Saturday, 12 January 2013

ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथिरेपी मनोविज्ञान का अतिउन्नत स्वरुप है जो मस्तिष्क के "न्यूरल पाथवे तंत्र" (सीखने तीसरी एवं अंतिम अवस्था) पर कार्य करती है। इससे मस्तिष्क को अधिगमित कर किसी भी अवस्था में स्थापित किया जा सकता है वह भी बिना किसी दवा या औषधि के तथा 2 से 4 सप्ताह के अन्दर ही जो बहुत तेज गति है। इससे  हमारी मानसिक क्षमता बहुत ज्यादा बढ जाती है और विकास एवं सफलता के लिए अनंत संभावनाओं के द्वार स्वतः खुल जाते हैं जैसे -
1. इससे बच्चे अत्यधिक बुद्धिमान, स्मार्ट, समाजिक, तीक्ष्ण बुद्धि वाले बन जाते हैं
2. प्रतियोगी परीक्षा की तयारी करने वाले छात्रों की "मानसिक क्षमता" बहुत ज्यादा बढ जाती है जिसकी उन्हें    बहुत सख्त जरूरत होती है साथ में सम्बंधित समस्याओं का स्थाई समाधान भी
3. व्यावहारिक एवं व्यवहारजन्य पारिवारिक समस्याओं का स्थाई एवं आनंदकारी समाधान
4. सभी प्रकार की मानसिक समस्याओं का तीव्रतम स्थाई निदान एवं मानसिकताजन्य शारीरिक समस्याओं का भी बिना किसी दवा या औषधि के, साथ ही खतरनाक दवाओं से मुक्ति भी मिल जाती है।
5. सभी सामान्य व्यक्ति के लिए भी "प्रचंड मानसिक सशक्तिकरण" जो विकास के लिए बेहद जरूरी है।

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