely without Medication
For details please see the links - www.faceboo.com/Perfect.Neo.Mind, www.facebook.com/perfect.noe.mind or contact - 09838953532
अत्यधिक स्कूली दबाव, अनअपेक्षित व्यवहार एवं घरेलू माहौल के कारण बच्चे काफी तनाव का सामना करते हैं। जिससे न सिर्फ उनमे पढ़ाई एवं अन्य आवश्यक कार्यों के प्रति विरक्ति उत्पन्न होने लगती है बल्कि उनकी "मानसिक क्षमता" भी काफी घट जाती है। परिणाम यह होता है है कि न तो पढाई ठीक से कर पाते हैं और न ही उनका व्यवहार ही सही रह पाता है। साथ ही बच्चों में असामाजिकता, निष्ठुरता एवं अन्य व्यावहारिक व मानसिक समस्याएं घर कर जाती हैं।
उपाय सिर्फ एक ही है कि प्रारम्भ में ही बच्चों को मानसिक रूप से सक्षम, सशक्त एवं बुद्धिमान (intelligent) बना दिया जाए जिससे वो पढाई में तो आगे रहें ही साथ ही उनका व्यवहार उच्चकोटि का रहे, उनकी सामाजिकता भी उच्च कोटि की बने। वैसे भी सामान्य बच्चों को अधिक बुद्धिमान, सशक्त एवं सक्षम होना ही चाहिए।
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नोट - निदान पूर्णतः औषधि रहित है
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Due to overburden of schooling, inappropriate behavior towards children and family environment, children face high level of stress. This causes not only reluctance from study but also decreases their "mental potential". This results neither they pursue their study properly nor their behavior in appropriate way. Along with these in children anti-socialism, senselessness, behavioral and mental problems take place.
The best way to deal with these is to make them mentally capable, empowered and intelligent in very beginning during school days so they could ahead in study, keep high level of behavior and sociability Well ! generally all children must be more intelligent, mentally capable and empowered.
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